रेहाम खान का खुलासा, कैसे इमरान ने शादी के लिए किया प्रपोज?

इंटरनेशनल डेस्कःपाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की दूसरी पत्नी रेहाम खान पर एक अंग्रेज नाटककार विलियम कंग्रीव की वो पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जिन्हें कंग्रीव ने कुछ इस तरह लिखा “हेवेन हैज नो रेज लाइक लव टू हैटरेड टर्न्ड, नॉर हेल फ्यूरी लाइक अ वुमन स्कॉर्न्ड” यानि कि एक अपमानित औरत का गुस्सा जहन्नुम की सभी परेशानियों से भी ज्यादा खतरनाक होता है। रेहाम खान की हाल ही में प्रकाशित हुई आत्मकथा ‘रेहाम खान’ ने भारत समेत पाकिस्तान, ब्रिटेन और कई अन्य जगहों पर तहलका मचा दिया है। रेहाम ने अपनी आत्मकथा में अपने साथ घटी घटनाओं को विस्तृत करके लिखा है।



पिता का व्यवहार शुरू में अजीब लगा 
रेहाम ने कहानी की शुरूआत अपने जन्म से की है। उन्होंने लिखा है कि कहानी लीबिया से शुरू होती है, जहां 1973 में उनका जन्म एक पाकिस्तानी ईएनटी सर्जन नय्यर रमजान के घर हुआ था। अपने पिता के साथ बिताए पल को याद करते हुए रेहाम लिखतीं हैं, कि उनके पिता, मां को हमेशा ‘डार्लिंग’ कहकर पुकारते थे। वो बताती हैं कि हम छोटे थे, तो इन सब बातों से अंजान थे, हम अभिभावकों को समझते नहीं कि वो बी इंसान हो सकते हैं या कह सकते हैं कि रोमांटिक भी हो सकते हैं। बहुत दिनों तक हमें समझ नहीं आया कि वो कह क्या रहे हैं। हमारे लिए पापा का मां को ‘डार्लिंग’ कहकर पुकारना, घर में घुसते ही सबसे पहले उनको चुंबन करना हमारे लिए थोड़ा ‘शॉकिंग’ था। क्योंकि पाकिस्तान की संस्कृति के लिए यह अजीब बात थी, जहां सार्वजनिक रूप से भावनाओं को इजहार करना अच्छा नहीं समझा जाता।

रेहाम ने यह पाकिस्तान में नोट किया है, शायद भारत में भी ऐसा होता हो कि लोग दूसरों की बीवियों से तो खिलखिलाकर बात करते हैं, लेकिन अपनी बीवी को ज्यादा तवज्जो नहीं देते। कॉलेज के दिनों में रेहाम खान काफी मुखर थीं, वो अपने साथ की लड़कियों को उन विषयों के बारे में बताती थीं, जिनके बारे में घर पर नहीं बताया था। उनकी बातों का लड़कियों के समूह में इस कदर हुआ कि ग्रुप ने उनका नाम ‘मोर’ रख दिया, जिसका अर्थ होता है मां। रेहाम उन दिनों को याद करते हुए लिखती हैं, उन दिनों उन्हें एक मां की तरह समझदार समझा जाता था। परिवार में भी और दोस्तों में भी। उन्होंने अपनी आत्मकथा में उस बात का जिक्र भी किया है,जब वो लड़कियों के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक समस्याओं पर भाषण देती थीं और वो भी बिना मुस्कराए।



