सैमसंग भारत में गैलेक्सी S9 और नोट 9 बनाना कर सकती है बंद

कोलकाताः सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने सरकार से कहा है कि अगर डिस्प्ले और टच पैनल जैसे कंपोनेंट्स के लिए मेक इन इंडिया योजना को टाला नहीं जाता तो उसे देश में मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग घटाने के साथ ही स्मार्टफोन का एक्सपोर्ट भी कम करना होगा। कंपनी ने कहा है कि उसे अपने गैलेक्सी S9 और नोट 9 जैसे मॉडल्स का भारत में प्रॉडक्शन बंद करना पड़ जाएगा। 

सरकार ने हाल में एक ऑर्डर जारी कर फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लान (PMP) की समय-सीमा दो महीने पहले कर दी थी। डिस्प्ले और टच पैनल जैसे कंपोनेंट्स की लोकल मैन्युफैक्चरिंग वित्त वर्ष 2020 में शुरू करने के बजाय सरकार अब चाहती है कि कंपनियां इसे फरवरी 2019 में शुरू करें या 10 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी चुकाएं, जो सरचार्ज के साथ बढ़कर 11 फीसदी तक पहुंच जाएगी। मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले ये पार्ट्स भारत में नहीं बनाए जाते। एक मोबाइल फोन की प्रॉडक्शन कॉस्ट में डिस्प्ले पैनल की हिस्सेदारी 25-30 फीसदी की होती है। 

PMP की शुरुआत वित्त वर्ष 2017 में हुई थी। इसका उद्देश्य मोबाइल हैंडसेट और उनके कंपोनेंट्स की देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इंडस्ट्री चाहती है कि इन कंपोनेंट्स के लिए PMP की समय-सीमा को अगले वित्त वर्ष तक कर दिया जाए, क्योंकि इनका देश में अभी तक प्रॉडक्शन शुरू नहीं हुआ है। 

सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर से सरकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है, ‘अगर डिस्प्ले पैनल पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है, तो मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी और हमें भारत में नोट 9 और S9 जैसे फ्लैगशिप प्रॉडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग बंद करनी होगी।’ सैमसंग मोबाइल फोन के लिए 10 करोड़ डॉलर की लागत से एक डिस्प्ले असेंबली प्लांट लगा रही है, जो अप्रैल 2020 तक शुरू हो जाएगा। इस यूनिट में एमोल्ड स्क्रीन भी बनेंगी। 

दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन मेकर सैमसंग ने यह भी कहा है कि उसे भारत से मोबाइल फोन का एक्सपोर्ट बढ़ाने की अपनी योजना भी रद्द करनी होगी। उसने सरकार को बताया है कि कंपोनेंट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी लगने से भारत में बने हैंडसेट वियतनाम जैसे मैन्युफैक्चरिंग की कम कॉस्ट वाले देशों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेंगे।  

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