Kundli Tv- मृत्यु के समय क्यों परेशान करते है ये ख्याल

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जो जीव इस धरती पर आया है उसे एक न एक दिन इस ये दुनिया छोड़कर जाना ही होगा। लेकिन ये भी एक सत्य है कि मरने के बाद फिर से मानव को इसी धरती पर जन्म भी लेना पड़ता है। चाहे कोई इस बात पर यकीन करे या न करे लेकिन हर इंसान का अस्तित्व मरने के बाद भी रहता है। कहा जाता है हर इंसान की मृत्यु उसके भाव के अनुसार ही होती है। कहने का भाव है कि जिस इंसान के जैसे भाव होते हैं, उसकी मृत्यु भी उसी के मुताबिक होती है। 


कुछ शोधार्थियों ने मृत्यु के करीब पहुंचे सत्तर व्यक्तियों के अनुभवों, तकलीफों और पिछले जीवन का अध्ययन किया। जिसमें ये गया कि अंतकाल में उन्हें वही बातें याद आ रही थी, जिन्हें वे कार्यकारी जीवन के दौरान जेहन में बसाए हुए थे। न केवल बसाए हुए थे, बल्कि वैसे ही काम कर रहे थे।

कुछ व्यक्ति ऐसे भी थे, जो पिछले जीवन में जैसे भी रहे हों, आयु के संध्याकाल में अच्छे काम कर जिंदगी को संवराना चाहते थे। उन्होंने अपने जीवन की दिशाधारा तो बदल ली, लेकिन मृत्यु के समय पिछले कर्मों की यादों का दंश उन्हें परेशान करता रहा था। कहा जाता है कि अंतकाल में वही भाव चित्त में घनीभूत होता है, जो पूरे जीवन भर मन में छाया हुआ था और उसी के अनुसार आगे की यात्रा शुरू होती है।

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