​विवाद के बीच RBI गर्वनर उर्जित पटेल ने दिया इस्तीफा, 1992 के बाद सबसे छोटा कार्यकाल

नेशनल डेस्क: भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले कुछ समय से केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता को लेकर उनके और सरकार के बीच तनाव पैदा हो गया था। माना जा रहा है इसके चलते ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पटेल (55) ने 5 सितंबर 2016 को रिजर्व बैंक के 24वें गवर्नर के तौर पर पद संभाला था। रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में 1992 के बाद यह सबसे छोटा कार्यकाल रहा। 

पटेल ने दी भविष्य के लिए शुभकामनाएं
पटेल ने इस्तीफा देते हुए जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘व्यक्तिगत कारणों की वजह से मैंने अपने वर्तमान पद से तुरंत प्रभाव से हटने का फैसला किया है। यह मेरा सौभाग्य रहा है कि पिछले कई वर्ष तक मुझे रिजर्व बैंक में विभिन्न पदों पर काम करने का मौका मिला । रिजर्व बैंक के कर्मचारियों, अधिकारियों और प्रबंधन का समर्थन और उनकी मेहनत इस दौरान बैंक के कामकाज को आगे बढ़ाने में सहायक रहा है। मैं इस अवसर पर अपने साथियों और आरबीआई के केन्द्रीय निदेशक मंडल के निदेशकों का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनायें देता हूं।’’ 


जानिए आरबीआई-सरकार के बीच क्या है विवाद?
सरकार की ओर से रिजर्व बैंक कानून की धारा-सात के इस्तेमाल की चर्चा शुरू होने के समय से ही अटकलें थीं कि आरबीआई गवर्नर पटेल के इस्तीफा दे सकते हैं। रिजर्व बैंक कानून की धारा- सात के तहत केंद्र उसे किसी संबंधित मुद्दे पर निर्देश दे सकता है पर इसका इस्तेमाल अब तक किसी सरकार ने कभी नहीं किया है। लघु एवं मझोले उपक्रमों को कर्ज के नियमों में नरमी लाने, केन्द्रीय बैंक के पास आरक्षित धन के उपयुक्त स्तर और कमजोर बैंकों पर रिण कारोबार की पाबंदी जैसे मुद्दों को लेकर भी सरकार और रिजर्व बैंक के बीच पिछले कुछ समय से खींचतान चल रही है।  

क्या है सेक्शन 7?
आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 के मुताबिक सरकार के पास यह अधिकार होता है कि वो जनता के हित को ध्यान में रखते हुए आरबीआई को दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। गवर्नर की सारी शक्तियां केंद्रीय निदेशक मंडल के पास आ जाती हैं। सेक्शन 7 के लागू होने के बाद आरबीआई  के  सभी कामकाजों पर केंद्रीय निदेशक मंडल का नियंत्रण होगा और मंडल  उन शक्तियों का भी उपयोग करेगा जो बैंक करता आया है या कर सकता है।

 

एक नजर किन  मुद्दों के चलते उर्जित पटेल और सरकार आमने सामने थे:

  • आरबीआई ने 11 सरकारी बैंकों को पीसीए में मतलब प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन में डाल रखा है। जब आरबीआई को लगता है कि कोई बैंक मुनाफा नहीं कमा रहा और उसका  फंसा क़र्ज़ (बैड लोन) बढ़ रहा है तो आरबीआई उसे पीसीए में डाल देता है। पीसीए में शामिल बैंक न तो क़र्ज़ दे सकता है न ही नई ब्रांच खोल सकता है। सरकार चाहती थी आरबीआई इन 11 बैंको को पीसीए से निकाल दे। बाद में सरकार और आरबीआई के बीच पीसीए ढाँचे पर दोबारा से समीक्षा करने पर सहमति हो गई थी। 
     
  • नोटबंदी और जीएसटी के कारण कई छोटे उद्योग बंद होने के कागार में हैं। बीजेपी का वोटबैंक कहे जाने वाले छोटे कारोबारी मोदी सरकार से नाराज़ थे ऊपर से आरबीआई ने लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) को कर्ज देने के नियम  काफी सख्त कर दिए हैं। कारोबारियों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए सरकार ने आरबीआई को क़र्ज़ देने के नियम सरल करने को कहा था । सरकार के दबाव के चलते आरबीआई ने एमएसएमई के लिए फ्लोटिंग रेट लोन की नई बेंच मार्किंग और नई समिति के गठन का फैसला किया। 
     
  • आरबीआई ने हाल ही में 31 नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लाइसेंस कैंसिल किये थे । सरकार चाहती थी  कि आरबीआई इन मुश्किल में चल रही कंपनियों की मदद करे लेकिन आरबीआई पहले ही बैंको के बढ़ते बैड लोन से परेशान है और वह नहीं चाहती कि इन कंपनियों का बोझ भी वह उठाये।
     
  • 6 नवंबर को अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार  वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से उसके पास जमा 3.6 लाख करोड़ रुपये सरकार को हस्तांतरित करने को कहा जिसे आरबीआई ने ठुकरा दिया। 



अरविंद सुब्रमण्यम भी दे चुके हैं इस्तीफा
वहीं इससे पहले केंद्रीय मंत्री अरुण जेतली के करीबी अरविंद सुब्रमण्यम ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने भी इसकी वजह निजी कारण ही बताए थे। जेतली  ने खुद इसकी जानकारी देते हुए बताया था कि पारिवारिक कारणों से अरविंद वापस अमेरिका जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि उनके पास सुब्रमण्यम से सहमत होने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।

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