SJVN ने गंगा की तर्ज पर की सतलुज नदी की आराधना

रामपुर बुशहर (विशेषर नेगी):तिब्बत के मान सरोवर से निकल कर हिमाचल के किन्नौर जिला होते हुए बहने वाली सतलुज नदी के महत्व व वैभव को समझाने के लिए अनूठी पहल शुरू की गई। देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना निर्माता सार्वजनिक उपक्रम एस.जे.वी.एन. ने किन्नौर के नाथपा बांध स्थल पर गंगा की तर्ज पर सतलुज नदी की आराधना की। एस.जे.वी.एन. ने इसी नदी में देश की सबसे बड़ी 1500 मैगावाट की भूमिगत जल विद्युत परियोजना बनाई है। परियोजना निर्माताओं ने सतलुज नदी के वैभव को समझने व पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए इस तरह के आयोजन की पहल की है । इस दौरान काशी से आए प्रकांड पंडितों ने विधिवत सतलुज नदी आराधना की। इससे पहले परियोजना क्षेत्र से आए लोगो नें पारम्परिक वेशभूषा में वाद्य यंत्रों की धुनों में खूब नाच-गान किया।  इस आयोजन में एस.जे.वी.एन. के सी.एम.डी. समेत तमाम उच्च अधिकारी मौजूद थे।

पूजा व दीप दान से किया सतलुज महिमा का शुभारम्भ

सतलुज महिमा का शुभारम्भ एस.जे.वी.एन. के प्रबंध निदेशक नंद लाल ने विधि-विधान  से पूजा व दीप दान से किया। उसके बाद सतलुज नदी पर बने बांध के किनारे गंगा सेवा निधि बनारस से आए आचार्यों ने तांडव आरती भी की। सतलुज नदी को शत्रुद नदी भी कहा जाता है। 100 छोटी नदियों को जोड़ते हुए बहने वाली शत्रुद नदी की गाथा भी सुनाई गई। सतलुज नदी के उद्गम स्थल तिब्बत के मान सरोवर से लेकर सतलुज जहां-जहां होते बहती है, उसकी गाथा का वर्णन किया।

सतलुज को जीवनदायनी मानते हैं अधिकारी

इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि उनके निगम की सम्पन्नता, वैभव और यश इसी नदी के कारण हुई है। उनका परम कर्तव्य बनता है कि नदी के महत्व को समझने के साथ पर्यावरण संरक्षण में जनमानस को जागरूक करें। इसके साथ-साथ इस दिशा में निगम सक्रिय भागीदारी निभाए। उन्होंने बताया कि वे सतलुज को जीवनदायनी मानते हैं, ऐसे में जब हम प्रकृति से बहुत कुछ लेते हैं तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि अपनी कृतज्ञता उसके प्रति समर्पित करें। इसलिए सतलुज को स्वछ और निर्मल रखने की पहल के साथ इस तरह का आयोजन हुआ है।

वेदों में भी है सतलुज नदी का वर्णन

एस.जे.वी.एन. के प्रबंध निदेशक नंद लाल ने बताया कि सतलुज हमारी कम्पनी की ही नहीं बल्कि घाटी के लोगों की भी जीवनदायिनी है। सतलुज नदी का आभार व्यक्त करने के लिए सतलुज की आराधना कर रहे हैं। इस वर्ष का थीम है कि सतलुज को स्वच्छ व निर्मल रखें। इसमें हम आम लोगों में जागरूकता लाते हुए उनकी भागीदारी भी बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि नदी को संरक्षित करने के लिए वन विभाग को केटप्लान के तहत मदद दी जाती है। वहीं गंगा घाट से आए आचार्य ने बताया सतलुज का वर्णन वेदों में भी है। इसलिए इसकी महत्ता भी कम नहीं। हम गंगा की तर्ज पर सतलुज की भी आराधना कर रहे हैं।

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