ट्रम्प प्रशासन से पूरी तरह तंग आए अमरीकी
punjabkesari.in Wednesday, May 27, 2026 - 03:43 AM (IST)
वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों के समय हर कोई नेता और राजनीतिक दल देश के मतदाताओं को दिन में तारे दिखाने के बड़े-बड़े वादे करते हैं। वे उनके जीवन को अप्रत्याशित स्वर्ग जैसी सुविधाओं से लबालब सराबोर करने के दावे पर दावे ठोकते हैं। अमरीका जैसी लोकतांत्रिक महाशक्ति के भीतर भी राष्ट्रपति चुनावों के समय विभिन्न पार्टियों से संबंधित नेता ऐसे ही वादे करते देखे जाते हैं। लेकिन व्यावहारिक तौर पर हमेशा ऐसे वादों और हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क देखा जाता है।
2024 में 47वें अमरीकी राष्ट्रपति के चुनावों में वर्तमान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने चुनाव अभियान के दौरान अमरीकियों से बहुत बड़े-बड़े वादे किए। उनमें सबसे बड़ा वादा यह था कि वह विश्व के इतिहास में अमरीका को फिर से एक महान अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करेंगे। परिणामस्वरूप, धड़ाधड़ अमरीकी युवा रिपब्लिकन पार्टी से जुडऩे लगे। निश्चित रूप से उन युवाओं ने ट्रम्प की जीत में अहम भूमिका निभाई।
वादा खिलाफी : 21 जनवरी, 2025 को सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने लोगों से किए गए वादों से बिल्कुल पीठ फेरकर अपने और अपने पूंजीपति मित्रों के मंसूबों को पूरा करने की ओर आंखें मूंदकर आगे बढऩे लगे। उन्होंने पूरे विश्व को अमरीकी आॢथक जकड़ में बांधने के लिए भारी-भरकम और डरावनी आयात-निर्यात संबंधी टैरिफ नीति लागू करने का ऐलान किया, जो ‘ट्रम्प टैरर टैरिफ’ के रूप में बदनाम हो रही है। इसके अलावा पड़ोसी सांझेदार कनाडा को अमरीका का 51वां राज्य बनाने, ग्रीनलैंड, पनामा नहर और गाजा पर कब्जे के पागलपन भरे घोषणापत्रों, इसराईल के शैतान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आत्मघाती जाल में फंसकर ईरान पर हमले के बाद आज अमरीका के हालात ये हैं कि ‘द इकोनॉमिस्ट’ सर्वे के अनुसार, 18 से 29 साल के युवा उनके वर्तमान प्रशासन से बुरी तरह नाराज हैं। महंगाई, बेरोजगारी, अंधकारमय भविष्य के कारण और आईस फैडरल एजैंसी की ताबड़तोड़ कार्रवाई के चलते उनकी लोकप्रियता, जो जनवरी 2025 में सत्ता संभालने के समय 45 प्रतिशत थी, अब गिरकर 25 से 33 प्रतिशत के बीच रह गई है।
निरपेक्ष सीनेटर बर्नी सैंडर्स के अनुसार, राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में पहले दिन से ही ट्रम्प अमरीकियों को भरोसा देते देखे जा रहे थे कि वह देश में महंगाई खत्म कर देंगे और अमरीका को फिर से विश्व का सर्वश्रेष्ठ देश बना देंगे। लेकिन अमरीका और इसके लोगों की बदकिस्मती यह है कि आज के ट्रम्प प्रशासन में गैस 28.4 प्रतिशत, हवाई किराया 20.7 प्रतिशत, एनर्जी 17.9 प्रतिशत, बीफ और वील (बछड़े का मांस) 14.8 प्रतिशत महंगे हो चुके हैं। ‘न्यूजवर्क टाइम्स’ और सिएना कॉलेज सर्वेक्षण ने ट्रम्प के दृष्टिहीन, एकाधिकारवादी, तानाशाह और मनमाने नेतृत्व के कारण अमरीकी लोगों में उनकी लगातार घटती लोकप्रियता को बेनकाब करके रख दिया है। इसके अनुसार 63 प्रतिशत लोगों ने उनके प्रति नाराजगी जाहिर की है, दो-तिहाई अमरीकी ईरान के खिलाफ युद्ध के उनके फैसले को गलत मानते हैं। इससे महंगाई बढऩे के कारण पूरे देश के अंदर त्राहि-त्राहि मची हुई है। इसी समय देश के अंदर मध्यावधि चुनावों की तलवार ट्रम्प प्रशासन पर लटक रही है। लोग उनकी रिपब्लिकन पार्टी से मुंह मोड़ रहे हैं। इस समय राजनीतिक स्थिति यह है कि डैमोक्रेटिक पार्टी 10 प्रतिशत आगे चल रही है।
ट्रम्प का झूठ : ट्रम्प के 45वें राष्ट्रपति के शासन और वर्तमान 47वें राष्ट्रपति के शासन के बीच विभिन्न सर्वे दर्शाते हैं कि वह हर रोज 21 झूठ अमरीका और विश्व समुदाय के आगे परोसते हैं। अप्रैल 4, 1949 में 12 देशों पर आधारित, यूरोप से उत्तरी अमरीका तक के क्षेत्र को तत्कालीन सोवियत संघ के विस्तारवाद और सैन्य शक्ति से बचाने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नाटो संगठन गठित किया गया था। महाशक्ति के रूप में अमरीका को बाकी नाटो देशों की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन पिछले 7 दशकों में भू-राजनीतिक स्थितियां बदल चुकी हैं। एक तो ट्रम्प नाटो सहयोगियों को अमरीका पर अनावश्यक बोझ समझते आ रहे थे और दूसरा, उन्होंने इन पर भी मनमर्जी से टैरिफ थोपना शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप, उनके एकाधिकारवादी व्यवहार से तंग आकर नाटो सहयोगियों ने ईरान युद्ध में उनका साथ देने से इंकार कर दिया। जर्मनी से चिढ़े हुए ट्रम्प द्वारा अभी-अभी 5 हजार सैनिक वापस बुलाने की कार्रवाई ने अमरीका और नाटो सहयोगियों के बीच बढ़ते अंतर को उजागर कर दिया है।
