तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के पाक आतंकियों की रिहाई से भारत में आतंकवाद बढ़ने का खतरा

2021-08-29T03:22:08.61

नवीनतम सूचनाओं के अनुसार अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का खतरा बढ़ गया है। बताया जाता है कि हाल ही में अफगानिस्तान की जेलों से रिहा किए गए पाकिस्तान के आतंकी गिरोह ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के 100 से अधिक आतंकवादी वापस अपने गिरोह में शामिल होकर भारत पर हमले की योजना बना रहे हैं। ‘जैश’ के सरगना मसूद अजहर ने अपने गुर्गों को हमलों की तैयारी करने के लिए कहा है। यह भी पता चला है कि 38 आतंकवादी अफगानिस्तान में तालिबान से अत्याधुनिक हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेकर पाक अधिकृत हजीरा स्थित जैश के ट्रेनिंग कैम्प में लौट आए हैं जहां काफी हलचल है। 

इसी पृष्ठभूमि में सुरक्षा एवं गुप्तचर एजैंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ‘‘अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे के तात्कालिक प्रभाव के रूप में जम्मू-कश्मीर में नार्को टैरेरिज्म (नशा तस्करी से प्राप्त धन से आतंकवाद को बढ़ावा) का खतरा बढ़ गया है।’’अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी गिरोहों के हौसले बहुत बढ़ गए हैं और उन्होंने अफगानिस्तान में ‘गोल्डन क्रिसैंट’ के नशा तस्करों के साथ मिल कर जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी की व्यापक योजना बनाने के अलावा अपने सदस्यों की संख्या बढ़ा दी है। 

उल्लेखनीय है कि ईरान, पाकिस्तान के साथ लगने वाले अफगानिस्तान के  इलाके को ‘गोल्डन क्रिसैंट’ कहा जाता है जो विश्व में अफीम का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले क्षेत्रों में से एक है। कुल मिलाकर जहां अफगानिस्तान में अरबों रुपए की खनिज सम्पदा पर चीन सहित अन्य देशों की नजरें गड़़ी हुई हैं और वहां जारी गृह युद्ध से लोकतंत्र के भविष्य पर प्रश्रचिन्ह लग गया है, वहीं अफगानिस्तान में तालिबान का बढ़ता प्रभाव भारत में जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि पंजाब की सुरक्षा के लिए भारी चिंता का विषय भी बन गया है।—विजय कुमार 


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Chief Editor

vijay kumar

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