‘सुरक्षा बलों का मददगार’ खोजी श्वान टायसन (डॉग)!
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 03:55 AM (IST)
जम्मू डिवीजन के कठुआ, ऊधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में हिंसक घटनाओं को अंजाम देने वाले आतंकवादियों ने लम्बे समय से सुरक्षा बलों की नाक में दम कर रखा था। सुरक्षा बलों को जम्मू डिवीजन में सक्रिय इन आतंकवादियों का सफाया करने के लिए चलाए जा रहे ऑप्रेशन ‘त्राशि-1’ के दौरान आखिरकार 22 फरवरी, 2026 को बड़ी सफलता मिली। किश्तवाड़ के घने जंगल में हुई भीषण मुठभेड़ में भरतीय सेना के जवानों ने एक ‘ढोक’ (भेड़-बकरियां आदि चराने वालों अर्थात गड़रियों द्वारा मौसम बदलने पर रहने के लिए बनाए गए अस्थायी आवास) में छिपे हुए आतंकवादियों पर रॉकेट दागकर जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष पाकिस्तानी कमांडर और 7 वर्षों से सुरक्षा बलों को चकमा दे रहे 10 लाख के ईनामी सैफुल्लाह सहित 3 आतंकवादियों को मार गिराया।
राकेट दागने से हुआ धमाका इतना जबरदस्त था कि इसके परिणामस्वरूप एक आतंकवादी की खोपड़ी ही पूरी तरह उड़ गई तथा तीनों आतंकवादियों के शव पूरी तरह जल गए। मुठभेड़ स्थल से 2 ए.के. 47 राइफलें और भारी मात्रा में युद्धक सामग्री बरामद हुई। गत कुछ वर्षों से ये आतंकवादी लगातार अपनी लोकेशनें बदलते आ रहे थे और पहाड़ी इलाकों व घने जंगलों का लाभ उठाकर अपना नैटवर्क बनाने में जुटे हुए थे। इस आप्रेशन को सफल बनाने में भारतीय सेना के मददगार ‘टायसन’ नामक ‘खोजी श्वान’ (डॉग) का बड़ा योगदान रहा। आतंकवादियों के ठिकानों की ओर वही सबसे पहले बढ़ा था।
आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों पर चलाई गई गोलियों में से पहली गोली ‘टायसन’ (डॉग) के ही पैर में लगी थी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे इलाज के लिए विमान द्वारा ऊधमपुर के अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसकी हालत में सुधार हो रहा है। घायल हो जाने के बावजूद ‘टायसन’ ने आतंकवादियों का डटकर मुकाबला किया और अंतत: उसने आतंकवादियों को सुरक्षा बलों की रेंज में ला दिया और भारतीय जवानों ने उनको ढेर कर दिया। इस सम्बन्ध में जारी एक बयान में कहा गया है कि ‘‘टायसन की बहादुरी के दम पर ‘व्हाइट नाइट कोप्र्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा सी.आर.पी.एफ. उक्त पाकिस्तान समॢथत आतंकवादियों पर सटीक निशाने साध कर उन्हें ठिकाने लगा सकीं। टायसन एक सच्चा योद्धा सिद्ध हुआ है।’’
‘टायसन’ के अलावा आतंकवादियों के विरुद्ध भारतीय सुरक्षा बलों की विभिन्न सैन्य कार्रवाइयों में अनेक मददगार खोजी ‘श्वानों’ ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें सेना के ‘डोमीनो’ नामक ‘श्वान’ तथा उसके हैंडलर ‘लक्की कुमार’ को राजौरी में एक आतंकवादी का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए 2023 में सम्मानित भी किया गया था। 2023 में ही जम्मू के राजौरी जिले में एक आप्रेशन के दौरान 2 आतंकवादियों तक सुरक्षा बलों को पहुंचा कर उन्हें मार गिराने में योगदान देने वाली ‘कैंट’ नामक एक ‘मादा खोजी श्वान’ अपने हैंडलर को आतंकवादियों से बचाने की कोशिश के दौरान उस पर चलाई गई गोली से मारी गई थी। ‘कैंट’ का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था।
ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं जबकि वास्तव में मददगार वफादार ‘श्वानों’ की सूची में ‘जूम’, ‘फैंटम’ और ‘एक्सल’ जैसे और भी कई नाम हैं जिन्होंने देश की माटी का ऋण अपने प्राण देकर चुकाया है। आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई में इन खोजी ‘श्वानों’ का योगदान किसी भी दृष्टि से कम नहीं है। अत: भारतीय सुरक्षा बलों के मददगार इन खोजी ‘श्वानों’ के प्रशिक्षण तथा देखभाल को और बेहतर बनाने के साथ-साथ उनके प्रशिक्षकों को भी समुचित पुरस्कार देकर प्रोत्साहित करने की जरूरत है ताकि वे और मुस्तैदी से देश के दुश्मनों का नाश कर सकें।—विजय कुमार
