अजित पवार के निधन से राकांपा में अनिश्चितता
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 05:28 AM (IST)
अजित पवार के अचानक निधन से महाराष्ट्र में एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भविष्य पूरी तरह से अनिश्चित हो गया है। इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि उनका जनसमर्थन और संगठनात्मक नियंत्रण किसे मिलेगा। ऐसे में राकांपा बिखराव, पुनर्गठन और सुलह के चौराहे पर खड़ी है। अजित पवार के बाद पार्टी में कोई दूसरा बड़ा नेता नहीं है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय हैं। हालांकि, उनके पास प्रशासनिक अनुभव की कमी है। इस बीच, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और राज्य राकांपा अध्यक्ष सुनील तटकरे नेतृत्व संभालने के संभावित दावेदार हैं। हालांकि, उनके पास अजित पवार जैसा राज्यव्यापी जमीनी जुड़ाव नहीं है।
उनके बेटे-पार्थ पवार और जय पवार उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। पार्थ ने मावल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। दोनों बेटों की अपनी कंपनियां हैं, वे व्यवसाय और सामाजिक उद्यम चलाते हैं। अब, अजित पवार के बाद कौन केंद्र में आएगा और पवार के गढ़ को बरकरार रखेगा? राकांपा (ए.पी.) कैसे आगे बढ़ेगी या राकांपा (एस.पी.) में विलय होगी? इन सवालों के जवाब महाराष्ट्र की राजनीति की गतिशीलता को पहले की तरह बदल सकते हैं।
थरूर की खरगे, राहुल से मुलाकात : पार्टी नेतृत्व के साथ बेचैनी की खबरों के बीच, तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ एक लंबी बैठक की, जिससे संबंधों में संभावित सुधार का संकेत मिला। दोनों पक्षों ने एकता और समन्वय पर जोर दिया क्योंकि पार्टी महत्वपूर्ण केरल विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है। एक्स पर एक पोस्ट में, थरूर ने कहा, ‘‘आज कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी को विभिन्न विषयों पर गर्मजोशी भरी और रचनात्मक चर्चा के लिए धन्यवाद। हम सभी भारत के लोगों की सेवा में आगे बढ़ते हुए एक ही पेज पर हैं।’’
केरल विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पद के चेहरे के मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में, थरूर ने कहा कि यह कभी मुद्दा नहीं था। यह बैठक तब हुई जब थरूर ने विधानसभा चुनावों के लिए रणनीतियों को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में केरल के शीर्ष नेताओं के साथ ए.आई.सी.सी. की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग नहीं लिया था। सूत्रों के अनुसार, मीटिंग के दौरान राहुल गांधी ने थरूर से कहा कि वह बहुत महत्वपूर्ण हैं और पार्टी के लिए जरूरी हैं तथा उन्हें विश्वास दिलाया कि उन्हें भरोसे में लिया जाएगा और केरल में कांग्रेस के सभी अहम फैसलों में उनकी मौजूदगी पर भी विचार किया जाएगा।
प. बंगाल में माकपा व जे.यू.पी. में गठबंधन होगा! : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले, पश्चिम बंगाल माकपा के सचिव मोहम्मद सलीम की जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर से मुलाकात ने माकपा और जनता उन्नयन पार्टी (जे.यू.पी.) के बीच गठबंधन की अटकलों को हवा दी थी। जनता उन्नयन पार्टी एक नया राजनीतिक दल है जिसे पूर्व टी.एम.सी. नेता ने बनाया था, जब सत्तारूढ़ पार्टी ने उन्हें मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने हेतु अभियान चलाने के लिए सस्पैंड कर दिया था। हालांकि, सलीम ने कहा कि वह कबीर से सिर्फ यह जानने के लिए मिले थे कि वह क्या करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, कबीर ने इस मुलाकात को एक शिष्टाचार मुलाकात बताया लेकिन यह माना कि चर्चा में विधानसभा चुनावों के लिए संभावित गठबंधन पर बात हुई। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने माकपा पर हमला बोला और कहा कि माकपा कंगाल हो गई है, और गठबंधन के लिए भीख का कटोरा लेकर घूम रही है। "
द्रमुक-कांग्रेस में सीटों का खेल : कांग्रेस नेता राहुल गांधी और द्रमुक नेता कनिमोझी ने आने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों पर चर्चा करने के लिए 10 जनपथ पर मुलाकात की, लेकिन सीटों के बंटवारे पर कोई समझौता नहीं हो सका। द्रमुक ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह कांग्रेस को कैबिनेट सीट नहीं देगी, हालांकि उसने गठबंधन जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के दौरान, राहुल गांधी ने कनिमोझी के जरिए द्रमुक नेतृत्व को साफ तौर पर बताया कि उनकी पार्टी ऐसी कोई रणनीति नहीं अपनाएगी, जिससे गठबंधन में तनाव पैदा हो, जिसमें सत्ता-सांझेदारी की बातचीत भी शामिल है।
यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने चुनाव से पहले किसी वैकल्पिक गठबंधन को चुनने या विजय की तमिलगा वेट्री कषगम (टी.वी.के.) के साथ गठबंधन करने के किसी भी विकल्प को खारिज कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने 42 सीटों की मांग की थी, लेकिन द्रमुक ने अपने ऑफर को 25 से बढ़ाकर सिर्फ 30-32 सीटों तक करने पर सहमति जताई। हालांकि कनिमोझी और राहुल गांधी ने गठबंधन में तनाव को खत्म कर दिया है लेकिन सभी की नजरें इस बात पर हैं कि अभी शुरू होने वाला सीटों का खेल द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को आगे कैसे प्रभावित करेगा।-राहिल नोरा चोपड़ा
