वस्त्र उद्योग के लिए 25,000 करोड़ रुपए का कौशल विकास प्रोत्साहन
punjabkesari.in Saturday, Nov 07, 2026 - 05:49 AM (IST)
सरकार अगले 5 वर्षों में श्रम-गहन कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए 25,000 करोड़ रुपए के कौशल विकास प्रोत्साहन पर विचार कर रही है, क्योंकि इसका उद्देश्य उद्योग के लिए तैयार श्रमिकों का एक बड़ा कार्यबल तैयार करना और वैश्विक व्यापार व भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की विनिर्माण एवं निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को तेज करना है। समर्थ 2.0 के लिए प्रस्तावित परिव्यय, कपड़ा श्रमिकों के लिए मार्च 2026 को समाप्त हुए 5 वर्षों में मौजूदा समर्थ 1.0 योजना के तहत खर्च किए गए 740 करोड़ रुपयों से भारी वृद्धि को दर्शाएगा। इस वित्तीय वर्ष का आबंटन 300 करोड़ रुपए है। कृषि के बाद कपड़ा और परिधान क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा नियोक्ता है, जो 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है और 10 करोड़ से अधिक आजीविकाओं का समर्थन करता है, जिनमें अधिकांश महिलाएं और ग्रामीण श्रमिक हैं।
वित्त वर्ष 2027 के बजट में घोषित समर्थ 2.0 का उद्देश्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से मौजूदा कौशल ढांचे का आधुनिकीकरण करना है, जिसमें श्रमिकों को बदलती प्रौद्योगिकी और उद्योग की जरूरतों के लिए तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफ.टी.ए.) का बेहतर लाभ उठाकर भारत की योजना 2030 तक अपने कपड़ा और परिधान निर्यात को दोगुने से अधिक 100 बिलियन डॉलर करने की है, जिसके लिए एक बड़े और प्रशिक्षित कार्यबल की जरूरत है।
कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि भारत के 15 एफ.टी.ए. भागीदार देश 198 बिलियन डॉलर का कपड़ा बाजार पेश करते हैं, जबकि इन गंतव्यों के लिए देश का वर्तमान निर्यात केवल 11.5 बिलियन डॉलर है, जो विकास के लिए बड़ी गुंजाइश को दर्शाता है। इस व्यापक कौशल प्रोत्साहन का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। भारत का ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता इस साल प्रभावी हो गया, जबकि यूरोपीय संघ (ई.यू.) के साथ समझौता 2027 की शुरुआत से लागू होगा, ये दोनों वस्त्रों और परिधानों तक शुल्क-मुक्त पहुंच का वादा करते हैं और मिलकर अमरीका के बाद भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार हैं।
यह कौशल प्रोत्साहन अन्य उपायों का भी पूरक है, जिनमें मैगा टैक्सटाइल पार्क, मशीनरी के लिए पूंजीगत सहायता और पारंपरिक क्लस्टरों में प्रौद्योगिकी उन्नयन शामिल हैं। इसका उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही उत्पादकता कमियों को दूर करना और बंगलादेश तथा वियतनाम जैसे प्रतिस्पॢधयों के मुकाबले भारत को अपनी निर्यात बढ़त फिर से हासिल करने में मदद करना है।
2017 में शुरू की गई ‘समर्थ 1.0’ योजना में कपड़ा और परिधान क्षेत्र में प्रवेश-स्तरीय प्रशिक्षण के साथ-साथ मौजूदा श्रमिकों के कौशल उन्नयन और पुनर्कौशल को शामिल किया गया था, जिसमें संगठित कताई और बुनाई खंड शामिल नहीं था। इसे कपड़ा उद्योग निकायों, राज्य सरकार की एजैंसियों और मंत्रालय के अधीन संस्थानों के माध्यम से लागू किया जाता है। समर्थ डैशबोर्ड के अनुसार, 16 अक्तूबर तक 4,614 प्रशिक्षण केंद्रों और 323 कार्यान्वयन भागीदारों के माध्यम से प्रवेश स्तर के कार्यक्रमों के तहत 7,38,182 श्रमिकों को प्रशिक्षित किया गया था।-बनिकिंकर पट्टनायक और धीरेंद्र कुमार
