‘युद्ध के छाए बादल’ जितनी जल्दी छंटें- उतना ही अच्छा!

punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 03:55 AM (IST)

इन दिनों विश्वमें चल रहे युद्धों ने सारी दुनिया में खौफ पैदा कर रखा   है और यह कहना कठिन है कि भविष्य में क्या होने वाला है। 7 अक्तूबर, 2023 को इसराईल पर फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह ‘हमास’ के हमले के बाद से अभी तक 2000 इसराईली मारे जा चुके हैं जबकि 251 को हमास ने बंधक बना रखा है। 

दूसरी ओर ‘हमास’ के हमले के जवाब में इसराईली हमलों में अब तक गाजा में 72,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं तथा हजारों लोग घायल हुए हैं। इसराईली हमलों से यह क्षेत्र खंडहर बन गया है। युद्ध में अभी तक इसराईल का पलड़ा भारी होने के बावजूद वहां जानमाल की भारी हानि होने के कारण इसराईल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। नेतन्याहू द्वारा दक्षिण लेबनान पर जारी हमलों के विरुद्ध 9 मई को भी इसराईली नागरिकों ने प्रदर्शन किया। 

इसराईल में ‘आर्थोडाक्स यहूदी समुदाय’ के लोगों ने सेना में भर्ती होने से इंकार भी कर दिया है। लोगों का कहना है कि पूरी तरह गलत दिशा में जा रही नेतन्याहू की सरकार लोगों को झूठी और फर्जी खबरें परोस रही है। यही नहीं, 24 फरवरी, 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों पक्षों के हजारों लोगों की मौत और यूक्रेन का अधिकांश हिस्सा खंडहर बन चुका है। इसमें दोनों ही पक्ष झुकने के लिए तैयार प्रतीत नहीं हो रहे। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की व अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच इस समस्या को सुलझाने के लिए हुई बातचीत भी बेनतीजा रही है। 

इसी बीच अचानक द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ की विजय के उपलक्ष्य में मास्को में 9 मई को आयोजित ‘विजय दिवस परेड’ से पहले राष्टï्रपति व्लादीमीर पुतिन ने कहा कि उन्हें लगता है कि यूक्रेन के साथ रूस का संघर्ष अब समाप्त होने वाला है। इसी लिए रूस के अलावा यूक्रेन ने भी अलग समय पर युद्धविराम का ऐलान किया है।लेकिन इसराईल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के उकसावे में आकर 28 फरवरी, 2026 को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमला कर दिया। अमरीका के हमलों में ईरान की जान-माल की भारी क्षति हुई जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई के अलावा कई नेता मारे गए परंतु ईरान ने अमरीका के आगे न झुकते हुए इसके दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं ने अमरीका पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए और अब अमरीका बैकफुट पर आता दिखाई दे रहा है। हालांकि युद्ध के साथ-साथ दोनों देश युद्ध विराम की बात भी कर रहे हैं। पाकिस्तान में ईरान और अमरीका के प्रतिनिधियों की 26 अप्रैल को बातचीत का पहला दौर नाकाम हो चुका है और अब एक बार फिर अगली बैठक इस सप्ताह पाकिस्तान में ही हो सकती है जिससे यह समस्या समाप्त होने की कुछ आशा बंधी है।

इस बीच उत्तर कोरिया के तानाशाह ‘किम जोंग-उन’ ने भी धमकी दे दी है कि यदि उसके देश को दक्षिण कोरिया से खतरा महसूस हुआ तो वह उसे पूरी तरह नष्टï कर सकता है। किम ने दक्षिण कोरिया को अपना सबसे महत्वपूर्ण दुश्मन करार दिया है।  इस तरह के हालात के बीच पूरी दुनिया पर ही तबाही के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं जबकि युद्ध से उकताए लोगों का कहना है कि जितनी जल्दी दुनिया से युद्धों का खतरा टले उतना ही अच्छा होगा। इन युद्धों के परिणामस्वरूप सारी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के विश्वव्यापी  प्रभाव के कारण पैट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताते हुए देशवासियों से एक वर्ष के लिए सोना न खरीदने और तेल बचाने की अपील की है। ईरान और अमरीका द्वारा युद्ध समाप्त करने के लिए वार्ता का दूसरा दौर करने पर सहमति और रूस तथा यूक्रेन द्वारा थोड़े समय के लिए युद्ध विराम करने से दोनों के बीच समझौते की राह पर आगे बढऩे की आशा पैदा हो रही है। अत: जितनी जल्दी ये देश अपने विवाद भुला कर किसी संतोषजनक फैसले पर पहुंचेंगे, इनके और विश्व समुदाय के लिए उतना ही अच्छा होगा।—विजय कुमार  


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