नशा तस्करी-कर्जा एवं माफिया की जकड़ से त्रासदी की ओर बढ़ता पंजाब

punjabkesari.in Tuesday, Dec 07, 2021 - 05:45 AM (IST)

पंजाब देश की खडग़ भुजा और ‘चावल की टोकरी’ के रूप में जाना जाता है, जिसने हमेशा अपनी जीवंत और स्वस्थ संस्कृति के माध्यम से बाकी दुनिया को विकास और समृद्धि का रास्ता दिखाया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से राज्य गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है, जिससे हर पंजाबी पीड़ित है। विडम्बना यह है कि ये गम्भीर समस्याएं कुशासन और राज्य सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और दूरदृष्टि की कमी का परिणाम हैं। 

गुरुओं की धरती आज कठिन दौर से गुजर रही है। आर्थिक विकास चरमरा गया है, बेरोजगारी आसमान छू रही है, कृषि क्षेत्र में मंदी है, किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं और कर्ज के जाल में फंस रहे हैं, जबकि राज्य भारी कर्ज में डूबा हुआ है। इन समस्याओं का मूल कारण सुस्त आर्थिक विकास है जो नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी कई अन्य समस्याओं को जन्म दे रहा है, जिसका तत्काल समाधान किए जाने की आवश्यकता है। 

आर्थिक आपदा की ओर अग्रसर : आजादी के बाद पंजाब की अर्थव्यवस्था को हरित क्रांति के रूप में बढ़ावा मिला। इसने पंजाब को प्रति व्यक्ति आय के मामले में नम्बर एक राज्य बना दिया और पंजाब ने 2 दशकों से अधिक समय तक इस उपाधि का आनंद लिया। मगर पिछले 3 दशकों के आंकड़े बताते हैं कि देश के अन्य हिस्सों की तुलना में पंजाब में कृषि विकास दर कम रही है। आज की स्थिति में पंजाब जी.डी.पी. के मामले में देश का 15वां और प्रति व्यक्ति आय के मामले में 16वां सबसे बड़ा राज्य है। 

पंजाब ने केवल चावल और गेहूं की खेती पर ध्यान केंद्रित किया और कृषि क्षेत्र में विविधता लाने का प्रयास नहीं किया। साथ ही यह 1991 के उदारीकरण का लाभ नहीं ले सका। यह एक स्पष्ट मामला है जहां कृषि का आर्थिक लाभ अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों तक नहीं पहुंच सका। औद्योगिक या सेवा क्षेत्र में दखल की कमी के कारण बेरोजगार युवाओं का रोजगार के अवसरों के लिए अन्य देशों में प्रवास हुआ है। 

पंजाब के सरकारी खजाने में धन का अभाव है। कैग के हालिया अनुमान के मुताबिक, पंजाब का सार्वजनिक कर्ज अगले 5 सालों में दोगुना हो जाएगा। सी.ए.जी. का कहना है कि पंजाब अपनी नई उधारी का इस्तेमाल पहले के कर्जों को चुकाने के लिए कर रहा है, जिससे पूंजीगत व्यय के लिए बहुत कम धन बचा है। नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार पंजाब की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से नीचे आ गई है और इसका प्रति व्यक्ति पूंजीगत व्यय देश में सबसे कम है। 

इस स्तर पर हमें अपने कृषि क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है। फसल-विविधीकरण एक आवश्यकता है और बागवानी फसलों पर हमें ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जैसा कि हिमाचल कर रहा है। पंजाब में पर्यटन, कृषि से संबंधित उद्योगों, डेयरी, गन्ने की खेती जैसी कृषि गतिविधियों आदि में अपार संभावनाएं हैं। कृषि का समुचित दोहन करने वाली एक व्यावहारिक औद्योगिक नीति विकसित करनी चाहिए। 

नशीली दवाओं का खतरा : पंजाब के मालवा, माझा और दोआबा तीनों क्षेत्र मादक पदार्थों की तस्करी की गिरफ्त में हैं। नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए एक ट्रांजिट मार्ग होने के कारण पंजाब धीरे-धीरे मादक द्रव्यों के सेवन का केंद्र बन गया है। नशा पंजाब के युवकों के मन व शरीर को रोग की तरह अंदर ही अंदर खाए जा रहा है।

एन.सी.आर. ब्यूरो के अनुसार, एन.डी.पी.एस. अधिनियम 1985 के तहत पंजाब ने 2018 में 11,654 मामले दर्ज किए, जो देश में दूसरे सबसे अधिक हैं और जो देश भर में दर्ज ऐसे सभी मामलों का 19 प्रतिशत  है। पंजाब गोल्डन क्रिंसेंट (पाक, अफगान और ईरानी क्षेत्र) से सटा हुआ है, जो दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक क्षेत्र है और पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर सीमा सांझी करता है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार अफीम आधारित दवाएं, जैसे हैरोइन और खसखस की भूसी, भांग और फार्मास्यूटिकल सेडेटिव राज्य में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले नशीले पदार्थ हैं। हैरानी की बात यह है कि पंजाब न तो अफीम, भांग और उनके डेरिवेटिव जैसे पौधों पर आधारित प्राकृतिक पदार्थों का उत्पादन करता है और न ही ऐसे नशीले रसायनों का निर्माण करता है, जिन्हें सिंथैटिक और साइकोट्रोपिक दवाओं में संसाधित किया जाता है। इसका मतलब है कि पंजाब में नशा राज्य के बाहर से स्थानीय, अंतर्राज्यीय और अन्तर्राष्ट्रीय ड्रग तस्करों द्वारा नियंत्रित आपूर्ति नैटवर्क के माघ्यम से आता है। 

हालांकि प्रतिबंधित पदार्थों ने सभी हिस्सों में अपना जाल फैला लिया है परन्तु दुखद है कि पंजाब की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी व अन्य पाॢटयां पाकिस्तान द्वारा नशा, आतंकवादी तथा हथियार भेजने वाली सीमा पर बी.एस.एफ. के पहरा व क्षेत्र बढ़ाने का पंजाब विधानसभा में केवल राजनीतिक लाभ के लिए विरोध करती हैं। इतिहास से सीखने के बाद भी यह ऐतिहासिक गलती की जा रही है। 

नशाखोरी चुनावी मुद्दा रहता है लेकिन पिछले 4 साल में इसके खात्मे के लिए कुछ भी ठोस कार्य नहीं किया गया। नशीली दवाओं की तस्करी के प्रसार या युवाओं तक इसकी पहुंच को रोकने के लिए भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। राज्य सरकार एक व्यावाहिक और प्रभावी नीति बनाने में विफल रही है जिससे कि मादक पदार्थों पर अंकुश लगाया जा सके। अब तक इस बुराई को समाप्त करने के वादे के अलावा कोई सफल क्रियान्वयन नहीं हो सका है। 

राज्य को एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है जो मादक पदार्थों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की सांठगांठ को तोड़ सके। साथ ही कानून का सख्ती से पालन करना और तस्करों पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। इसके अलावा हथियारों व मादक द्रव्यों के प्रयोग को बढ़ावा देने वाले गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। 

पंजाब के लोकप्रिय गायकों के सहयोग से नशे के खिलाफ ‘प्रेरणा कथा’ का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि युवाओं को इसके प्रभाव से बचाया जा सके। नशीले पदार्थों से मुकाबला करने के लिए हमें एक राजनीतिक इच्छाशक्ति और एक प्रति-संस्कृति की भी आवश्यकता है।-तरुण चुघ(भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री)


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