‘खाने-पीने की वस्तुओं में जहरीले पदार्थ’ बन रहे जिंदगी के लिए खतरा!

punjabkesari.in Friday, Aug 21, 2026 - 04:05 AM (IST)

देश में लापरवाही का कुछ इस तरह का दौर चल रहा है कि विभिन्न अवसरों पर आयोजित समारोहों या स्कूलों आदि में परोसे जाने वाले मिड डे मील आदि में मिल रहे विषैले जीव-जंतुओं तथा अस्वच्छ पदार्थों के इस्तेमाल तथा पकाने में लापरवाही से लोगों के प्राण खतरे में पड़ रहे हैं जिनकी पिछले चार महीनों में सामने आई चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 

* 8 अप्रैल को ‘भभुआ’ (बिहार) में एक रैस्टोरैंट से लाए गए ‘पनीर’ और ‘मंचूरियन’ खाने के बाद ‘विशाल तिवारी’ नामक युवक की मौत हो गई और उसके 2 मित्र गंभीर रूप से बीमार हो गए। 
* 25 अप्रैल को ‘पायधुनी’ (मुम्बई) में बिरयानी खाने के बाद एक ही परिवार के 4 सदस्यों को गंभीर उल्टी-दस्त शुरू हो गए और इलाज के दौरान दम्पति और उनकी 2 बेटियों की मौत हो गई।
* 8 मई को ‘सहरसा’ (बिहार) में ‘बलुआहा’ स्थित सरकारी स्कूल में मिड डे मील में परोसा गया भोजन खाते ही 250 बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी, चक्कर, घबराहट और बेचैनी शुरू हो गई। खाना खाने के दौरान कुछ बच्चों ने भोजन में सपोला या विषैला कीड़ा होने का दावा किया था।

* 22 मई को ‘कन्नौज’ (राजस्थान) के गांव ‘मेवदाकलां’ में एक धार्मिक समारोह के बाद आयोजित भोज में विषाक्त भोजन खाने से 100 से अधिक लोगों को अचानक उल्टी-दस्त और पेट दर्द होने लगा।
* 25 मई को ‘सुंदरगढ़’ और ‘झारसुगड़ा’ (ओडिशा) में एक शोक सभा के दौरान परोसा गया भोजन खाने से 4 लोगों की मौत हो गई।
* 9 जुलाई को ‘नागरकुरनूल’ (तेलंगाना) के ‘मन्नानूर’ स्थित एक आवासीय विद्यालय में सुबह के नाश्ते में परोसी गई दूषित खिचड़ी खाने के परिणामस्वरूप 26 छात्रों को पेट दर्द और उल्टियां शुरू हो गईं ।
* 13 जुलाई को ‘धौलपुर’ (राजस्थान) में एक जन्मदिन समारोह का बचा हुआ भोजन खाने से एक ही परिवार के 11 सदस्य बीमार पड़ गए  जिनमें से 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई।
* 11 अगस्त को ‘खगडिय़ा’ (बिहार) के ‘हियादपुर’ गांव में आयोजित पूजा के मौके पर बांटा गया प्रसाद खाने के बाद 250 के लगभग लोगों को पेट दर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर और घबराहट जैसी शिकायतें शुरू हो गईं। 

* 16 अगस्त को ‘नालासोपारा’ (महाराष्टï्र) में एक जन्मदिन समारोह में केक खाने के बाद 7 बच्चों और 4 महिलाओं सहित 11 लोग बीमार हो गए। बच्चों का दावा था कि केक में मरी हुई छिपकली मिली थी।
* 16 अगस्त को ही ‘महाराज गंज’ (उत्तर प्रदेश) में ‘जवाहर नवोदय विद्यालय’ के छात्रों को परोसे गए सुबह के नाश्ते के चावल में मरा हुआ मेंढक मिलने से हड़कम्प मच गया और दोबारा नाश्ता बनवाया गया।
* 17 अगस्त को ‘बांदा’ (उत्तर प्रदेश) के एक निजी आवासीय स्कूल के होस्टल में रहने वाले 8 और 12 वर्ष के 2 छात्रों की ‘फूड प्वायजङ्क्षनग’ से मौत हो गई। बच्चों ने कुछ घंटे पहले चटनी के साथ ‘मोमोज’ खाए थे।
* 18 अगस्त को ‘सूरत’ (गुजरात) में एक रेस्तरां से लाई गई ‘काजू- पनीर’ की सब्जी खाने के बाद एक परिवार के 5 सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए तथा अस्पताल में इलाज के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई। 
* 18 अगस्त को ही ‘नालंदा’ (बिहार) के एक स्कूल में पकाए गए मिड डे मील की सब्जी में नमक के स्थान पर कपड़े धोने वाला वाशिंग पाऊडर डाल देने के कारण कई बच्चों के गले और जीभ में तेज जलन, पेट दर्द, चक्कर और उल्टियां शुरू हो गईं जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। 

* और अब 18 अगस्त को ही ‘नग्गर’ (हिमाचल) में ‘बाड़ी’ स्थित प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील में परोसी गई खीर खाकर 30-40 बच्चों की तबीयत खराब हो जाने का मामला सामने आया है। 
ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं। अत: ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भोजन पकाने में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की शुद्धता और स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत है और इसमें लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध तुरंत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।—विजय कुमार 


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