लड़कियों की शादी तो करा दी जाती है बताया कुछ नहीं जाता
रेहाम स्कूल के दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि जब वो कक्षा 9 में अपनी सहेलियों के अनुरोध पर मैं एक कॉन्डोम लेकर लेकर अपने स्कूल पहुंच गईं थी। रेहाम बताती हैं कि उनके पिता अफगान शरणार्थियों के लिए मुफ्त मेडिकल कैंप लगाया करते थे और उनकी अलमारी में कॉन्डोमके बड़े-बड़े कार्टून रखे होते थे। वो बचपन को याद करते हुए लिखती हैं कि हम उन्हें गुब्बारों की तरह फुलाया करते थे। हमें उन्हें इसका ज्ञान नहीं था कि उनका असली इस्तेमाल क्या है। उन्होंने लिखा, हमारे समाज में लड़कियों की 17-18 साल की उम्र मे शादी तो कर दी जाती है। लेकिन उन्हें ये नहीं बताया जाता कि उनके साथ अब क्या होना है। उन्हें शारीरिक संबंध, गर्भनिरोधक या रिश्तों के बारे में कभी बताया ही नहीं जाता।

अपनी आत्मकथा में रेहाम उस बात का जिक्र भी करती हैं, वो लोगों की नकल बहुत अच्छी कर लेती थी। पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. बेनजीर भुट्टो का भाषण जब वो हूबहू वैसा ही सुनाती थीं, तो लड़कियों का हुजूम लग जाता था। मेरी बेटियों ने यह बात किताब में पढ़ी तो उन्होंने इस बात का मजाक उड़ाया और कहा हाय अल्लाह, आपने इन बातों का भी किताब में जिक्र किया है।



कंट्रोल सिचुएशन से होती हैं घरेलू हिंसा
रेहाम अपनी शादी के बारे में जिक्र करते हुए लिखती हैं कि उनसे उम्र में 16 साल बड़े उनकी बुआ के बेटे एजाज रहमान ने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे माता-पिता ने स्वीकार कर लिया। वो अपने शादी का अनुभव बताती हैं कि पहले दिन से यह शादी नहीं चली और अक्सर घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ा। ऐसा नहीं ता कि उनके पति उन्हें एक आदर्श और निपुण पत्नी बनाना चाहते थे। उनकी मंशा ऐसी थी कि रहमान हमेशा उन्हें काबू में रखना चाहते थे। वो कहती हैं, सिर्फ घरेलू हिंसा ये नहीं होती कि आप पर कोई हाथ उठाए या आपके ऊपर कोई चीज उठाकर मार दे। उनका मत है कि घरेलू हिंसा शुरू होती है। एक ‘कंट्रोल सिचुएशन’ से। घरेलू हिंसा करने वाला ये समझ लेता है कि वो कहां तक जा सकता है। रेहाम कहती हैं, कम उम्र की लड़कियों के साथ घरेलू हिंसा ज्यादा होती है। वो अपनी शादी के पहले दिन या कहें पहले घंटे से ही समझ गई थी कि कुछ सही नहीं हो रहा।

उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा में पति का वित्तीय कंट्रोल बढ़ता चला जाता है, हर चीज पे कंट्रोल शुरू हो जाता है, फिर गाली-गलौज और मारपीट शुरू होती है। आपको ये अहसास कराया जाता है, सारी गलती आपकी है और सामने वाला आपको नाकारा बेकार और बदसूरत कहने लगता है, जिसकी वजह से आपका सारा आत्मविश्वास खत्म हो जाती है। रेहाम बताती हैं कि अपने पहले साढ़े बारह साल तक रहते हुए, उन्हें ये लगा ही नहीं कि वो घर में रह रही हैं। उनका मतलब साफ सुथरे बिस्तर और चमकते हुए फर्श नहीं होते हैं। अगर घर में बेशाख्ता लगने ठहाके और उन लोगों की बाहें नहीं है। जिन्हें आप प्यार करते हैं, तो उस घर का कोई मतलब नहीं। अपने 13 साल के कड़वे वैवाहिक जीवन और तीन बच्चे पैदा होने के बाद रेहाम ने अपने पहले पति एजाज रहमान से तलाक ले लिया। उनके शुरूआती दिन मुश्किल भरे थे। लेकिन मानसिक रूप से उन्हें शांति थी।



