‘जब श्री सुक्खू - हिमाचल के मुख्यमंत्री से’ छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल!
punjabkesari.in Saturday, May 30, 2026 - 03:36 AM (IST)
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ ने कुछ समय से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों से मिल कर उनका बौद्धिक स्तर तथा समस्याएं जानने के लिए सरकारी स्कूलों का दौरा करना शुरू किया है। इसी शृंखला में उन्होंने गत दिवस सी.बी.एस.ई. के दायरे में लाए गए 2 सरकारी स्कूलों का दौरा किया। 25 मई को ‘सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ छोटा शिमला में स्थित ‘सी.बी.एस.ई. सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल’ में गए और वहां के छात्र-छात्राओं के मन की बात जानी।
इस दौरान नौवीं कक्षा की एक छात्रा ने उनसे पूछा : ‘‘हर कोई कहता है कि नशों से दूर रहो लेकिन नशीले पदार्थ तो हमारे स्कूल के निकट ही मिल जाते हैं। शराब की एक दुकान तो हमारे स्कूल के निकट ही है सर, क्या यह गलत नहीं है?’’ इस पर मुख्यमंत्री ने उत्तर दिया कि यदि शराब की दुकान निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं है तो उसे दूसरे स्थान पर बदला जाएगा। एक छात्रा ने स्कूल में शौचालयों की कमी और पानी की अनियमित सप्लाई की शिकायत करते हुए कहा ‘‘700 छात्र-छात्राओं वाले स्कूल में सिर्फ एक सफाई कर्मचारी है।’’ एक अन्य छात्रा ने कहा, ‘‘हमें अपनी सी.बी.एस.ई. की पुस्तकें अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं। हम अपना सिलेबस कैसे पूरा कर पाएंगे?’’ ‘श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ ने उत्तर दिया, ‘‘हर नया बदलाव करने पर थोड़ी-बहुत दिक्कत आती है। सब कुछ जल्दी ही ठीक हो जाएगा।’’
इसी स्कूल के छात्रों ने शिकायत की कि, ‘‘हमारे स्कूल में फिजिक्स का टीचर नहीं है और पॉलीटिकल साइंस का भी सिर्फ एक ही टीचर है।’’ ‘सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ ने छात्रा को बताया कि तमाम खाली पद इस वर्ष 30 जून से पहले भर दिए जाएंगे। उक्त स्कूल के दौरे के बाद 27 मई को ‘श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ ने ‘नेरवा’ में हाल ही में सी.बी.एस.ई. के अंतर्गत लाए गए ‘सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल’ का दौरा किया। यहां दसवीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने प्रश्न से सबको चौंका दिया। छात्रा ने ‘श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ से पूछा कि ‘‘लगभग हर व्यवसाय के लोगों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित है परंतु विधायक बनने के इच्छुकों के लिए ऐसी किसी न्यूनतम योग्यता का होना अनिवार्य क्यों नहीं है?’’ ‘‘आज चुनाव अत्यंत खर्चीले हो गए हैं और इन पर अमीरों का दबदबा है। राजनीतिक दलों को चुनाव लडऩे के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को टिकट देने से पहले उसका कोई टैस्ट लेना चाहिए ताकि पता चल सके कि वह जिस क्षेत्र में जाने का इच्छुक है, उसे उसकी कोई जानकारी भी है या नहीं।’’
जब ‘श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ ने यह कह कर बात को बदलना चाहा कि हर पांच वर्षों के बाद जनता विधायकों की प्रभावशाली ढंग से परीक्षा लेती है तो भी उक्त छात्रा अपनी बात पर अड़ी रही। दसवीं कक्षा की छात्रा ‘आकृति चौहान’ ने कहा कि ‘‘मिड-डे मील योजना आठवीं कक्षा तक ही सीमित क्यों कर दी गई है। क्या हम बच्चे नहीं हैं सर? इसे नौवीं से बारहवी कक्षाओं तक भी बढ़ाया जाए।’’ यह सुन कर ‘श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू’ ने कहा ‘‘यह अच्छा सुझाव है। इस पर विचार किया जाएगा।’’ तीसरी कक्षा के छात्र ‘यश चौहान’ ने स्कूल के प्राइमरी सैक्शन में गंदे शौचालयों का मुद्दा उठाया जिस पर मुख्यमंत्री ने उसे इस समस्या को सुलझाने का आश्वासन दिया लेकिन इसके साथ ही कहा कि शौचालयों को साफ रखना आप सब बच्चों की भी जिम्मेदारी है। अन्य छात्रों ने खराब सड़कों, इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव तथा शाम 5 बजे के बाद उनके क्षेत्र में सरकारी और प्राइवेट बसें न चलने से लोगों को होने वाली असुविधा की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान दिलवाया।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का उक्त स्कूलों का दौरा करना और छात्र-छात्राओं से खुली बातचीत करना एक अच्छा प्रयोग है लेकिन इसे केवल सी.बी.एस.ई. वाले स्कूलों तक ही सीमित नहीं रख कर अन्य स्कूलों में भी जाकर छात्र-छात्राओं से मिलना और उनके मन की बात जाननी चाहिए। इससे न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा बल्कि शिक्षा के प्रति उनके रुझान में भी वृद्धि होगी। अध्यापकों में भी जागरूकता बढ़ेगी जिससे छात्रों की शिक्षा का स्तर बढ़ेगा। अन्य राज्यों में भी मुख्यमंत्रियों और शिक्षा मंत्रियों को इस तरह के दौरे करने चाहिएं।—विजय कुमार