ट्रम्प प्रशासन अमरीकियों को झूठ परोस रहा था कि ईरान के साथ युद्ध के समय उसका खर्च 29 बिलियन आया है, जबकि स्टीफन सेल्वर रिपोर्ट के अनुसार, जो कि किं्वसी संस्था से संबंधित है, 60 दिवसीय युद्ध का खर्च 71 बिलियन डॉलर से भी अधिक आया है। उनके द्वारा प्रस्तुत विवरण दर्शाता है-1.2 बिलियन दैनिक खर्च, ऑप्रेशन खर्च 15.2 बिलियन, संपत्ति का नुकसान 11.9 बिलियन, युद्धक हथियार 41.2 बिलियन, इसराईल को भुगतान 2.9 बिलियन और इसके अलावा पेंटागन ने 100 बिलियन डॉलर की और मांग कर रखी है।
अंधी खाई : पिछले 16 महीनों के शासनकाल में ट्रम्प अमरीकी लोगों और विशेष रूप से युवाओं की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देते दिख रहे। इसके विपरीत, वह लगातार निरंकुश, चिड़चिड़े, बहके-बहके और धमकियों से भरे बयानों से लोगों को आतंकित करने वाले बनते जा रहे हैं। ईरान युद्ध के झटकों, आईस एजैंटों को विभिन्न शहरों में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने भेजने, ईसा मसीह की नकल करने, पोप लियो और सुप्रीम कोर्ट के जजों को सत्ता के नशे और अर्ध-पागलपन के अधीन बेइज्जत करने जैसी कार्रवाइयों के कारण उनकी लोकप्रियता दिन-ब-दिन घटती चली जा रही है।
दिसम्बर 2025 में हार्वर्ड यूथ पोल सर्वे के अनुसार, 18 से 29 साल के केवल 13 प्रतिशत युवा अमरीकी समझते हैं कि देश सही दिशा में चल रहा है, जबकि 57 प्रतिशत इसे गलत दिशा की ओर बढ़ता देख रहे हैं। केवल 30 प्रतिशत अमरीकी मानते हैं कि उनकी स्थिति उनके माता-पिता से बेहतर है। आज के अमरीका में महंगाई उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपति जो बाइडेन के काल से 3.3 प्रतिशत अधिक होने से उनके कार्यकाल में हाहाकार भी मची है।
शैक्षणिक क्षेत्र : फीस में वृद्धि, विशेष रूप से निजी कॉलेजों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में, आम परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा प्राप्त करना दूभर कर रही है। ट्रम्प प्रशासन ने प्रदर्शनों के विरोध में बदले की कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय और कॉलेजों के छात्रों की सहायता राशि में कटौती कर दी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र : स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘डिग ब्यूटीफुल बिल’ के तहत ओबामाकेयर सबसिडी बंद करने से एक करोड़ अमरीकी स्वास्थ्य बीमा से वंचित हो चुके हैं। ट्रम्प द्वारा लाखों लोगों को रोजगार मुहैया कराने के वादे पूरे नहीं हो सके हैं। 82 हजार फैक्ट्री नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। कम वेतन पर रोजगार मिलने के कारण अमरीकी सुपरपावर का जनाजा निकल रहा है। ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि ने बाकी वस्तुओं की कीमतों में हुई वृद्धि ने जनता की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। ए.आई. के व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में शामिल होने के कारण युवा महसूस करते हैं कि यह उनके भविष्य और रोजगार पर बुरा असर डालेगी।
शोधकत्र्ता रेचल जनफाज के अनुसार, युवा ट्रम्प प्रशासन से बुरी तरह निराश होकर इससे दूर जा रहे हैं। नवम्बर 2026 में मध्यावधि चुनावों में ट्रम्प की नीतियों के कारण रिपब्लिकन को हार का सामना करना पड़ सकता है। यदि कांग्रेस के दोनों सदनों में डैमोक्रेट्स को बहुमत हासिल हो गया, तो निश्चित रूप से ट्रम्प प्रशासन के साथ टकराव इस कदर बढ़ जाएगा कि उनकी मनमर्जी नहीं चलेगी, जिससे देश की विकास गति, व्यापार और जनजीवन पर बुरा प्रभाव पडऩा तय है। यह भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि डैमोक्रेटिक बहुल कांग्रेस उनकी मनमानी और तानाशाहीपूर्ण नीतियों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए विवश हो जाए।(पूर्व राज्य सूचना आयुक्त पंजाब/किंग्स्टन-कनाडा)-दरबारा सिंह काहलों
