राजधानी दिल्ली की रोहिणी अदालत गैंगवार से लहूलुहान

09/25/2021 4:58:44 AM

भारतीय अदालती परिसरों और उनके आस-पास अपराधी गिरोहों द्वारा गोलीबारी का सिलसिला कुछ समय से चला आ रहा है जिसके परिणामस्वरूप अदालत परिसर खून से लाल होते रहते हैं :
* 2 जून, 2015 को झारखंड में हजारीबाग की जिला जेल के बाहर 2 अपराधी गिरोहों में हुई गोलीबारी में एक गैंगस्टर व उसके 2 सहयोगी मारे गए।
* 22 मार्च, 2017 को झज्जर अदालत में हत्या के आरोप में पेशी पर लाए गए एक व्यक्ति को अदालत परिसर के बाहर शूटरों ने मार गिराया। 

* 28 मार्च, 2017 को रोहतक के जिला अदालत परिसर के बाहर महिलाओं के वेश में आए प्रतिद्वंद्वी गिरोह के 2 हमलावरों द्वारा की गई गोलीबारी में एक गैंगस्टर मारा गया तथा 7 अन्य घायल हो गए।   
* 2017 में दिल्ली के रोहिणी कोर्ट काम्प्लैक्स के भीतर दो अलग-अलग घटनाओं में 2 विचाराधीन कैदियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई।
* इस वर्ष जुलाई में द्वारका कोर्ट परिसर में 45 वर्षीय एक व्यक्ति की वकीलों के चैंबर के बाहर गोली मार कर हत्या कर दी गई। 

इसी सिलसिले में अब 24 सितम्बर को दिल्ली के रोहिणी अदालत परिसर में कोर्ट नंबर 206 के बाहर पेशी पर पहुंचे गैंगस्टर जितेंद्र मान गोगी (30) को वकीलों के वेश में आए 2 शूटरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके मौत के घाट उतार दिया जबकि दोनों शूटरों को पुलिस ने बाद में जवाबी कार्रवाई में मार गिराया। इस घटना में एक महिला वकील सहित 3 से 4 लोग घायल भी हुए हैं। जितेंद्र मान गोगी को लाए जाने से पहले ही दोनों शूटर अदालत परिसर में मौजूद थे। इस गैंगवार के पीछे कुख्यात गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया का हाथ बताया जा रहा है। जितेंद्र मान गोगी को 2 वर्ष पूर्व पुलिस ने गुरुग्राम से उसके 3 साथियों के साथ गिरफ्तार किया था। दिल्ली के बड़े गैंगस्टरों में शामिल जितेंद्र मान गोगी पर दिल्ली पुलिस ने 4 लाख रुपए तथा हरियाणा पुलिस ने अढ़ाई लाख रुपए का ईनाम रखा हुआ था। इसके गिरोह में 50 सदस्य थे जिनके जरिए जितेंद्र मान गोगी ने बेहिसाब सम्पत्ति बनाई। जितेंद्र मान गोगी तथा उसके गिरोह पर आरोप : 

* हरियाणा की मशहूर गायिका हर्षिता दाहिया की हत्या। 
* जनवरी, 2018 में अलीपुर के रवि भारद्वाज को 25 गोलियां मार छलनी किया गया। जून, 2018 में बुराड़ी में टिल्लू गैंग से हुई गैंगवार में 4 लोग मारे गए और 5 जख्मी हुए। तब टिल्लू के गैंग पर जितेंद्र मान गोगी ने हमला किया था। 
* नरेला में अक्तूबर, 2019 में आम आदमी पार्टी के नेता वीरेंद्र मान उर्फ कालू को 26 गोलियां मार कर मौत के घाट उतारा गया। इस वर्ष 19 फरवरी को रोहिणी के कंझावला में आंचल उर्फ पवन की 50 राऊंड फायरिंग कर हत्या की गई। 
* जितेंद्र मान गोगी और टिल्लू गैंग के बीच अब तक हुए अनेक मुकाबलों में 24 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। जितेंद्र मान गोगी तिहाड़ जेल के अंदर से ही दुबई के कारोबारी से 5 करोड़ रुपए रंगदारी मांगने के चलते चर्चा में था। दिल्ली के अलीपुर का रहने वाला जितेंद्र मान गोगी अब तक तीन बार पुलिस कस्टडी से फरार हो चुका था। 