तलाक के बाद शुरू में आई मुश्किल
पति से अलग होने के बाद उन्होंने ‘लीगल टीवी’ से अपने नए सफर की शुरूआत की। उन्होंने बीबीसी टीवी के लिए भी काम किया है। रेहाम बतातीं हैं, जब तलाक की अर्जी लगाई तो वो खुद सारी अदालती कार्रवाई देख रहीं थीं और अपने बच्चों को पति से बचाने की भी जद्दोजहद कर रहीं थी। उन्होंने बताया कि उस मुश्किल दौर में उनके पास सिर्फ 300 पाकिस्तानी रुपये थे, जो जॉइंट एकाउंट था, वो भी रहमान ने ब्लॉक करा दिया। उस समय मेरे लिए ज्यादा मुश्किल था, आगे कदम बढ़ाना। उन्होंने बताया कि लोग क्या कहेंगे, इस बारे में बहुत चिंता थी। लेकिन उन्होंने कदम उठा लिया तो जिंदगी आसान हो गई। थोड़ी मेहनत करनी पड़ी, परेशानियों से गुजरना पड़ा। लेकिन अंत में घर का माहौल एकदम बदल गया। बच्चों की मुस्कराहटें वापस औट आईं और उनकी आवाज कानों में सुनाई देने लगी।

रेहाम ने अचानक बीबीसी की नौकरी छोड़ दी और वो पाकिस्तान आ गईं। जहां वो एक चैनल में हाई प्रोफाइल टीवी एंकर बन गईं। इस दौरान उन्हें पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान का दो बार इंटरव्यू करने का मौका मिला। वो आगे बताती हैं कि इसके कुछ दिनों बाद इमरान ने उन्हें मैसेज भेजा कि वो उनले मिलना चाहते हैं। कुछ दिन बाद रेहाम इमरान से मिलने गई। उस याद को ताजा करते हुए उन्होंने लिखा कि मैं बरामदे में खड़ी थी। इमरान लॉन में अपने कुत्ते को टहला रहे थे। उन्होंने मुझे अपनी तरफ बुलाया। उन्होंने कहा कि उस समय थोड़ा नर्वस थी, क्योंकि उन्होंने हाई हील के जूते पहने हुए थे और बीबीसी ने सिखाया था कि जहां भी जाओ अपने साथ बिना हील की फ्लैट चप्पल जरूर लेकर जाओ। वो कहती हैं, अपने जूते वहीं उतारे और चप्पल पहनकर इमरान की ओर गईं। जब वो बगीचे की ओर बढ़ी तो देखा कि इमरान जूते उठाकर मेज के बीचों-बीच रख दिए, ताकि उनका कुत्ता उन्हें नुकसान न पहुंचाए।



जब इमरान ने रखा शादी का प्रस्ताव
उन्होंने बताया कि उस दौरान एक दिलचस्प घटना घटी, रेहाम वहीं बैठी हुईं थी, कि अचानक मच्छर उन्हें परेशान करने लगे। उन्हें लगा कि शायद मेरा खून ज्यादा मीठा है। जब वो बाथरूम गए तो सैकड़ों मच्छर रेहाम के पैरों के आस-पास मंडराने लगे। अचानक उन्होंने देखा कि इमरान ने अपने बड़े हाथों से पैरों को कवर किया और वो घबराकर खड़ी हो गईं। रेहान ने कहा कि ये उनकी आम छवि से बिल्कुल अलग केयरिंग और रोमांटिक रूप था। अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मैं सोच भी नहीं सकती, जो शख्स इतनी अकड़ में रहता है, मेरे इस तरह पांव पकड़ लेगा और उसी मुलाकात में उन्होंने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रखा। कहा कि वो मुझसे शादी करना चाहते हैं, तो मैंने उनसे कहा कि क्या आपको पता है मेरी उम्र 42 साल है। इस पर इमरान मुस्कराए और बोले, ये तो अच्छा है, अब कोई मुझे ये तो नहीं कहेगा कि मैंने आपको पालने से खींच लिया। उनके शादी के प्रस्ताव को मैंने स्वीकार कर लिया, कई सालों तक अफेयर चला। बीच में कुछ मतभेद हुए। अंत में 31 अक्तूबर 2014 को हम दोनों ने निकाह कर लिया।

