उत्तर कोरिया की रूस और अब दक्षिण कोरिया से बढ़ती नजदीकियां!

punjabkesari.in Monday, Aug 24, 2026 - 03:13 AM (IST)

कोरिया का विभाजन पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति पर हुआ था, जिसमें रूस और अमरीका ने इसे 38वें समानांतर के साथ दो हिस्सों में बांट दिया। रूसी सेनाओं ने इसके उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया और ‘किम इल सुंग’ के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट सरकार का समर्थन किया। ‘किम इल सुंग’ जापान विरोधी गोरिल्ला लड़ाका था और उसके रूस से संबंध थे। अमरीकी सेनाओं ने दक्षिण कोरिया पर कब्जा कर लिया और कई वर्ष अमरीका में बिताने वाले कम्युनिस्ट विरोधी राष्टï्रवादी ‘सिंगमैन री’ को अपना समर्थन दिया। 1948 में ये उत्तर और दक्षिण कोरिया के रूप में दो स्वतंत्र देश बन गए और इस विभाजन को 1950 से 1953 तक चले कोरियन युद्ध ने पक्का कर दिया।

बहरहाल, अब बदले हुए राजनीतिक घटनाक्रम में पहली बार ऐसा हो रहा है कि उत्तर कोरिया चीन से अधिक रूस के निकट जा रहा है। उत्तर कोरिया द्वारा रूस को न सिर्फ ड्रोन तथा अन्य हथियार दिए जा रहे हैं, बल्कि वह रूस की सीमा पर यूक्रेन के विरुद्ध लडऩे के लिए अपने सैनिक भी भेज रहा है। पहले उत्तर कोरिया ने वहां 80,000 सैनिक भेजे तथा अब 50,000 और भेज रहा है। अभी हाल ही में अमरीका के रक्षा मंत्री ‘लाड आस्टिन’ ने सुरक्षा परिषद में कहा था कि उत्तर कोरिया जैसे देशों से मिले हथियारों ने ही यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध जारी रखने में रूस की मदद की है जो यूक्रेन के लिए सीधा खतरा है। ऐसे अनेक प्रमाण मौजूद हैं कि 2022 के मध्य से लेकर कम से कम 11,000 शिपिंग कंटेनर उत्तर कोरियाई बंदरगाहों से निकले और रूस पहुंचे, जिनमें गोला-बारूद था। उत्तर कोरिया और रूस के बीच कुछ समय पूर्व हुए नए रक्षा समझौते के बाद उत्तर कोरिया द्वारा मास्को की सहायता के लिए मास्को की आलोचना और बढ़ गई है।

यह सवाल पूछा जा रहा है कि इसके बदले में उत्तर कोरिया को क्या मिल रहा है? उत्तर कोरिया में खाद्य वस्तुओं का अत्यधिक अभाव है अत: रूस सरकार उन्हें गेहूं, खाने के तेल और चीनी देगी जिससे उत्तर कोरिया की खाद्यान्न की समस्या हल होगी, परंतु इसमें संशय ही है कि क्या उत्तर कोरिया को रूस की उन्नत मिलिट्री टैक्नोलोजी भी मिलेगी, जो तानाशाह किम जोंग उन को और भी ताकतवर बना सकती है! जो भी हो, रूस और उत्तर कोरिया के बीच कायम हुए सैन्य सम्बन्धों ने  वाशिंगटन के लिए चीन और ईरान सहित पाश्चात्य देशों का विरोधी पुख्ता गठबंधन होने को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है।

हालांकि 28,000 अमरीकी सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं। रूस के साथ उत्तर कोरिया के गहराते सम्बन्ध चीन और रूस के आपसी सम्बन्धों में भी संतुलन ला सकते हैं जिस पर अभी चीन हावी है। उत्तर कोरिया का सर्वाधिक व्यापार चीन के साथ है और मास्को से निकटता उसे अधिक जोखिम भरी विदेश नीति अपनाने का हौसला दे सकती है। इसके अलावा तीसरी बात जो होने जा रही है, वह यह है कि रूस अपनी ओर से उत्तर कोरिया को ब्रिक्स जैसे अंतर्राष्ट्रीय समूहों में लाने की कोशिश कर रहा है जिसे संभवत: ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश पसंद नहीं करेंगे, जो धीरे-धीरे पश्चिमी देशों के विरुद्ध एक गठबंधन में बदल रहा है। वैसे उत्तर कोरिया और चीन की तो आपस में बनती है परंतु उत्तर कोरिया की ब्राजील तथा भारत के साथ उतनी नहीं बनती तथा रूस के कंधों पर सवार होकर उत्तर कोरिया विश्व की राजनीति में अपना रुतबा बनाने के लिए प्रयत्नशील है। 

इसी बीच एक अन्य घटनाक्रम है दक्षिण कोरिया के साथ उत्तर कोरिया की चल रही बातचीत। यह पहली बार है जब छठे दशक में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध के बाद उत्तर और दक्षिण कोरिया आपस में इकट्ठे होने की बात कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया का कहना है कि वह न्यूक्लियर हथियारों के निर्माण के मामले में उत्तर कोरिया पर कोई रोक लगाने की बात कहने की बजाय उसे सिर्फ इसमें कुछ कमी करने के लिए ही कहेगा। अत: उत्तर कोरिया का रूस के निकट जाना और दक्षिण कोरिया का उत्तर कोरिया के साथ बात करना अमरीकी राजनीति के लिए बहुत अच्छा नहीं है, क्योंकि दक्षिण कोरिया को ज्यादातर अमरीका का और उत्तर कोरिया को ज्यादातर चीन का समर्थन प्राप्त है। अब यह सिस्टम बदल रहा है।

उल्लेखनीय है कि पिछले कई दशकों से दोनों कोरियाइयों ने एक-दूसरे के सर्वथा विपरीत आॢथक, राजनीतिक और सामाजिक रास्ता चुना है। दक्षिण कोरिया जहां एक लोकतांत्रिक देश तथा प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरा है, वहीं उत्तर कोरिया एक अलग-थलग तानाशाही शासन प्रणाली के रूप में, जिस पर सत्ता का पूर्ण नियंत्रण है और जो भारी आॢथक कठिनाइयों में घिरा हुआ है। उत्तर व दक्षिण कोरिया में बातचीत से जापान भी खुश नहीं क्योंकि जैसा पॢशयन जनरल मेजर जैकब मेकेल ने 1885 में कहा था, ‘‘कोरिया एक कटार की तरह है, जो जापान के दिल पर तनी हुई है।’’


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