30 जुलाई, 2016 को बहादुरगढ़ में दिल्ली पुलिस की हिरासत से जितेंद्र मान गोगी के साथी पुलिस कर्मियों की आंखों में मिर्च झोंक कर उसे छुड़ा ले गए थे और जाते समय जितेंद्र मान गोगी पुलिस वालों के हथियार भी लूट कर ले गया था। जितेंद्र मान गोगी दिल्ली के स्वामी श्रद्धानंद कालेज का छात्र और दिल्ली विश्वविद्यालय का टॉपर रहा था। किसी समय उसकी टिल्लू ताजपुरिया के साथ गहरी दोस्ती थी परंतु 2010 में छात्र संघ चुनाव के दौरान दोनों में रंजिश शुरू हुई जो जल्दी ही गैंगवार में बदल गई। गैंगस्टर नीतू दाबोदिया जब 2013 में पुलिस मुकाबले में मारा गया और डॉन नीरज बवानिया भी जेल चला गया तो जितेंद्र मान गोगी और टिल्लू ताजपुरिया के बीच वर्चस्व की जंग तेज हो गई और लगभग 7 वर्षों से दिल्ली के कुछ इलाके इन दोनों की गैंगवार के बीच पिस रहे हैं। टिल्लू भी तिहाड़ से ही अपना गिरोह चला रहा है। 

राजधानी में गैंगस्टरों के हौसले कितने बुलंद हैं इसका अनुमान रोहिणी के कोर्ट रूम में हुई गैंगवार से लगाया जा सकता है। यदि अदालत परिसर ही सुरक्षित नहीं है तो व्यवस्था पर कई तरह के सवाल उठना स्वाभाविक ही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पहले भी अदालतों में हुई गैंगवार की घटनाओं को लेकर कई कमेटियां बनी हैं परंतु उनकी कोई रिपोर्ट लागू नहीं हुई। रोहिणी कोर्ट में प्रमुख स्थानों पर आज भी कैमरे नहीं लगे हैं और जो लगे हुए हैं उनमें से भी अधिकांश काम नहीं कर रहे तथा नए कैमरे लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस और अदालत के बीच रस्साकशी जारी है। पुलिस का कहना है कि कैमरे अदालत लगवाए और अदालत का कहना है कि दिल्ली पुलिस लगाए। 

एक करोड़ रुपयों की लागत से खरीदे स्कैनर रोहिणी अदालत के बेसमैंट में पड़े हैं तथा सिर्फ प्रवेश द्वार पर एक स्कैनर लगा है जो काम ही नहीं करता। कोर्ट परिसर में प्रवेश के लिए वकीलों की कोई जांच नहीं की जाती और न ही उनका प्रवेश पत्र देखा जाता है। पेशेवर अपराधियों को अदालत में पेश करने पर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। ऐसे में वीडियो कांफ्रैंसिंग द्वारा पेशी पुलिस और सुरक्षा एजैंसियों, जजों, वकीलों, उनके स्टाफ आदि व मुवक्किलों को कुछ राहत दे सकती है। सिर्फ किसी एक अदालत परिसर में ही नहीं बल्कि सभी अदालत परिसरों में इस तरह की कमियों को दूर करने की जरूरत है ताकि वहां खूनखराबे और मारकाट की घटनाओं से न्याय प्रक्रिया में बाधा न पड़े।—विजय कुमार


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Chief Editor

vijay kumar

Recommended News