चुनौतियों का जवाब देने वाला बजट

punjabkesari.in Friday, Feb 06, 2026 - 03:53 AM (IST)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट भारत के सभी समूहों की आकांक्षाओं, आंतरिक और बाह्य चुनौतियों व आवश्यकताओं, राजनीतिक मांग एवं नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा देश के घोषित आर्थिक विकास लक्ष्यों की कसौटी पर खरा है या नहीं? पिछले कुछ समय से उत्पन्न वैश्विक उथल-पुथल में भारत को अपनी विकास गति बनाए रखने के साथ नई वैश्विक सांझेदारी, निर्यात बाजार आदि विकसित करने तथा घरेलू उत्पादकों को नीतियों और प्रोत्साहन से समर्थन देने की चुनौती है। बजट में कोई लोक लुभावन घोषणा नहीं, पूरा फोकस इस बात पर कि इस उथल-पुथल और अनिश्चितताओं के दौर में देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित, मजबूत और स्थिर होने के साथ विस्तारित भी हो, विश्व व्यापार के अनुरूप पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हो, किशोर और युवा वर्ग को भारत राष्ट्र के लक्ष्य और रोजगार दिलाने के अनुरूप शिक्षा, रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। 

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में 3 कत्र्तव्य के नाम पर लक्ष्य और बजट की सैद्धांतिक आधारभूमि स्पष्ट कर दी। पहला, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने तथा वैश्विक उथल-पुथल के परिदृश्य में लचीलापन लाकर आॢथक विकास को तेज करना और उसकी गति बनाए रखना। दूसरा, भारत की समृद्धि के पथ में सशक्त सांझेदार बनाने के लिए लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और उनकी क्षमता बढ़ाना तथा तीसरा, सरकार की सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुकूल, यह सुनिश्चित करना कि सार्थक भागीदारी के लिए प्रत्येक परिवार, समुदाय और क्षेत्र को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच उपलब्ध हो। 

वित्त मंत्री ने आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए निम्र क्षेत्रों में पहल शुरू करने का प्रस्ताव रखा। एक, रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण को तेज करना। दो, विरासत के औद्योगिक क्षेत्रों का कायाकल्प करना। तीन, चैंपियन एम.एस.एम.ई. का निर्माण करना। चार, आधारभूत संरचना को सशक्त प्रोत्साहन प्रदान करना। पांच, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करना तथा छ:, शहरों में आर्थिक क्षेत्र विकसित करना। तमाम उथल-पुथल के बीच नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा घोषित लक्ष्यों के अनुरूप राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसीलिए इस वर्ष के लिए 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य है। पूंजीगत खर्च, जो आधारभूत संरचना पर खर्च होता है, के लिए 12 लाख 20 करोड़ का आबंटन सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। यह कुल बजट का लगभग 23 प्रतिशत है। 

विनिर्माण, सेवा और कृषि हमारी अर्थव्यवस्था और विकास के मूलाधार हैं। कुशल और दक्ष युवा वर्ग तैयार करना भारत का बड़ा लक्ष्य है, क्योंकि जब हम अन्य देशों से मोबिलिटी समझौता करते हैं तो काम करने वालों के क्षेत्र का भौगोलिक विस्तार हो जाता है। 2047 तक भारत का सेवा क्षेत्र में वैश्विक हिस्सा 10 प्रतिशत तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निश्चित है।  वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केन्द्र के रूप में भारत को विकसित करने के लिए कुल 10,000 करोड़ रुपए से बायोफॉर्मा शक्ति की शुरुआत हो रही है जो बायोलॉजिक और बायोसिमिलरों के घरेलू उत्पादन के लिए अगले पांच वर्षों में ईको-सिस्टम का निर्माण करेगी। सैमीकंडक्टर और ए.आई. क्षेत्र में देर से आने के बावजूद अग्रणी देश बनने की दृष्टि से महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं। 

विश्व में प्रतिस्पर्धा के अनुरूप टिकाऊ वस्त्र और परिधानों को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से वस्त्र कौशल ईको-सिस्टम के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए समर्थ 2.0 कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानव निर्मित फाइबर और नए युग के फाइबरों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना है तो मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन, परीक्षण एवं प्रमाणन केन्द्रों के लिए पूंजीगत सहायता के साथ पारम्परिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना। 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को 10,000 करोड़ की विकास निधि का प्रस्ताव है, ताकि भविष्य के चैम्पियनों का निर्माण किया जा सके और निर्धारित विशेषताओं के आधार पर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सके। पर्यावरण रूप से टिकाऊ आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए पूर्वी भारत में डानकूनी से पश्चिमी भारत के सूरत को जोडऩे के लिए नए समॢपत माल गलियारे, 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एन.डब्ल्यू.) का संचालन, जलमार्गों और तटीय पोत परिवहन की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 12 प्रतिशत करने के लिए तटीय कार्गोनन, सात उच्च-गति रेल कॉरीडोर विकसित करना, सी-प्लेन के स्वदेशी निर्माण के लिए प्रोत्साहन के लिए योजना आदि प्रमुख हैं। इनके साकार होने के बाद कल्पना करिए कि भारत विश्व स्तरीय यातायात में कहां खड़ा होगा। कुल मिलाकर 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य पाने और उसके आगे सतत छलांग लगाते रहने के लिए वर्तमान एवं दूरगामी भविष्य की संभावित आवश्यकताओं और चुनौतियों की दृष्टि से बजट समग्र दृष्टिकोण और योजनाएं प्रस्तुत करता है।-अवधेश कुमार 
 


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