‘भारतीय जेलों और पुलिस हवालातों से’ कैदियों की फरारी चिंताजनक!

punjabkesari.in Sunday, May 17, 2026 - 03:32 AM (IST)

भारतीय जेलें आज घोर अव्यवस्था का शिकार होने के कारण ‘सुधार घर’ की बजाय ‘बिगाड़ घर’ बन कर रह गई हैं। जेलोंमें हिंसा, मारपीट और पुलिस की हिरासत से हवालातियों की फरारी एक आम बात हो गई है जिसकी इसी वर्ष लगभग 4 महीनों की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं

 * 15 जनवरी को ‘सिवनी’ (मध्य प्रदेश) में बलात्कार के आरोप में बंद 3 कैदी मैडीकल जांच के बाद अस्पताल से वापस जेल में लाए जाने के दौरान फरार हो गए। 
* 28 जनवरी को ‘अयोध्या’ (उत्तर प्रदेश) में हत्या के प्रयास और बलात्कार के गंभीर आरोपों में जिला जेल की ‘तन्हाई बैरक’ में बंद 2 शातिर कैदी ‘गोलू अग्रहरि’ तथा ‘शेर अली’ जेल की दीवार तोडऩे के बाद जेल की बाऊंड्री वॉल से कूदकर फरार हो गए। 

* 5 फरवरी को ‘सदिया जेल’ (असम) से 4 कैदी रस्सी के सहारे ऊंची दीवार फांदकर भाग निकले।  
*  6 फरवरी को ‘लुधियाना’ (पंजाब) में मर्डर केस का एक विचाराधीन आरोपी पुलिस कस्टडी से उस समय फरार हो गया जब उसे इलाज के लिए लुधियाना के सिविल अस्पताल लाया गया था। 
* 9 मार्च को ‘सिद्धार्थ नगर’ (उत्तर प्रदेश) के एक पुलिस थाने में बंद 2 ईनामी अभियुक्त पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए। अभियुक्तों ने पेट  दर्द का बहाना बनाया और लॉकअप रूम का दरवाजा खुलवा कर भाग निकले, हालांकि उन्हें बाद में पकड़ लिया गया।

* 27 मार्च को ‘रेवाड़ी’ (हरियाणा) की हाई टैक जेल में साइबर फ्राड के आरोप में बंद उत्तर प्रदेश के 2 विचाराधीन कैदी जेल की दीवार से सीढ़ी लगाकर फरार हो गए जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। 
* 18 अप्रैल को ‘यरवदा’ ओपन जेल (पुणे, महाराष्ट्र) से  ‘समीर शेख’ नामक एक उम्रकैदी फरार हो गया।
* 8 मई को ‘संतोष लक्ष्मण भिंगारे’ नामक उम्रकैदी अपनी बेटी की सगाई में शामिल होने के लिए जेल से भाग गया।
 * 12 मई को ‘अहमदाबाद’ (गुजरात) की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली ‘साबरमती सैंट्रल जेल’ में मर्डर और पोक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा काट रहा ‘रामाभाई परमार’ नामक कैदी सुबह के समय मेन गेट से सीधा बाहर निकल कर फरार हो गया। शाम को गिनती के दौरान सी.सी.टी.वी. देखने पर उसके भागने का खुलासा हुआ।

* 13 मई को ‘यरवदा’ ओपन जेल (पुणे, महाराष्ट्र) में मर्डर के केस में उम्रकैद की सजा काट रहा ‘जनार्दन शंकर अडसूले’ जेल से गायब हो गया। 
* 13 मई को ही ‘गोलाघाट’ (असम) जिले में चोरी और डकैती के मुख्य आरोपी ‘दिलीप सहनी उर्फ ‘लगन’ ने पुलिस द्वारा पूछताछ के सिलसिले में ‘देरगांव’ ले जाए जाते समय अचानक पुलिस कर्मियों को धक्का देकर भागने की कोशिश की। पुलिस की चेतावनी के बाद भी जब वह नहीं रुका, तो पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिससे उसकी मौत हो गई।

* 15 मई को ‘पटियाला’ (पंजाब) की हाई-सिक्योरिटी सैंट्रल जेल से तीन कैदी दीवार फांदकर भाग निकले। भागने के कुछ ही घंटों के भीतर तीनों को पकड़ लिया गया।  
भारतीय जेलों की सुरक्षा व्यवस्था में चूकों के ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं। हर बड़ी घटना के बाद प्रशासन द्वारा व्यवस्था को चाकचौबंद करने की बात कही जाती है परंतु हालात वही रहते हैं। 
देश में जेलों की क्षमता से ज्यादा कैदी इसका एक बड़ा कारण है। देश में जेलों में 4.54 लाख कैदियों की क्षमता है परंतु इस समय इनमें 5.11 लाख कैदी बंद हैं। क्षमता से अधिक कैदियों के जेल में बंद होने तथा स्टाफ की कमी के कारण इसका प्रभाव जेलों के प्रबंधन पर पड़ रहा है। न्यायिक प्रक्रिया सुस्त होने के कारण विचाराधीन कैदी लम्बे समय तक जेलों में बंद रहते हैं जिससे जेलों पर बोझ बढ़ रहा है। अत: कैदियों की फरारी पर रोक के लिए जेलों का प्रबंधन ठीक करने, कैदियों की संख्या कम करने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।—विजय कुमार 


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