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लॉकडाऊन बढ़ाने पर सभी सी.एम. ‘सहमत’

2020-04-13T03:33:04.857

शनिवार को प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रैंस के माध्यम से बैठक हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री और लगभग सभी मुख्यमंत्री इस बात पर सहमत नजर आए कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाऊन को और दो सप्ताह के लिए बढ़ाया जाना चाहिए ताकि नोवल कोरोना वायरस के प्रसार को रोका जा सके। इस वीडियो कांफ्रैंस में मोदी ने ‘जान भी जहान भी’ पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि लॉकडाऊन के दूसरे चरण में महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों की खातिर कुछ ढील दी जा सकती है। उन्होंने इस बात का भी संकेत दिया कि लॉकडाऊन के और दो सप्ताह पर्याप्त नहीं होंगे। एक सरकारी रिलीज के अनुसार आने वाले 3-4 हफ्ते काफी महत्वपूर्ण होंगे। 

हालांकि मोदी ने अभी औपचारिक तौर पर लॉकडाऊन बढ़ाने की घोषणा करनी है। प्रधानमंत्री से बात करने वाले मुख्यमंत्रियों में भूपेश बघेल (छत्तीसगढ़), पिनरई विजयन (केरल) तथा वाई.एस.आर. जगनमोहन रैड्डी (आंध्र प्रदेश) ने मांग की है कि उन्हें इस बात का अधिकार दिया जाए कि वे कृषि और उद्योग इत्यादि आर्थिक गतिविधियों के बारे में निर्णय ले सकें।  तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.सी.आर. ने हैलीकॉप्टर के लिए रुपयों की मांग की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 10 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय राहत पैकेज की मांग रखी। 

सूत्रों का कहना है कि मोदी 14 अप्रैल को वर्तमान लॉकडाऊन की अवधि पूरी होने से पहले राष्ट्र को संबोधित करेंगे और उस समय वह लॉकडाऊन बढ़ाने के साथ-साथ कुछ रियायतों की घोषणा कर सकते हैं। मोदी ने मुख्यमंत्रियों को याद दिलाया कि जब मार्च में उन्होंने लॉकडाऊन की घोषणा की थी तब उन्होंने कहा था, ‘‘जान है तो जहान है’’, अब जोर इस बात पर होगा, ‘‘जान भी जहान भी।’’ सूत्रों का कहना है कि यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्रधानमंत्री कुछ रियायतें दे सकते हैं खासतौर पर अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अधिकतर मुख्यमंत्री लॉकडाऊन को 2 हफ्तों तक बढ़ाए जाने के पक्ष में थे। 

ओडिशा, पंजाब, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल पहले ही लॉकडाऊन को अप्रैल के अंत तक बढ़ा चुके हैं। विज्ञप्ति में मोदी को यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि हालांकि केन्द्र और राज्यों के संयुक्त प्रयास से कोविड-19 के असर में कमी आई है लेकिन अभी लगातार सजग रहने की जरूरत है। यह भी कहा गया है कि वर्तमान में उठाए गए कदमों का असर जानने के लिए आगामी 3-4 हफ्ते महत्वपूर्ण होंगे। मोदी ने मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे केन्द्र की ओर से तैयार किए गए आरोग्य सेतु एप के बारे में लोगों को जागरूक करें। यह एप व्यक्ति के फोन की लोकेशन का इस्तेमाल करते हुए उसके संक्रमित होने की संभावना के बारे में बताता है। प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था के बारे में भय को खारिज करते हुए मुख्यमंत्रियों से कहा कि यह समय आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढऩे का एक अच्छा अवसर है। 

विधान परिषद में एंट्री के लिए बेताब उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र में कोविड-19 के सबसे अधिक मामले होने के कारण यहां की सरकार पर काफी दबाव है लेकिन कोरोना वायरस के अलावा यहां की सरकार एक और चिंता का सामना कर रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे विधानसभा के सदस्य नहीं हैं और यदि वह 27 मई तक विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बने तो उनकी कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। 

उद्धव ठाकरे ने गत 28 नवम्बर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। चुनाव आयोग ने कोरोना वायरस के कारण राज्यसभा और विधानसभा चुनावों को स्थगित कर दिया है। उद्धव ठाकरे ने प्रदेश विधान परिषद (एम.एल.सी.) के माध्यम से सदन में जाने की योजना बनाई थी लेकिन कोरोना के कारण चुनाव स्थगित हो गए हैं और अब वह विधान परिषद के माध्यम से सदन में पहुंचना चाहते हैं जिसके लिए राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी को उन्हें नामित करना होगा ताकि कोई संवैधानिक संकट पैदा न हो।

इसके लिए उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में विधान परिषद की 2 खाली सीटों में से एक के लिए उद्धव ठाकरे के नाम की सिफारिश की गई है। लेकिन अब यह राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी पर निर्भर करता है कि वह कब उद्धव ठाकरे को नामित करते हैं। संविधान के अनुसार राज्यपाल के लिए कैबिनेट की सलाह को मानना जरूरी है।-राहिल नोरा चोपड़ा 
                  


Pardeep

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