USA से आयातित सेब ने हिमाचल की 4200 करोड़ की Apple Industry को दिया झटका

शिमला (देवेंद्र हेटा): यू.एस.ए. से आयातित सेब ने प्रदेश की 4200 करोड़ की एप्पल इंडस्ट्री को भारी नुक्सान पहुंचाया है। प्रदेश में बीते 12 सालों के दौरान सेब की सबसे कम फसल के बावजूद यहां के बागवानों को अच्छे दाम नहीं मिल पाए। इसका कारण यू.एस.ए. से सेब का काफी मात्रा में आयात करना रहा। साल 2018 में अगस्त माह तक अकेले यू.एस.ए. से 1.45 लाख मिट्रिक टन सेब आयात किया गया। यू.एस.ए. के अलावा भी न्यूजीलैंड, चीली, ईरान और टर्की से 2.76 लाख मिट्रिक टन सेब बीते साल सितम्बर माह तक आयात किया गया। यही वजह रही कि प्रदेश के बागवान अर्से से सेब को विशेष फल का दर्जा देने की मांग कर रहे है। 

बागवानों की मांग पर ही साल 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर आयात शुल्क 50 से 150 फीसदी करने का भरोसा दिया। इसके बाद मोदी कई बार हिमाचल आए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 साल में एक बार भी बागवानों से किए वायदे की याद नहीं आई। बीते साल अप्रैल महीने में भी प्रधानमंत्री ने यू.एस.ए. के सेब आयात पर इम्पोर्ड ड्यूटी बढ़ाने का लॉलीपाप बागवानों को दिया, लेकिन यह बादा भी पूरा नहीं किया गया। प्रदेश के 10 जिला में साड़े 4 लाख से अधिक परिवारों की आर्थिकी सेब पर निर्भर रहती है। सेब को ही यहां की मजबूत आर्थिकी का आधार माना जाता है, लेकिन बीते एक दशक के दौरान जिस तरह से दुनिया के 44 मुल्कों से सेब को आयात किया जा रहा है।

उससे हिमाचल का सेब बाजार खतरे में पड़ गया है। इसका अहम कारण हिमाचल का तकनीक में पिछड़ा हुआ होना है। हिमाचल में अभी सात मिट्रिक टन सेब प्रति हैक्टेयर की पैदावार हो रही है, जबकि न्यूजीलैंड, चीन, अमेरिका समेत कई विकसित देश प्रति हैक्टेयर 55 से 70 मिट्रिक टन सेब की पैदावार कर रहे हैं। हर साल सेब के बढ़ते आयात से प्रदेश का बागवान चिंतित है। उनकी चिंता का कारण तकनीक में पिछड़ा होना है। यही वजह है कि हिमाचल के बागवान अर्से से सेब आयात पर पूर्णत: प्रतिबंध की मांग कर रहे है।

40-55 रुपए किलो हिमाचली सेब तो 66-86 रुपए में आयात क्यों?

हैरानी इस बात की है कि बीते साल हिमाचली सेब देश के बाजारों में 40 से 55 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा था। उन्हीं दिनों केंद्र सरकार विभिन्न व्यापारियों के माध्यम से विदेशों से 66 से 86 रुपए प्रति किलो के हिसाब से सेब आयात कर रही थी।

कब-कब कितना सेब किया गया आयात?

केंद्रीय विदेश मंत्रालय से ली गई आर.टी.आई. की सूचना के अनुसार साल 2000 में भारत विभिन्न देशों से मात्र 6586 मिट्रिक टन सेब आयात कर रहा था। साल 2010 यह बढक़र 1.22 लाख मिट्रिक टन हो गया। साल 2011 में 1.55 लाख मिट्रिक टन, 2012 में 1.86 लाख मिट्रिक टन, 2013 में 1.91 लाख मिट्रिक टन, 2014 में 2.04 लाख मिट्रिक टन, 2015 में 2.60 लाख मिट्रिक टन, 2016 में 3.01 लाख मिट्रिक टन और 2017 में यह बढक़र 3.20 मिट्रिक टन हो गया।

पी.एम.ओ. को पत्र लिखकर रोक की उठाई मांग

हिमाचल का सेब मई महीने में बाजार में आता है और नवम्बर तक सीजन जारी रहता है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) को पत्र लिखकर मांग की है कि अप्रैल से नवम्बर माह तक सेब के आयात पर रोक लगाई जाए। यदि केंद्र सरकार ऐसा करती है इससे हिमाचल समेत जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस बार भी यू.एस.ए. के सेब ने बागवानों की कमर तोड़कर रख दी है।

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