डिस्कॉम कंपनियों पर बढ़ रहे बकाया से प्रभावित हो सकती है बिजली आपूर्ति

नई दिल्लीः बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर बिजली उत्पादकों का बकाया बढ़ रहा है। एसोसिएशन आफ पावर प्रोड्यूसर्स (एपीपी) का कहना है कि बढ़ते बकाए की वजह से बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे पहले इसी महीने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी ने बकाया लंबित होने की वजह से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर को नोटिस जारी किया था।  

एपीपी ने सरकार को इस बारे में ज्ञापन दिया और बिजली मंत्री आर के सिंह से मामले के निपटान में हस्तक्षेप की मांग की है। एपीपी 27 प्रमुख स्वतंत्र बिजली उत्पादकों का संगठन है। इसमें अडाणी पावर, जीएमआर, जिंदल पावर, जेएसडब्ल्यू एनर्जी और सेम्बकॉर्प एनर्जी इंडिया शामिल हैं। एपीपी के महानिदेशक अशोक खुराना ने बिजली मंत्री को भेजे पत्र में कहा है, ‘‘यदि इन राज्यों को बकाया के भुगतान के लिए कहा जाता है तो हम आपके आभारी रहेंगे। बकाया राशि और बढऩे पर बिजली उत्पादकों को कोयले के लिए भुगतान करना कठिन होगा। इससे बिजली आपूर्ति पर बुरा असर पड़ेगा।’’ 

पत्र में कहा गया है कि नवंबर, 2018 तक कुल बकाया 25,000 करोड़ रुपए से अधिक था। इसमें निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादकों का हिस्सा 14,600 करोड़ रुपए है। इन आंकड़ों में कानून में बदलाव की वजह से भुगतान लायक राशि नहीं है जो कि 18,000 करोड़ रुपए तक है। बिजली का बकाया नहीं चुकाने वाले प्रमुख राज्यों में उत्तर प्रदेश (4,119 करोड़ रुपए), महाराष्ट्र (3,457 करोड़ रुपए), कर्नाटक (3,049 करोड़ रुपए), तमिलनाडु (2,282 करोड़ रुपए) और आंध्र प्रदेश (2,084 करोड़ रुपए) शामिल हैं। ताप विद्युत कंपनियों के बकाया आंकड़े बताने वाले ‘प्राप्ति’ पोर्टल के मुताबिक नवंबर 2018 तक देशभर में वितरण कंपनियों पर बिजली कंपनियों का कुल 40,995 करोड़ रुपए बकाया था। सबसे ज्यादा बकाया अदाणी पावर का 7,321 करोड़ रुपए, ललितपुर पॉवर जनरेशन कंपनी लिमिटेड का 2,246 करोड़ रुपए, जीएमआर का 1,788 करोड़ रुपए, सेम्बकार्प एनर्जी इंडिया का 1,521 करोड़ रुपए और सीएलपी इंडिया का 1,225 करोड़ रुपए वितरण कंपनियों पर बकाया है।

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