विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पर बोले ऊर्जा मंत्री, जनजातीय विकास के लिए बजट में की बढ़ौतरी

शिमला: सरकार जनजातीय विकास के लिए पूरी तरह से गंभीर है। इसका परिणाम है कि सरकार ने जनजातीय विकास के बजट में बढ़ौतरी की है। यह जानकारी ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने कृषि मंत्री डा. रामलाल मारकंडा की अनुपस्थिति में विपक्ष की तरफ से लाए गए कटौती प्रस्ताव के जवाब में सदन में दी। उन्होंने कहा कि गुज्जर व गद्दी कल्याण बोर्ड बनाने में थोड़ी देरी हुई है लेकिन सरकार जल्द ही उक्त बोर्ड का गठन देगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में 1476 करोड़ रुपए राशि उपलब्ध थी। 1564 करोड़ रुपए की राशि अगले वित्त वर्ष में रखी है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि बजट कम किया है। उन्होंने कहा कि फं ड की डाइवर्शन पहली बार नहीं हुई है। पावर सैक्टर के लिए जनजातीय सब प्लान का जो पैसा होता है, वह दिया जाता रहा है।

जहां से भी मिलती है डिमांड, वहां जा रही हैलीकॉप्टर की उड़ान

उन्होंने कहा कि सरकार ने जनजातीय क्षेत्र भरमौर, लाहौल-स्पीति व पांगी के लिए एकलव्य स्कूलों को खोलने का प्रावधान किया है। इसके तहत 10 करोड़ रुपए की राशि भी आई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जहां से भी डिमांड मिलती है, वहां हैलीकॉप्टर की उड़ान की जा रही है। उन्होंने बताया कि 924 ऐसे गांव हैं, जहां पर जनजातीय आबादी है। उन क्षेत्रों के लिए अलग से पैसा खर्च किया जाता है। नॉन प्लान में बजट को बढ़ाया गया है। मंत्री के जवाब पर विधायक जगत सिंह नेगी ने असंतुष्टि जताई और अनुदान मांग को वापस न लेने की बात कही। इसके बाद सत्तापक्ष के बहुमत से कटौती प्रस्ताव गिर गया।

जहां बसा है समुदाय, वहां भी सुनिश्चित हो विकास : आशा कुमारी

विधायक आशा कुमारी ने कहा कि कांग्रेस को यह श्रेय जाता है कि जनजातीय विकास के लिए प्राथमिकता में कटौती प्रस्ताव को रखा है। उन्होंने गुज्जरों को पट्टे नहीं मिल पाने का उल्लेख किया और कहा कि फ ोरैस्ट राइट एक्ट के कारण यह लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही ट्राइबल एरिया सब प्लान से जो पैसा छोटी-छोटी सड़कों के लिए आता था, वह पिछले कुछ समय से बंद कर दिया गया है। आशा कुमारी ने भरमौर की खस्ताहाल सड़कों का मामला भी उठाया।

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