‘चीनी सेना में शुद्धिकरण अभियान’ दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को हुई फांसी की सजा!

punjabkesari.in Saturday, May 23, 2026 - 03:21 AM (IST)

चीन की सेना में पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत कई सरकारी अधिकारी भ्रष्टïाचार के आरोपों में पकड़े गए हैं। इसी सिलसिले में अब चीन की सैन्य अदालत ने अपने 2 पूर्व रक्षा मंत्रियों  ‘वेई फेंगहे’ और ‘ली शांगफू’ को भ्रष्टïाचार के मामले में दोषी ठहराते हुए सस्पैंडेड मृत्युदंड सुनाया है। अर्थात उन्हें तुरंत फांसी देने की बजाय 2 वर्षों की मोहलत दी गई है और तब तक वे जेल में रहेंगे।
इस दौरान उनका कोई अन्य गंभीर अपराध सामने न आने पर उनकी सजा उम्रकैद में बदल दी जाएगी, परंंतु उसमें पैरोल या सजा में किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी और दोनों की सम्पत्ति जब्त कर ली जाएगी। ‘वेई फेंगहे’ 2018 से 2023 तक तथा ‘ली शांगफू’ मार्च से अक्तूबर 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे। 

इस फैसले को 2012 से चीन में लगातार चलाए जा रहे भ्रष्टïाचार विरोधी अभियान के अंतर्गत गत कुछ वर्षों में सेना के भ्रष्ट उच्चाधिकारियों पर की गई कार्रवाइयों में सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। वर्ष 2022 से अब तक चीन में 100 से अधिक वरिष्ठ सेनाधिकारियों को हटा दिया गया है या वे भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच का सामना कर रहे हैं। वर्ष 2025 में ही जनरल रैंक के 15 अधिकारी बर्खास्त किए गए। ‘वेई फेंगहे पर अत्यंत कठोर शब्दों में भ्रष्टाचार तथा पार्टी के भरोसे को तोडऩे और सेना के राजनीतिक वातावरण को गंभीर रूप से दूषित करनेतथा ‘ली शांगफू’ पर भी सैन्य उपकरणों से जुड़े क्षेत्र का वातावरण खराब करने का आरोप लगाया गया है। 

रक्षा मंत्री रहते हुए ‘वेई फेंगहे’ अचानक लापता हो गए थे, बाद में उनकी बर्खास्तगी और गिरफ्तारी का पता चला था। हिरासत में ही उन पर भ्रष्टाचार मामले में सैन्य अदालत में मुकद्दमा चला जबकि ली को राष्टï्रपति शी ने स्वयं रक्षा मंत्री नियुक्त किया था।
दोनों नेताओं को जून, 2024 में कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया था और उनके सभी सैन्य पद व रैंक छीन लिए गए थे। इसके बाद  इन दोनों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई तेज हुई, जो अब इस फैसले तक पहुंची है। चीन पर नजर रखने वाले कुछ लोग इसे ‘शी जिनपिंग’ के नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बता रहे हैं। 

चीन में एक ही पार्टी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सी.सी.पी.) का शासन है और पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पी.एल.ए.) उसकी सैन्य शाखा है, जिससे पार्टी और उसके नेता के प्रति पूर्ण वफादारी की उम्मीद की जाती है। चीनी सेना में व्याप्त भ्रष्टïाचार के कारण ताइवान के विरुद्ध चीन का 
सैन्य अभियान भी धीमा हो गया है। चीनी सेना के आधुनिकीकरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रेक्षकों के अनुसार 2013 से सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति ‘शी जिनपिंग’ संभवत: अपने नेतृत्व के अंतिम चरण में हैं। चीन की सेना के भारी भ्रष्टाचार ने पार्टी और सेना पर राष्ट्रपति ‘शी जिनपिंग’ की पकड़ को गंभीर रूप से प्रभावित किया होगा क्योंकि बर्खास्त किए गए कई जनरलों को उनका करीबी माना जाता था। 

सरकारी अखबार ‘पी.एल.ए. डेली’ के अनुसार दोनों को मिली सजा से यह तय हो गया है कि अब सेना का कोई भी शीर्ष अधिकारी ‘बेवफाई’ के बारे में नहीं सोचेगा तथा बेवफाई करने वाले लोगों के लिए यह सजा एकदम उचित है। चीन की राजनीति में इस समय उथल-पुथल चल रही है। अब यह कहना मुश्किल है कि क्या सचमुच यह सब चीन में भ्रष्टïाचार समाप्त करने के लिए किया जा रहा  है या सेना पर ‘शी जिनपिंग’ की कमजोर हो रही पकड़ को मजबूत करने के लिए? -विजय कुमार


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