क्यों शास्त्रों में महिलाओं के खुले बालों को माना गया है अशुभ ?

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बाल खुले रखना तो आज कल एक फैशन बन गया है। कहने का भाव है कि 21 सदीं के इस मार्डन ज़माने में बहुत ही कम लड़कियों ऐसी देखने को मिलेंगी जिन्हें बाल बांधने को शौक हो। पहले ज़माने में तो किसी खास अवसर पर या किसी खास मौके पर ही महिलाएं व लड़कियां खुले बालों में देखने को मिलती थी। लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं। घर हो या ऑफिस महिलाएं खुले बालों में ही नज़र आती है। बल्कि कुछ लड़कियां व महिलाओं को तो रात में खुले बालों में सोने की आदत होती है। अब सोच रहें होंगे कि आपको ये सब बताने के पीछे का हमारा मकसद क्या है। तो आपको बता दें कि खुले बालों के बारे में शास्त्रों में कुछ बातें वर्णित हैं। जिसके ऊपर हमें गौर करने की ज़रूरत है। क्योंकि इसमें किए वर्णन के अनुसार महिलाओं का खुले बालों में रहना अच्छा नहीं माना जाता।


बल्कि हिंदू धर्म के शास्त्रों में मानव के शरीर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दी गई है। तो आइए जानते हैं कि इनमें ऐसा क्या लिखा है जिस के अनुसार महिलाओं का बालों को खुला रखना अशुभ होता है। 

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार महिलाओं को हमेशा बाल बांधकर रखने चाहिए। कहते हैं महिलाओं को बाल खुला रखने का मतलब होता है कि वह किसी का शोक मना रही है। इसी वजह से महिलाओं का बाल बांधकर रखने की सलाह दी जाती है। 

पौराणिक मान्यताओं व कथाओं के अनुसार जब माता सीता का विवाह भगवान राम से हुआ था, तब उनकी माता ने उनके बाल बांधते हुए कहा था कि कभी बालों को खुला मत रखना क्योंकि बंधे हुए बाल हमेशा रिश्तों को बांधकर रखते हैं।


माना जाता है कि महिलाओं को केवल बाल तब ही खुले रखने चाहिए जब वह एकांत में अपने पति के हों, इसके अलावा उन्हें हप समय बाल बांधकर ही रखने चाहिए। शास्त्र के अनुसार, जो महिलाएं खुले बाल रखती हैं तो नकारात्मक ऊर्जा आती हैं और उनके घर में क्लेश उत्पन्न करते हैं।

इसके अलावा जो महिलाएं रात में बाल खोलकर सोती हैं तो उनके ऊपर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव अधिक होता है।

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