ऑफ द रिकॉर्डः राम मंदिर पर अध्यादेश नहीं, मोदी ने RSS को दिया संकेत

नेशनल डेस्कः मोदी सरकार अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में कानून बनाने या अध्यादेश लाने के मूड में नहीं। यद्यपि आर.एस.एस. प्रमुख मोहन भागवत ने खुलेआम मांग की है कि मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा कानून बनाया जाए। मोदी सरकार का कहना है कि वह जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करना पसंद करेगी। एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘‘हम आर.एस.एस. प्रमुख मोहन भागवत की भावनाओं का सम्मान करते हैं जो न्याय प्रक्रिया में हो रहे विलंब के कारण निराश हैं मगर इस चरण पर कानून बनाने का रास्ता वांछनीय नहीं।’’


लेकिन पार्टी नेतृत्व आर.एस.एस. को राम मंदिर के निर्माण के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान छेडऩे से नहीं रोक पाएगा क्योंकि इससे हिंदू वोट मजबूत होंगे मगर प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि वह अप्रैल-मई 2019 में सत्ता में अपने 5 वर्षों के दौरान उनकी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों के नाम पर वोट प्राप्त करें। वह निजी तौर पर राम मंदिर को चुनावी मुद्दा बनाने के पक्ष में नहीं मगर वह लोकसभा चुनावों से पहले राम मंदिर के आसपास ‘आशा’ का वातावरण बनाने के खिलाफ नहीं। राकेश सिन्हा द्वारा संसद में पेश किए जाने वाले प्राइवेट मैम्बर बिल का भाजपा 11 दिसम्बर को 5 विधानसभा के चुनाव परिणामों के बाद संसद का मूड जानने के लिए इस्तेमाल करेगी।

भाजपा नेतृत्व इस बात को लेकर भी ङ्क्षचतित है कि उनके कुछ सहयोगी दल विशेषकर जनता दल (यू) राम मंदिर के लिए किसी कानूनी रूट का विरोध कर सकते हैं। जद (यू) ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार को कोई कदम उठाने से पूर्व उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए। रोचक बात यह है कि भागवत उस समय दिल्ली और वाराणसी में थे जब मोदी भी दोनों दिन वहां मौजूद थे मगर दोनों के बीच मुलाकात नहीं हुई।

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