‘अवैध पटाखा फैक्टरियों में धमाकों से’ जा रहे अनमोल प्राण!

punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2026 - 02:01 AM (IST)

देश में पटाखों की खपत काफी अधिक होने के कारण अवैध पटाखे बनाने वाले छोटे-बड़े सैंकड़ों कारखाने देश में चल रहे हैं। यहां अप्रशिक्षित और अनुभवहीन मजदूरों से काम करवाया जाता है जिनमें बड़ी संख्या में गरीब परिवारों की महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो इन अवैध कारखानों में होने वाले विस्फोटों के कारण मौत के मुंह में जा रहे हैं, जिसकी इसी वर्ष के पिछले साढ़े पांच महीनों में सामने आईं चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :

* 14 मई को ‘देवास’ (मध्य प्रदेश) के ‘टोंक कला’ गांव में एक अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट के परिणामस्वरूप वहां काम कर रहे 3 श्रमिकों की मौत हो गई तथा 27 अन्य घायल हो गए।
* 27 मई को ‘अमृतसर’ (पंजाब) में ‘अशोक नगर’ में एक तिमंजिला इमारत में चल रही अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट से मकान में आग लग जाने से एक महिला की मौत हो गई तथा 2 अन्य लोग झुलस गए।
* 31 मई को ‘कासगंज’ (उत्तर प्रदेश) के ‘पटिया’ गांव में चल रही एक अवैध पटाखा बनाने वाली फैक्टरी में आग लग जाने से वहां काम कर रहे 5 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए।
* 9 जून को ‘जयपुर’ (राजस्थान) के ‘खोह नागोरियान’ में एक रिहायशी इलाके में स्थित अवैध पटाखा गोदाम में लगी भीषण आग के कारण हुए धमाके में 8 लोगों की मौत हो गई। 
* 15 जून को ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) के ‘देवती’ गांव में स्थित एक पटाखों के गोदाम में आग लगने के कारण हुए विस्फोट में एक महिला की मौत हो गई तथा एक युवक गंभीर रूप से झुलस गया।
* 18 जुलाई को ‘अहमदाबाद’ (गुजरात) के ‘महमूदपुरा’ इलाके में स्थित एक अवैध पटाखा फैक्टरी में जोरदार धमाके के साथ आग लग गई। धमाका इतना भीषण था कि 5 किलोमीटर दूर तक उसकी आवाज सुनी गई। इसमें एक महिला सहित 9 श्रमिकों की मौत हो गई तथा 15 से अधिक श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए।

* 24 जुलाई को ‘गंगोह’ (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) में एक अवैध पटाखा फैक्टरी में भारी विस्फोट से 2 श्रमिकों की मौत हो गई व अनेक लोग झुलस गए।
* 31 अगस्त को ‘कौशाम्बी’ (उत्तर प्रदेश) में स्थित एक अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण धमाके के परिणामस्वरूप फैक्टरी पूरी तरह जमींदोज हो गई और आसपास के कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। इस दुर्घटना में 11 श्रमिकों की मौत हो गई तथा 22 अन्य बुरी तरह झुलस गए।
* 5-6 अक्तूबर की दरम्यानी रात को ‘ङ्क्षहगोली’ (महाराष्टï्र) में स्थित एक पटाखों के गोदाम में अचानक भीषण आग लग जाने से हुए विस्फोटों से सारा इलाका दहल गया और वहां खड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी जल गई। इस दुर्घटना में 2 श्रमिकों की मौत हो गई तथा 7 से अधिक अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
* 16 अक्तूबर को ‘वाराणसी’ (उत्तर प्रदेश) में एक मकान में रखी विस्फोटक सामग्री तथा पटाखों के कारण हुए भीषण विस्फोट से मकान का एक हिस्सा ढह गया।
* 23 अक्तूबर को ‘सिवान’ (बिहार) के ‘अल्मापुर’ में अवैध रूप से पटाखे बनाने वाली फैक्टरी में विस्फोट के परिणामस्वरूप वहां काम कर रहे एक ही परिवार के 7 सदस्यों सहित 8 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक दम्पति भी शामिल हैं। विस्फोट इतना भयानक था कि मकान पूरी तरह ढह गया और कई मृतकों के शरीर के टुकड़े 300 मीटर दूर तक जाकर गिरे। 

* 23 अक्तूबर को ही ‘अलवर’ (राजस्थान) में शहर के बीचों-बीच स्थित तिलक मार्कीट में एक कपड़े की दुकान की आड़ में चल रहे पटाखों के अवैध गोदाम में आग लग जाने से हुए धमाकों से इलाके में कोहराम मच गया।
अवैध पटाखा फैक्टरियों के मालिकों द्वारा अनुभवहीन लोगों से पटाखे बनवाने जैसा खतरनाक काम करवाने से होने वाली दुर्घटनाओं के ये तो महज चंद उदाहरण हैं। ये घटनाएं रोजी-रोटी के लिए लोगों द्वारा जान जोखिम में डालने की मजबूरी तथा इस तथ्य का प्रमाण हैं कि किस प्रकार ऐसी अवैध गतिविधियां लगातार जारी हैं। लिहाजा ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को चुस्त करने तथा सुरक्षा सम्बन्धी नियमों की अवहेलना कर अवैध पटाखा कारखाने चलाने वालों तथा  इन्हें चलने देने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।—विजय कुमार


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