दूसरे देशों में हिंसा फैला रहा पाकिस्तान अब अपनी लगाई आग में रहा झुलस

09/30/2021 4:04:22 AM

एक ओर पाकिस्तान के शासक भारत विरोधी गतिविधियों और अफगानिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं तो दूसरी ओर उनके अपने ही देश में उनके ही पाले हुए व बेकाबू हो चुके आतंकवादी हिंसा कर रहे हैं। 

* 23 सितम्बर को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के टांक जिले में आतंकवादियों ने लड़कियों का एक निर्माणाधीन स्कूल बम से उड़ा दिया। 
* 25 सितम्बर को बलोचिस्तान में हरनाई जिले के खोस्त इलाके में आतंकवादियों ने 4 सुरक्षा कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया। 
* 26 सितम्बर को बलोचिस्तान में ही चीनी परियोजनाओं का विरोध कर रहे ‘बलोच रिपब्लिकन आर्मी’ के सदस्यों ने ग्वादर शहर में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का बुत बमों से उड़ा दिया। 
* 27 सितम्बर को ब्रिटेन के दौरे पर पहुंचे पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के विरुद्ध पाकिस्तानियों ने लंदन में प्रदर्शन करके ‘पाकिस्तान शर्म करो’ तथा ‘हम पाकिस्तान में भी सुरक्षित नहीं’ के नारे लगाए। 

ऐसे हालात में अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री जार्ज शुल्त्ज का यह कहना ठीक ही लगता है कि पाकिस्तान दुनिया में सबसे खतरनाक इलाका है। इसके शासकों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध वहां असंतोष का लावा विस्फोटक रूप धारण करने लगा है परंतु इसके बावजूद अफगानिस्तान में तालिबान की सफलता का जश्र मना रहे पाकिस्तान के शासकों ने अपने ही देश को 12 विदेशी आतंकवादी गिरोहों की शरणस्थली बना दिया है। 

2020 में वहां गरीबी की दर बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई जो 2019 में 4.4 प्रतिशत थी। पाक वित्त मंत्रालय के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था खतरे में है। एक वर्ष के भीतर वहां खाद्य पदार्थों की कीमतों में 14.8 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि हो जाने के कारण लोगों की स्थिति बेहद खराब हो गई है और उन्हें अपनी आधी से अधिक आय भोजन पर खर्च करनी पड़ रही है। 

कभी सब्जियों के दाम आकाश छूने की खबरें तो कभी आटा-चावल के अभाव को लेकर मचे हाहाकार के बीच अब तो वहां पानी तक की कमी हो जाने के कारण स्थिति पर नियंत्रण न कर पाने से सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की चेतावनी भी विश्व बैंक के विशेषज्ञों ने दी है। इस तरह के हालात में यदि पाकिस्तान के शासक दूसरे देशों के मामलों में टांग अड़ाने की बजाय अपने देश के हालात सुधारने पर ही ध्यान दें तो उनके लिए ज्यादा अच्छा होगा।—विजय कुमार 


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Chief Editor

vijay kumar

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