‘चंद सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत’ टीचरों तथा बुनियादी ढांचे की कमी!
punjabkesari.in Thursday, Jul 23, 2026 - 04:16 AM (IST)
9 जुलाई, 2026 को ‘नीति आयोग’ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न कारणों से देश में कुल 94,028 सरकारी स्कूल बंद या दूसरे स्कूलों में विलय किए जा चुके हैं तथा इस वर्ष भी अनेक सरकारी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया जारी है। यही नहीं, कई स्कूलों में अध्यापकों व अन्य मूलभूत सुविधाओं आदि की कमी के कारण भी छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है जिसके विरुद्ध छात्रों और उनके अभिभावकों में रोष व्याप्त है जिसकी पिछले तीन महीनों में सामने आई चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 17 अप्रैल को ‘जम्मू-कश्मीर’ में चंद स्कूल बंद करने और चल रहे स्कूलों में स्टाफ की कमी करने पर गरीब और आॢथक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन किया।
* 13 मई को ‘बेंगलुरू’ में ‘कर्नाटक स्टूडैंट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया’ के बैनर तले छात्र नेताओं और अभिभावकों ने कम दाखिलों के बहाने सरकारी स्कूल बंद करने की नीति के विरुद्ध बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि वे किसी भी सरकारी स्कूल को बंद नहीं होने देंगे।
* 1 जून को ‘पश्चिम बंगाल’ माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी और गैर-शैक्षणिक कार्यों (जैसे एस.आई.आर. और प्रशासनिक ड्यूटी) में शिक्षकों की तैनाती को लेकर अभिभावकों ने ङ्क्षचता जताई। खबरों के अनुसार, ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर भी कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं थे।
* 10 जुलाई को ‘जाजपुर’ (ओडिशा) स्थित ‘धर्मशाला हाई स्कूल’ के आठवीं से लेकर दसवीं कक्षाओं तक के छात्रों ने शिक्षकों के तबादले और इस्तीफे के बाद पढ़ाई पूरी तरह ठप्प हो जाने के विरुद्ध रोषस्वरूप स्कूल के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रशासन द्वारा तुरंत 2 नए शिक्षक भेजने के बाद धरना समाप्त हुआ।
* 11 जुलाई को ‘जाजपुर’ और ‘कटक’ (ओडिशा) जिलों में शिक्षकों के तबादलों के कारण बंद पड़े सरकारी स्कूलों को फिर से खोलने की मांग को लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों ने स्कूलों के गेट पर ताला लगाकर अपना रोष व्यक्त किया।
* 15 जुलाई को ‘महासमुंद’ (छत्तीसगढ़) के ‘जम्हारी’ में स्थित ‘सरकारी हायर सैकेंडरी स्कूल’ में गणित, अर्थशास्त्र, संस्कृत, भूगोल, सामाजिक विज्ञान तथा राजनीति विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के अध्यापकों की कमी को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन के सातवें दिन तंग आए छात्रों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ही ताला लगा दिया और वहीं धरने पर बैठ गए।
* 17 जुलाई को देश के कई सुदूर ग्रामीण इलाकों से जर्जर स्कूल भवनों और शिक्षकों की अनुपलब्धता के विरुद्ध छात्रों द्वारा थाली और डफली बजा कर प्रदर्शन करने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
* 20 जुलाई को ‘अलवर’ (राजस्थान) में ‘उकेरी रैणी’ स्थित ‘सरकारी बालिका सीनियर सैकेंडरी स्कूल’ में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के 5 शिक्षकों के पद खाली होने के विरुद्ध छात्राओं और ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में उग्र प्रदर्शन किया।
स्थिति की गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अकेले कर्नाटक में 8042 और ओडिशा में 1458 स्कूल सिर्फ 1 शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। पंजाब के 1100 से अधिक सरकारी स्कूलों में पिं्रसीपलों के पद खाली पड़े हैं। कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में भी हैं जहां तक पहुंचना विद्याॢथयों के लिए बहुत कठिन होता है। देश की बड़ी जनसंख्या शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों पर ही निर्भर है, अत: सरकारी स्कूलों तक पहुंच आसान करने, उनके बुनियादी ढांचे में सुधार और अध्यापकों व अन्य स्टाफ की खाली पड़ी आसामियां तुरंत भरने की जरूरत है। सरकारी स्कूलों में व्याप्त उक्त त्रुटियां दूर करने से न सिर्फ देश में किसी सीमा तक शिक्षक वर्ग की बेरोजगारी दूर होगी तथा शिक्षा का स्तर उन्नत होगा, बल्कि देश को सक्षम और अधिक प्रतिभाशाली नागरिक भी मिलेंगे।-विजय कुमार
