आपत्तिजनक बयान देने वालो अब तो देश पर रहम करो

punjabkesari.in Tuesday, Jun 07, 2022 - 03:43 AM (IST)

हालांकि हमारे माननीयों को हर बयान सोच-समझ कर ही देना चाहिए ताकि अनावश्यक विवाद पैदा न हों, परंतु अनेक नेताओं ने अमर्यादित और विवादास्पद बयान देना जारी रखा हुआ है। इनसे पैदा होने वाले अनावश्यक विवादों की चंद ताजा मिसालें निम्र में दर्ज हैं : 

* 18 मई को मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी के नेता मोहसिन अंसारी को ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग के अस्तित्व का मामला उठने के बाद अशोभनीय धार्मिक टिप्पणी करने तथा लीची को आधी काट कर उसके बीज को शिवलिंग के तौर पर फेसबुक पर पोस्ट करके धार्मिक सौहार्द बिगाडऩे की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 
* 18 मई को ही दिल्ली पुलिस के एक वकील द्वारा दायर शिकायत के आधार पर ‘हिंदू कालेज’ के प्रोफैसर रतन लाल के विरुद्ध ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग बारे सोशल मीडिया पर कथित रूप से भड़काऊ, अपमानजनक और उकसाऊ ट्वीट सांझा करने के आरोप में केस दर्ज किया गया। 

* 31 मई को रायपुर के ‘बालोद’ में ‘छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना’ के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को एक सभा में जैन साधु-संतों तथा मुनियों के विरुद्ध अभद्र एवं विवादास्पद टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 
* 5 जून को आगरा पुलिस ने ‘शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी’ के चेयरमैन मोहम्मद जाहिद के विरुद्ध धार्मिक भावनाएं भड़काने, जान से मारने की धमकी देने और आई.टी. कानून की धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया। जाहिद ने शाही जामा मस्जिद को लेकर पुरातत्व विभाग के अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी करने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए इसका अंजाम भुगतने और आंख फोड़ देने जैसी बातें कही थीं।   
* 5 जून को ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पैगम्बर मोहम्मद पर हाल ही में एक टी.वी. कार्यक्रम में बहस के दौरान दिए गए अपने विवादास्पद बयान पर पार्टी से 6 वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। 

इसके अलावा पार्टी की दिल्ली इकाई के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल, जिनकी टिप्पणियों ने सोशल मीडिया पर साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे का काम किया, को इसी मुद्दे पर भड़काऊ ट्वीट करने के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया है, पर लोगों की नाराजगी दूर नहीं हुई है तथा वे इन दोनों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि नूपुर शर्मा के बयान के परिणामस्वरूप कानपुर सहित उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में हिंसा भड़क उठी तथा भारी तोड़-फोड़ की गई जिसके सिलसिले में बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जहां इस तरह के बयानों से देश में साम्प्रदायिक सौहार्द को चोट पहुंच रही है वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से कुछ सीख ले सकते हैं जिन्होंने ज्ञानवापी मुद्दे की चर्चा करते हुए 3 जून को कहा था कि :

‘‘हर दिन एक नया मुद्दा नहीं लाना चाहिए।’’  इसके साथ ही उन्होंने हर मस्जिद में एक शिवलिंग की तलाश करने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना? विवाद को क्यों बढ़ाना है? हालांकि ज्ञानवापी विवाद में आस्था के कुछ मुद्दे शामिल हैं परंतु इस पर अदालत का फैसला सभी को स्वीकार करना चाहिए।’’ नूपुर शर्मा तथा नवीन जिंदल के बयान से चंद इस्लामी देशों की आपत्तियों को खारिज करते हुए भारत सरकार ने कहा है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा की गई टिप्पणियां सरकार के विचारों को प्रदॢशत नहीं करती हैं और नई दिल्ली सभी धर्मों के प्रति सर्वोच्च सम्मान का भाव रखती है। 

पाकिस्तान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भारत में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध ‘मानवाधिकार उल्लंघन’ रोकने के लिए भारत पर दबाव बनाने की अपील के संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि ‘‘भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार करने के लिए छाती पीटने की बजाय पाकिस्तान अपने यहां अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और बेहतरी पर ध्यान केंद्रित करे।’’ 

भाजपा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित और नवीन जिंदल को निष्कासित करके सही किया है। अत: अब इस विवाद को यहीं समाप्त कर देना चाहिए। इस संबंध में बयानबाजी करने वालों को भी ऐसी बयानबाजी बंद कर देनी चाहिए, क्योंकि ऐसा न करने से उनका भी नुक्सान होगा और देश का भी। संघ प्रमुख मोहन भागवत तो पहले ही कह चुके हैं कि हर दिन एक नया मुद्दा नहीं लाना चाहिए। उनका परामर्श मानना ही सबके लिए हितकर है।—विजय कुमार  


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