क्या नए आई.टी. नियम मतभेद की आवाजें दबाएंगे

6/5/2021 5:11:31 AM

भारतीय मीडिया ने अभी भी कई नई चीजों को पूरा करना है। यहां पर अनेकों बाहरी और भीतरी खुले हुए छोर हैं। अव्यवस्थित सोच, गलत उत्साह, निष्पक्षता की कमी, व्यापक समझ का अभाव, हेंकड़ी तथा एक ट्रैक वाले दृष्टिकोण हैं जिन्होंने मीडिया को उसी तरह त्रुटिपूर्ण दर्शाया है जैसे अन्य लोकतांत्रिक घटक हैं। जैसा कि अमरीकी स्कॉलर बेन एच बागड़ी कियान ने अपने आर्टीकल ‘जर्नल ऑफ क युनिकेशन’ में वॢणत किया है जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया ने सामान्य शर्तों में प्रकाशित किया है। 

बेन के अनुसार देश के मास मीडिया का सही काम जांचने और रिपोॄटग के साथ यह है कि वह विशेष वास्तविकताओं की समझ में वृद्धि करता है। मास मीडिया अंतर दृष्टि का सामाजिक प्रक्रिया में एक पर्याप्त जलाशय उत्पन्न करता है। बेशक मीडिया मनोरंजन तथा व्यापार को बेचता है मगर इसके अतिरिक्त वह गंभीर सूचना तथा विचारों का धनी बाजार उत्पन्न नहीं करता। मीडिया में विविधता तथा अधिकता एक लोकतंत्र के गहने नहीं हैं। मगर बचने के जरूरी तत्व हैं। 

इस परिदृश्य में डिजिटल मीडिया जिसे हम सोशल मीडिया कहते हैं, ने विचारों तथा सोचने की प्रक्रिया को एक विस्तृत आयाम दिया है कि संदेशों के रूप में मु य सेवाएं उपलब्ध करवाता है। इस क्षेत्र में सरकार डिजिटल मीडिया के लिए नए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को लेकर आई है। निजता के मामले को लेकर तकनीकी अग्रणीय कंपनियों ने अभियोग का रुख किया है। 25 मई को फेसबुक के मैसेजिंग प्लेटफार्म व्हाट्सएप ने भारत के नए सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) नियमों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। नए नियमों का पालन करने के लिए 25 मई की डैडलाइन तय की गई। 

व्हाट्सएप पर कोर्ट में यह तर्कथा कि नए आई.टी. नियम निजता का मूल अधिकार तथा बोलने की स्वतंत्रता व अभिव्यक्ति के अधिकार की उल्लंघना करता है। इस संदर्भ में इसने के.एस. पुट्टास्वामी मामले को लेकर सुप्रीमकोर्ट की व्यवस्था का उल्लेख किया। जहां पर सुप्रीमकोर्ट ने यह निर्णय दिया था कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।

नए आई.टी. नियमों को चुनौती देने वाली यह पहली प्रमुख टैक क पनी थी। यहां यह उल्लेख करना भी होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले से ही ‘द वायर’, ‘द न्यूज मिन्ट’, ‘किं्वट डिजिटल मीडिया लिमिटेड’ तथा ‘फाऊंडेशन फॉर इंडीपैंडैंट जर्नलिज्म’ जैसे अनेकों न्यूज पोर्टल द्वारा दी गई याचिकाओं से निपटा है। हाईकोर्ट ने केंद्र से इन याचिकाओं को लेकर प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। 

यह सत्य है कि सोशल मीडिया ने सीमाओं के आर-पार विचारों के आदान-प्रदान को सक्षम बनाकर तथा वाद-विवाद से विश्व को और निकट लाकर खड़ा कर दिया है। भारत ने पहले से ही सोशल मीडिया क पनियों को देश में व्यापार करने के लिए उनका स्वागत किया है। आमतौर पर लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म का स्वतंत्रता से इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार लोगों को सुनने तथा उनसे बात करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया था। मगर समस्या तो इसके दुरुपयोग को लेकर उभर कर आई है। इस प्रक्रिया में केंद्र ने नियमों को संशोधित किया है। 

नए नियमों के तहत सोशल मीडिया की अग्रणी क पनियों तथा मैसेजिंग ऐप्स को एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना है जोकि यूजर तथा पीड़ितों से मिली शिकायतों को हल करने तथा उनको स्वीकार करने के बारे में क पनियों को शिकायतों से निपटने तथा ऐसे लोगों के नाम तथा उनके कांट्रैक्ट विवरण को शेयर करने के लिए शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति अनिवार्य बनाना है। शिकायतों को 24 घंटों के भीतर स्वीकार  तथा उनकी प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर  समाधान करना होगा। 

व्हाट्सएप का मानना है कि नए नियमों का दुरुपयोग मतभेद की आवाजों को दबाने के लिए किया जा सकता है। खुले संवाद की प्रक्रिया के लिए प्रतिशोधी दृष्टिकोण का खतरा देश तथा विदेश में गलत संकेत भेजेगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद का कहना है कि सरकार अपने सभी नागरिकों की निजता के अधिकार को यकीनी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मगर ऐसे ही समय में सरकार की यह जि मेदारी भी बनती है कि वह कानून-व्यवस्था तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को यकीनी बनाए रखे। 

नए नियमों से व्हाट्सएप की समस्या यह है कि इसके यूजर की गिनती 50 लाख से ऊपर की है। व्हाट्सएप मैसेजिंग सिस्टम एंड-टू-एंड एनक्रिप्टिड है। व्हाट्सएप के शब्दों में केवल आप और जिसके साथ आप बात कर रहे हैं वही पढ़ सकता है जो भेजा गया है। कोई दूसरा यहां तक कि व्हाट्सएप भी उसे पढ़ नहीं सकता। 

व्हाट्सएप के अनुसार ऐसी बातों को खोजना निजता के लिए एक खतरा है। सरकार तथा टैक क पनियों के मध्य बैठक का कोई आधार नहीं है। हालांकि मीडिया के साथ बेहतर रिश्तों की जरूरत है। मैं यह दोहराना चाहूंगा कि 2019 में सुप्रीमकोर्ट के निर्देश ने केंद्र को व्यक्तिगत निजता पर हमले को लेकर सचेत किया था। निजता तथा संबंधित मामलों में जटिलताओं को देखते हुए मेरा मानना है कि सुप्रीमकोर्ट को अपना अंतिम आदेश देना चाहिए। विचारों तथा असमंजस को खत्म करने का यही मात्र तरीका है। सोशल मीडिया तथा इसके यूजर्स सहित यह सभी संबंधित लोगों के हित में भी रहेगा।-हरि जयसिंह


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