‘भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदी’ भीड़ व स्टाफ की कमी से बन रहे अपराधी!
punjabkesari.in Friday, Jul 24, 2026 - 03:52 AM (IST)
भारतीय जेलों में कैदियों से नशे आदि प्रतिबंधित वस्तुओं की बरामदगी, गैंगवार, हत्या और आत्महत्या जैसी वारदातें आम हो गई हैं तथा वे जेल में रह कर भी सुधरने की बजाय अपराधी बन रहे हैं। कुछ मामलों में जेल अधिकारी भी वहां अपराधों में शामिल पाए जा रहे हैं जिनकी पिछले लगभग साढ़े 3 महीनों में सामने आई चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 11 अप्रैल को ‘प्रतापगढ़’ (उत्तर प्रदेश) जिला जेल में एक लड़की से छेड़छाड़ करने के आरोप में बंद कैदी ‘दीपक’ ने आत्महत्या कर ली।
* 22 मई को ‘उज्जैन’ (मध्य प्रदेश) के ‘भैरवगढ़ सैंट्रल जेल’ परिसर स्थित सरकारी क्वार्टर में रहने वाली एक महिला ने जेल प्रहरी के बेटे पर उसके साथ बलात्कार करने, मारपीट और धमकी देने के आरोप लगाए।
* 24 मई को ‘कपूरथला’ (पंजाब) जेल में कैदियों के 2 समूहों में झगड़े के बाद ङ्क्षहसा शुरू हो गई और जेल में भारी तोडफ़ोड़ की गई।
* 22 जून को ‘बरेली’ (यू.पी.) की सैंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी ‘दिनेश’ सुरक्षा कर्मियों, जो घटना के समय मोबाइलों पर सोशल मीडिया रील्स देखने में व्यस्त थे, को चकमा देकर फरार हो गया।
* 29 जून को ‘अजमेर’ (राजस्थान) की हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत ‘जगन गुर्जर’ की हत्या कर दी गई।
* 16 जुलाई को ‘हमीरपुर’ (हिमाचल) की सब-जेल में सुरक्षा जांच के दौरान मोबाइल फोन, तम्बाकू व अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद की गईं।
* 18 जुलाई को ‘गोरखपुर’ (यू.पी.) जेल में चोरी के आरोप में बंद कैदी ‘शौकत अफरोज’ ने गमछे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
* और अब 19 जुलाई को ‘अमृतसर’ की केंद्रीय जेल में तैनात ए.एस.आई. ‘गगनदीप सिंह’ की तलाशी के दौरान उससे 4.5 ग्राम नशीला पाऊडर तथा 63.5 गाम अफीम बरामद हुई जिसे वह पगड़ी में छिपा कर लाया था।
उक्त घटनाओं से स्पष्टï है कि भारतीय जेलों की स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। ‘नैशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो’ की जेलों बारे 2024 की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की कुल 1333 जेलों में औसतन हर 100 कैदियों के लिए निर्धारित जगह में 113 कैदी रह रहे थे।
इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि बहुत सी जेलों में कैदियों की संख्या इस राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है। महाराष्ट्र की जिला जेलों में हर 100 कैदियों के लिए उपलब्ध जगह में 195 कैदी और दिल्ली की जेलों में हर 100 कैदियों के लिए तय जगह में करीब 194 कैदी रह रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भारतीय जेलों में कुल 5,11,542 कैदी थे लेकिन इसमें से 1,36,138 कैदी ही ऐसे थे जिनका दोष साबित हो चुका था और वे उसकी सजा काट रहे थे, बाकी सभी अंडर ट्रायल या विचाराधीन थे जिनका दोष अभी साबित नहीं हुआ था। दुनिया में सर्वाधिक विचाराधीन कैदी भारत में ही हैं। इतने अधिक विचाराधीन कैदियों का होना अनेक समस्याएं पैदा करता है। निचली अदालतों में मामले वर्षों तक चलते रहते हैं और विचाराधीन कैदी वर्षों तक जेलों में बंद रह कर अनावश्यक भीड़ का कारण बने रहते हैं। ‘कामनवैल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ में प्रिजन प्रोग्रामों की प्रमुख ‘मधुरिमा धनुका’ का कहना है कि ‘‘जब सरकारी स्कूल क्षमता से अधिक छात्रों को स्वीकार नहीं करते, सरकारी अस्पताल भी ऐसा ही करते हैं तो जेलों में क्षमता से अधिक कैदी क्यों भरे जाते हैं?’’
इन हालात में अब 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को वृद्ध या गंभीर रूप से बीमार कैदियों की शीघ्र या समय पूर्व रिहाई के लिए तीन महीनों के भीतर एक नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की भीड़ व स्टाफ की कमी तथा लापरवाही उनमें अपराधों के मुख्य कारणों में से एक हैं। अत: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बुजुर्ग व अशक्त कैदियों को रिहा करके और विचाराधीन कैदियों के मामलों के निपटारे में अदालतों द्वारा तेजी लाकर जेलों में भीड़ की समस्या को काफी हद तक सुलझाया जा सकता है।-विजय कुमार
