पंजाब कांग्रेस विवाद अगले सप्ताह तक सुलझने की आशा

10/01/2021 4:46:36 AM

2 वर्ष पूर्व पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह द्वारा नवजोत सिद्धू से महत्वपूर्ण मंत्रालय छीन लेने पर उनके द्वारा मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे देने के बाद से ही नवजोत सिद्धू ने उनके विरुद्ध मोर्चा खोल रखा था। अपने प्रति नवजोत सिद्धू की टिप्पणियों से नाराज कैप्टन अमरेंद्र सिंह भले ही उनसे माफी की मांग करते रहे परंतु नवजोत सिद्धू माफी न मांगने पर अड़े रहे। इस दौरान कांग्रेस हाईकमान ने दोनों में सुलह करवाने के प्रयासों के बीच अंतत: 18 जुलाई को सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंप दी। 

23 जुलाई को नवजोत सिद्धू के ताजपोशी समारोह में कैप्टन अमरेंद्र सिंह के शामिल होने से लगा था कि दोनों के मतभेद समाप्त हो गए हैं परंतु ऐसा हुआ नहीं और इनमें 2 वर्ष से जारी अनबन व टकराव के दृष्टिगत अंतत: कांग्रेस हाईकमान ने 18 सितम्बर को कैप्टन अमरेंद्र सिंह का त्यागपत्र उनके जोर देने पर स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही अगले मुख्यमंत्री के बारे में अटकलें शुरू हो गईं।

19 सितम्बर को सुखजिंद्र रंधावा के नाम पर सहमति बनती तो दिखाई दी परंतु अंतिम समय पर चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर सहमति बन जाने से उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर दी गई। चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने और उनके द्वारा नई टीम के गठन के बाद मंत्रिमंडल के विस्तार तथा चन्नी के कुछ फैसलों, अधिकारियों की नियुक्तियों एवं तबादलों को लेकर सिद्धू की नाराजगी शुरू हो गई और वह नए डी.जी.पी. इकबाल प्रीत सिंह सहोता तथा एडवोकेट जनरल ए.पी.एस. देयोल को हटाने की मांग पर अड़ गए। 

ऐसे हालात में नवजोत सिद्धू ने 28 सितम्बर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने की घोषणा करके धमाका कर दिया। इस दौरान जहां कांग्रेस हाईकमान सिद्धू द्वारा त्यागपत्र वापस न लेने की स्थिति में उनके विकल्पों पर विचार कर रही थी, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने फैसलों आदि पर चुप रहे। इसके साथ ही उन्होंने नवजोत सिंद्धू से बातचीत की पेशकश करते हुए कहा कि ‘‘जो गलतियां लग रही हैं उन पर आप पहले भी सवाल कर सकते थे और अब भी कर सकते हैं।’’  इस पर नवजोत सिंह सिद्धू ने 30 सितम्बर को पटियाला से चंडीगढ़ पंजाब भवन में जाकर चरणजीत सिंह चन्नी से भेंट की। केंद्रीय प्रेक्षक हरीश चौधरी भी इस अवसर पर मौजूद थे। 

डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद चन्नी तो बिना कुछ बोले पंजाब भवन से चले गए परंतु दूसरी ओर नवजोत सिद्धू के सलाहकारों ने कहा है कि सिद्धू चुनावों तक अध्यक्ष बने रहना मान गए हैं तथा मंत्रिमंडल में भी कुछ फेरबदल हो सकता है। इस बीच चन्नी ने 4 अक्तूबर को कैबिनेट की बैठक भी बुला ली है तथा आशा की जा रही है कि अगले सप्ताह तक पंजाब कांग्रेस के विवाद का कोई हल निकल आएगा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने चन्नी और सिद्धू की भेंट से पहले सिद्धू का नाम लिए बिना कहा था कि नए पुलिस महानिदेशक और एडवोकेट जनरल की नियुक्ति पर सवाल उठाने का मतलब मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की क्षमता पर सवाल उठाना है। 

जाखड़ के इस बयान पर कांग्रेस हाईकमान की चुप्पी का रवैया देखकर सिद्धू को साफ संदेश चला गया कि उनकी हर जिद अब पूरी नहीं होगी। इसीलिए उनके त्यागपत्र के 2 दिन बाद भी हाईकमान ने उनसे बात नहीं की और इसी को देखते हुए सिद्धू के प्रधान बनने से उत्साह में आए विधायक और नेता भी उनसे कुछ दूरी बनाने लगे थे। इससे यह तो सिद्ध हो गया है कि पंजाब कांग्रेस में अभी भी लोकतंत्र जिंदा है। यदि तानाशाही होती तो अब तक नवजोत सिद्धू को दरकिनार कर कांग्रेस हाईकमान ने कोई फैसला ले लिया होता। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग के दौरान गरीबों को दी जाने वाली मुफ्त 200 यूनिट बिजली बढ़ाकर 300 यूनिट करने के अलावा 32,000 नए मकान बनाकर देने की अच्छी घोषणा की है। 

इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक सुधार के कदम उठाते हुए अफसरों व कर्मचारियों की दफ्तरों में तय समय पर हाजिरी यकीनी बनाने के आदेश भी दिए और दूसरा बड़ा फैसला लेते हुए उन्होंने 53 लाख परिवारों के बिजली के बकाया बिलों को माफ करने की घोषणा भी कर दी। चरणजीत सिंह चन्नी अपने इन फैसलों के कारण लोकप्रिय हो रहे हैं और अब उन्होंने राजनीतिक समझदारी दिखाते हुए नवजोत सिद्धू को पार्टी के साथ जोड़े रखने की भी पहल की है। सिद्धू ने भी उनकी इस पहल के प्रति सद्भाव दिखाते हुए उन्हें पटियाला आने को मजबूर करने की बजाय खुद चंडीगढ़ आकर उनसे मुलाकात की और विवाद के विषयों को सुलझाने का प्रयास किया क्योंकि कांग्रेस के दोनों धड़ों को आपस में परस्पर सहमति से जल्द से जल्द विवाद सुलझा लेना ही प्रदेश और कांग्रेस के हित में है।-विजय कुमार


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Chief Editor

vijay kumar

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