रवि प्रदोष व्रत: एक दिन में पाएं सौ गऊ दान का पुण्य

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17 फरवरी, रविवार 2019 को रवि प्रदोष व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार ये व्रत तेरहवें दिन यानी त्रयोदशी को मनाए जाने का विधान है। ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है। अव्यक्त होते हुए भी शिव जी व्यक्त हैं तथा सबके कारण होते हुए भी अकारण हैं। केवल देवता ही नहीं, अपितु ऋषि-मुनि, ज्ञानी-ध्यानी, योगी सिद्ध महात्मा, विद्याधर, असुर, नाग, किन्नर, चारण, मनुष्य आदि सभी भगवान शंकर के लीला-चरित्रों का ध्यान-स्मरण, चिंतन करके आनंदित होते रहते हैं। ये व्रत एक महीने में दो बार आता है एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष में। इसे करने से लाइफ में चल रही सभी टेंशन भाग जाती हैं। सुहागन का सुहाग सदा अटल रहता है। विद्वान तो यहां तक कहते हैं, त्रयोदशी व्रत का सौ गऊ दान के बराबर फल मिलता है। शिव धाम को प्राप्त करने का ये व्रत सरल माध्यम है। जीवन सुखमय बनाने के लिए करें विशेष उपयोगी उपाय-


शिव जी का रुद्राभिषेक करके कम से कम एक माला ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। शिव पुराण में कहा गया है, कोई भी सांसारिक या आध्यात्मिक व्यक्ति, सभी इस महामंत्र का स्मरण करके भोले बाबा को प्रसन्न कर लेते हैं।

शिवालय में बैठकर हनुमान रक्षा या राम कवच का एक तीन या पांच माला जप करना चाहिए। कवच का पाठ होंठ हिलाकर इतने स्वर से किया जाए जिससे दूसरे भी उसे सुन सकें किन्तु मंत्र का जाप बिना जीभ हिलाए मानसिक रूप से करें।

भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवललिंग सहित पूरे शिव परिवार को खीर का भोग अर्पण करें। फिर ये खीर बांट दें, अंत में खुद खाएं।

भगवान शिव को आक के पत्ते-आक के फूल, बेल पत्र, शमी के पत्ते, कच्चा दूध, धतूरा व सफेद फूल चढ़ाएं।
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