सरकार और किसानों के सकारात्मक रवैये से आंदोलन के समाप्ति की ओर बढ़ते कदम

punjabkesari.in Wednesday, Dec 08, 2021 - 03:53 AM (IST)

केंद्र सरकार द्वारा सितम्बर, 2020 में पारित तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को लागू करने से पहले ही किसान संगठन इन्हें किसान विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग को लेकर 26 नवम्बर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर धरना-प्रदर्शन करते आ रहे हैं। किसानों में व्याप्त असंतोष को देखते हुए 19 नवम्बर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने और 29 नवम्बर, 2021 को शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन अधिवेशन के पहले ही दिन इस सम्बन्ध में प्रक्रिया सम्पन्न करने की घोषणा कर दी थी। 

इससे पूर्व 28 नवम्बर, 2021 को केंद्र सरकार ने किसानों की एक अन्य मांग स्वीकार करके पराली जलाने को अपराधमुक्त घोषित कर दिया तथा संसद में वायदे के अनुसार तीनों कृषि कानून वापस लेने की प्रक्रिया भी सम्पन्न करने के बावजूद किसान नेताओं ने धरना स्थलों से वापस जाने से इंकार कर दिया। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में किसान नेताओं ने कहा कि तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करवाना ही उनकी एकमात्र मांग नहीं है तथा उन्होंने पत्र में अपनी पहले की हुई 6 मांगें दर्ज कर दीं। 

इन मांगों में एम.एस.पी. (मिनीमम सपोर्ट प्राइस) की गारंटी को किसानों का अधिकार बनाने, विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक 2020-21 वापस लेने, पराली जलाने पर सजा का प्रावधान हटाने, दर्ज मुकद्दमे वापस लेने, लखीमपुर खीरी कांड में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी, आंदोलन में शहीद होने वाले 700 किसानों के पारिवारिक सदस्यों को मुआवजा देनेे और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करना शामिल थीं। अगले ही दिन 30 नवम्बर को सरकार ने किसानों से आगे की वार्ता के लिए समिति गठित करने की कवायद शुरू कर दी और एम.एस.पी. व अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए 5 लोगों के नाम भेजने को कहा। 

दूसरी ओर पंजाब के 32 किसान संगठनों ने घर वापसी की तैयारी की खबरों को सिरे से नकारते हुए दो-टूक कहा कि मांगें पूरी होने तक वे कहीं नहीं जाएंगे तथा संयुक्त किसान मोर्चाकी सहमति के बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही 4 दिसम्बर को संयुक्त किसान मोर्चा के सभी सदस्यों द्वारा आगामी रणनीति बनाने की बात कही गई। इस बीच 3 दिसम्बर को किसान नेताओं की हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हुई बैठक भी सिरे नहीं चढ़ पाई। 

4 दिसम्बर को संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार से बातचीत के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया और किसान नेता राकेश टिकैत ने घोषणा की कि 2 दिनों तक सरकार का रवैया देखने के बाद ही 7 दिसम्बर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। 7 दिसम्बर को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा के 5 सदस्यों की बैठक के बाद कमेटी के सदस्य दोबारा संयुक्त मोर्चा की बैठक में पहुंच कर किसान नेताओं की बैठक में शामिल हुए। 

इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के पास गृह मंत्रालय का एक संदेश आया जिसमें विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक सहमति का संकेत दिया गया था। इससे यह लग रहा था कि 7 दिसम्बर को किसानों की घर वापसी पर बात बन जाएगी परंतु ऐसा नहीं हो सका। शाम को संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने सरकार के भेजे प्रस्तावों पर विचार करने के बाद प्रैस कांफ्रैंस में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के प्रस्तावों के 3 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की जरूरत है। किसानों की आपत्तियां केंद्र सरकार को भेजी गई हैं। इन पर 8 दिसम्बर को जवाब मिलने की आशा है।

किसान नेताओं का कहना है कि किसानों पर दर्ज सभी मुकद्दमे बिना शर्त वापस लिए जाएं, अकेले हरियाणा में ही 48,000 मुकद्दमे दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा एम.एस.पी. बारे कमेटी में केवल संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य लेने तथा मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजे की मांग शामिल है। 

किसान नेताओं का यह भी कहना है कि सरकार उनकी कुछ मांगें मानने को तैयार नहीं है, अत: 8 दिसम्बर को संयुक्त किसान मोर्चा की फिर बैठक होगी जिसमें सरकार के जवाब पर चर्चा के बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी। इस बीच राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार की चिट्ठी पर कैसे विश्वास करें? दिल्ली के थानों में बंद पड़े ट्रैक्टरों को छोड़ा जाए।  इसी बीच एक किसान नेता ने कहा है कि बुधवार को आंदोलन समाप्त होने की संभावना है। यह अच्छी बात है कि आंदोलन की समाप्ति की दिशा में सरकार तथा आंदोलनकारी किसान दोनों ही आगे बढ़ रहे हैं और इस समस्या का कोई संतोषजनक हल निकलना न सिर्फ सरकार एवं आंदोलनकारी किसानों बल्कि देश के भी हित में है।—विजय कुमार                                                             


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