इमरान-रेहाम की शादी के पहले दिन से ही दोनों के बीच दूरियां बढ़नीं शुरू हो गईं। रेहान ने बताया कि कुछ बाहरी लोगों और इमरान की पहली पत्नी जमाइमा गोल्डस्मिथ का असर उन पर अभी तक बरकरार था। इमरान का रहन-सहन और व्यक्तिगत जीवन की कुछ चीजें उन्हें पसंद नहीं आईं और इमरान के कैंप से भी उनके खिलाप लगातार मुहिम शुरू की गईं। रेहाम याद करती हैं और लिखती हैं कि इमरान अपने दिल में मेरे बारे में क्या सोच रहे हैं। करीब-करीब पूरा एक साल, जो दोनों ने साथ गुजारा, वो मेरी तारीफ करते नहीं थकते थे। जब कहीं इंटरव्यू देकर आती थी तो इमरान इतनी तारीफ करते कि खुद वो शर्मिंदा हो जाती थीं। उन्होंने अपनी जीवनी में बताया है, कैसे उनके पीठ पीछे साजिश रची जा रही थी और इमरान उसका हिस्सा थे।



शादी के बाद बदले हालात
रेहाम ने इमरान के राजनीति के बारे में लिखा है, शादी से पहले और शादी के बाद जिस तरह से वो पार्टी चला रहे थे। उस पर उन्हें एतराज था। वो उनसे शिकायत किया करती थीं और कहती थीं कि किस तरह के लोगों को पार्टी में लेकर आए हैं, जिनमें कोई वज़ादारी हैं और न ही इनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि है। वो लिखती हैं, शादी से पहले इमरान कहते थे कि मैं तुम्हारी सलाह पर काम करूंगा। लेकिन शादी के बाद जब यही बात करती थी, तो वो मुझे चुप करा देते थे। उनका कहना है कि इमरान उनसे राजनीति की बात करना पसंद नहीं करते थे। कुछ महीनों बाद तो उन्होंने मुझसे यहां तक कह दिया था कि राजनीति के बारे में अगर तुम्हें कुछ बात करनी हो तो मुझे लिखकर दे दिया करो, क्योंकि शाम का वक्त तो उनका संगीत सुनने का होता था और मुझे ये बात अजीब लगी।

रेहाम के मुताबिक, इमरान के आस-पास रहने वाले लोगं, काले जादू, जादुई तावीजों और इमरान की निजी लाइफ स्टाइल ने उनको दूर कर दिया। उन्होंने आत्मकथा में लिखा है कि मैंने आखिरी वक्त तक इमरान को समझाने की कोशिश करती रही। लेकिन अप्रैल के बाद मुझे ये बात समझ में आ गई थी कि ये स्टेटस की पार्टी है और इमरान इसे कभी ठीक नहीं कर सकते। लंबे समय तक वो समझती रहीं कि इमरान में हिम्मत नहीं है, गलत काम करने वालों को रोकने की। उनके अगल-बगल जो लोग थे। वो सभी भ्रष्टाचार की पृष्ठभूमि से आए थे। सभी लैंड माफिया थे।



बता दें कि रेहाम की ये किताब उस वक्त आई, जब पाकिस्तान में नेशनल असेंबली इलेक्शन चल रहा था और इमरान खान चुनाव लड़ रहे थे। कुछ लोगों ने यह भी माना कि इस किताब के जरिए रेहाम ने इमरान को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। लेकिन मकसद कुछ भी रहा हो, तो वो इसमें सफल नहीं हुईं। अंततः 18 अगस्त 2018 को इमरान खान ने पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

 

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