विदेशों के अलावा अब सुरक्षाबलों के चंद सदस्य देने लगे माओवादियों को हथियार

punjabkesari.in Saturday, Nov 27, 2021 - 03:38 AM (IST)

नक्सलवादी या माओवादी गिरोहों ने पिछले पांच से अधिक दशकों से देश के अनेक राज्यों में सरकार के विरुद्ध छद्म युद्ध जारी रखने के अलावा खून-खराबा, लूटपाट और उत्पात मचा रखा है।2012 में गुप्तचर ब्यूरो की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चीनी गुप्तचर इकाइयां भारत में ङ्क्षहसक गतिविधियों के लिए माओवादियों को प्रशिक्षण देने के अलावा हथियारों और धन की सहायता दे रही हैं तथा चीन भारत के विभिन्न राज्यों में हमले करने के लिए माओवादियों तथा जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के उग्रवादी समूहों को इकट्ठा कर रहा है। 

इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि चीन की सहायता से माओवादी भारत में अवैध हथियारों की फैक्टरियां तक लगा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के तत्कालीन डी.आई.जी. सुंदर राज के अनुसार दिसम्बर 2011 और अप्रैल 2014 में माओवादियों के साथ कांकेर जिले में मुठभेड़ के दौरान अमरीका निर्मित 7.65 एम.एम. के आटोमैटिक पिस्तौल पकड़े गए थे। तब पकड़े गए माओवादियों ने बताया था कि उन्हें विदेशों से दिशा खोजने वाले और चीन निर्मित दूरबीनों जैसे उन्नत उपकरण प्राप्त हो रहे हैं तथा उन्हें श्रीलंका के ‘लिट्टे’ जैसे गिरोहों से भी ए.के.-47, इन्सास तथा एम-15 राइफलों की सप्लाई मिलती रही है। 

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में पकड़े गए माओवादियों से 2 मई, 2018 को जर्मनी में निर्मित राइफल बरामद हुई और 4 जुलाई, 2018 को नारायणपुर जिले में अमरीका में निर्मित सब-मशीनगन जब्त की गई। बहरहाल पहले तो नक्सलवादियों को विदेशों से हथियारों की सप्लाई मिलती ही थी अब उन्हें भारतीय सुरक्षाबलों के चंद गद्दार सदस्यों की ओर से भी अवैध रूप से हथियार मिलने लगे हैं : 

* 17 नवम्बर को झारखंड के एंटी टैरेरिज्म स्क्वायड (ए.टी.एस.) ने सी.आर.पी.एफ. के एक कांस्टेबल अविनाश कुमार को नक्सलवादियों को ए.के.-47 और इंसास राइफलें तथा उनका गोली-सिक्का सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया।
* 18 नवम्बर को झारखंड एंटी टैरेरिज्म स्क्वायड (ए.टी.एस.) ने नक्सलियों को हथियार और कारतूस सप्लाई करने वाले माड्यूूल का पता चलने के बाद मारे गए छापों के दौरान नक्सलवादियों और गैंगस्टरों को बी.एस.एफ. के जवानों की मदद से हथियारों की सप्लाई करने वाले 5 तस्कर गिरफ्तार किए। 

इनमें पंजाब के फिरोजपुर की बी.एस.एफ. की 116 बटालियन का  हैड कांस्टेबल कार्तिक बेहरा तथा बिहार के सारण से बी.एस.एफ. की 114 बटालियन से स्वैच्छिक रिटायरमैंट लेने वाला अरुण कुमार सिंह शामिल  है। आरोपियों के पास से 9000 राऊंड से अधिक कारतूस, 14 हाईटैक पिस्तौल और 21 मैगजीन सहित अनेक वस्तुएं बरामद की गईं। 

स्पष्ट है कि देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बन चुके इन माओवादियों को सुरक्षाबलों के सदस्यों द्वारा हथियारों की सप्लाई से स्थिति की गंभीरता और भी बढ़ गई है, अत: देश को इनके लगातार बढ़ रहे खतरे से मुक्त करवाने के लिए सुरक्षाबलों में शामिल इस तरह की काली भेड़ों का पता लगाकर उनके विरुद्ध तुरंत कड़ी कार्रवाई करना बहुत जरूरी है क्योंकि प्रत्यक्ष दुश्मन की तुलना में छिपा हुआ दुश्मन हमेशा अधिक खतरनाक होता है। कहनी है इक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल के रहना अपने घर में, छिपे हुए गद्दारों से।—विजय कुमार                                   
                                                     


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