किसानों-मजदूरों के मसीहा दीनबंधु चौ. छोटू राम

11/24/2021 4:48:25 AM

किसानों, मजदूरों एवं विशेष तौर से संयुक्त पंजाब के ग्रामीण समाज के मसीहा दीन बंधु चौ. छोटू राम का जन्म वैसे तो 24 नवम्बर, 1881 को रोहतक (हरियाणा) के छोटे से गांव गढ़ी सांपला में एक गरीब किसान सुखीराम के घर में हुआ, लेकिन बसंत पंचमी के त्यौहार के अवसर पर एक दिन लाहौर में एक किसान सम्मेलन के दौरान उन्होंने अपनी प्रबल इच्छा जाहिर की कि किसानों की खुशहाली एवं फसलों की खुशबू से परिपूर्ण बसंत पंचमी का पर्व ही मेरे जन्म दिवस के रूप में मनाया जाए। इसके साथ ही सेंट स्टीफन कालेज दिल्ली से स्नातक की डिग्री हासिल करना और सम्पूर्ण विद्यार्थी जीवन में वजीफे द्वारा कानून में स्नातक तक की डिग्री प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करना उनकी उच्च स्तरीय बुद्धिमता को प्रमाणित करता है। 

देश को साम्प्रदायिकता, भ्रष्टाचार एवं भाई-भतीजावाद जैसी कुरीतियों से बचाने तथा करोड़ों किसानों व मजदूरों को आॢथक शोषण से मुक्ति दिलाने हेतु उन्होंने अपने वकालत के पेशे को ठुकरा कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 1916 में रोहतक जिले के कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए लेकिन मात्र 4 वर्ष बाद कलकत्ता अधिवेशन में वर्ष 1920 में ही कांग्रेस द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन से अपनी असहमति जताते हुए कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया। 

फिर वर्ष 1923 में सर फजल हुसैन के साथ मिलकर किसान,मजदूर व छोटे काश्तकारों के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए नैशनल यूनियनिस्ट पार्टी का गठन किया। 1923 में पंजाब में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद दीनबंधु सर छोटू राम कृषि मंत्री बने और 26 दिसम्बर, 1926 तक मंत्री रहे। इस थोड़े से समय में ही उन्होंने जनहित में अनेकों कार्य किए जिनमें किसानों को साहूकारों व सूदखोरों के प्रभाव से मुक्ति दिलाने के लिए कई लाभकारी कानून पारित करवाए गए, जैसे कि ‘पंजाब कर्जा रहित अधिनियम 1934’, जिसके अनुसार अगर किसी काश्तकार ने कर्ज ली गई राशि को दोगुना या अधिक का भुगतान कर दिया है तो उसको कर्ज की राशि से स्वत: मुक्ति मिल जाएगी। 

‘पंजाब कर्जदार सुरक्षा अधिनियम 1936’, जिसके अनुसार पूर्व मालिक के कर्ज के लिए उसके वारिस की जमीन के हस्तांतरण और खड़ी फसल व वृक्षों को बेचने व कुर्की करने पर रोक लगी। इसी प्रकार ‘पंजाब राजस्व कानून 1928’, ‘पंजाब कर्जदाता पंजीकरण अधिनियम 1938’ व ‘रहनशुदा जमीनों की बहाली का अधिनियम 1938’ भी पारित किए गए। इन विधेयकों का प्रभावशाली क्रियान्वयन कर्जा पीड़ित किसानों के लिए वरदान साबित हुआ जिनके तहत किसान के मूलभूत कृषि यंत्र व साधन- हल, बैल आदि की किसी भी अवस्था में कुर्की नहीं की जा सकती। राष्ट्रीय योजनाओं में भाखड़ा नंगल डैम की प्रस्तावना का स्वरूप और उसका क्रियान्वयन चौ. छोटूराम की सबसे बड़ी देन है। 

चौ. साहब हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर रहे हैं। जब मुस्लिम लीग पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी को खत्म करने का प्रयास कर रही थी और देश विरोधी तत्वों द्वारा मजहब के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही थी, उस समय 1944 में चौ. छोटूराम ने मुस्लिम बहुल क्षेत्र लायलपुर में एक विशाल रैली आयोजित की जिसमें डिप्टी कमिश्नर व मुल्लाओं के विरोध के बावजूद भी 50,000 लोगों ने भाग लिया और राष्ट्र विरोधी ताकतों के इरादों को नकार दिया लेकिन अफसोस है कि चौ. साहब ज्यादा समय तक इन ताकतों का सामना करने के लिए जीवित नहीं रहे और राष्ट्र विरोधी ताकतें अलग इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान का गठन कराने में सफल रहीं। चौ. साहब स्पष्ट शब्दों में कहते थे कि ‘‘हम मौत पसंद करते हैं, विभाजन नहीं’’। 

उन्होंने जाट गजेटियर नाम से पत्रिका प्रकाशित करके किसान-मजदूर वर्ग के उत्थान के लिए शिक्षा अभियान चलाकर समाज में उनकी दिक्कतों को उजागर किया। वे गरीब व जरूरतमंद बच्चों को अपनी जेब से आर्थिक सहायता तक देते थे और जन साधारण तक शिक्षा का प्रसार करने के लिए गुरुकुल व जाट संस्थाओं की स्थापना की। उनके द्वारा स्थापित किए गए सर छोटू राम शिक्षा कोष से समाज के काफी लोगों ने सहायता प्राप्त की, जिनमें भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. चांदराम व पाकिस्तान के एक मात्र नोबेल पुरस्कार विजेता डा. अब्दुस सलाम शामिल हैं। 

उन दिनों कृषक व ग्रामीण समाज में बढ़ती हुई भुखमरी व बेरोजगारी को दूर करने के लिए सर छोटू राम ने अहम् भूमिका निभाई। उन्होंने रोहतक जिले में किसान मजदूरों के बच्चों को कांग्रेस की नीति के विरोध में सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। यही कारण है कि रोहतक जिले के अधिकारी सेना प्रमुख भी रह चुके हैं और एक दर्जन से अधिक मेजर व लैफ्टीनैंट जनरल के पदों पर तैनात हैं। चौ. छोटू राम महिला विकास, सुरक्षा के साथ-साथ उनकी शिक्षा व सम्मान के सदैव पक्षधर रहे। एक बार रोहतक के पास खाप पंचायतों ने मिलकर आग्रह किया कि आपके सुपुत्र नहीं है इसलिए आप दूसरी शादी करवा लो तो उन्होंने उनको लताड़ते हुए कहा था कि जब समस्त संयुक्त पंजाब के नर-नारी, सुपुत्र-सुपुत्रियां उनकी संतान हैं, तो दूसरी शादी क्यों करवाऊं।-डा. महेन्द्र सिंह मलिक(पूर्व पुलिस महानिदेशक, हरियाणा)
 


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