आरटीई कानून को आठवीं कक्षा से आगे लागू करने पर नई सरकार के गठन के बाद होगा विचार

नई दिल्ली : केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून को स्कूलों में आठवीं कक्षा से आगे लागू करना एक बड़ा नीतिगत मुद्दा'' है जिस पर आम चुनाव के बाद नयी सरकार का गठन होने के बाद ही फैसला लिया जा सकता है। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और वंचित समूहों को गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में 12वीं कक्षा तक नि:शुल्क शिक्षा देने की मांग वाली एक जनहित याचिका के जवाब में दायर हलफनामे में यह बात कही। 

मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय के एक अधिकारी द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि इस संबंध में एक प्रस्ताव केंद्र सरकार के सैद्धांतिक फैसले के लिए सौंप दिया गया है। शिक्षा का अधिकार कानून की धारा तीन के अनुसार छह से 14 साल की उम्र के हर बच्चे को प्राथमिक शिक्षा (आठवीं कक्षा) पूरी होने तक पड़ोस के स्कूल में नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार है।


मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति ए जे भंभानी की पीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया। हलफनामे में कहा गया है,जैसा कि जिक्र किया गया है और इस तथ्य पर विचार करते हुए कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में है, तो आरटीई कानून को प्राथमिक स्तर के आगे भी लागू करना एक बड़ा नीतिगत मुद्दा है जिस पर आम चुनावों के बाद नयी सरकार का गठन होने के बाद ही फैसला हो सकता हैं। हालांकि, इस संबंध में प्रस्ताव केंद्र सरकार के सैद्धांतिक निर्णय के लिए सौंप दिया गया है।'

अदालत ने इससे पहले एनजीओ सोशल जूरिस्ट की याचिका पर एचआरडी मंत्रालय और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था। याचिका में दावा किया गया कि ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणियों में गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों से आठवीं कक्षा पूरी करने के बाद फीस देने या स्कूल छोड़ने के लिए कहा जा रहा है।'' एनजीओ ने वकील अशोक अग्रवाल के जरिए दायर याचिका में आरटीई कानून, 2009 में संशोधन की मांग की गई है ताकि गरीब और वंचित बच्चों को गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में 12वीं कक्षा तक नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाए। 

 

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