विश्व की सरकारों में बढ़ रही ‘तानाशाही प्रवृत्ति’ ‘लोकतंत्र हो रहा कमजोर’

Wednesday, Oct 07, 2020 - 04:14 AM (IST)

विश्व में प्रजातांत्रिक मूल्यों के लिए काम करने वाली संस्था ‘फ्रीडम हाऊस’ के अनुसार गत वर्ष 64 देशों में लोकतांत्रिक मूल्य पहले की तुलना में कम हुए हैं तथा अनेक देशों में लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हो रही हैं। हाल ही के कुछ अर्से में विश्व में तानाशाही का रुझान बढऩे के अनेक उदाहरण सामने आए हैं। कहीं सत्ता प्रतिष्ठान के विरुद्ध लोगों में नाराजगी है, कहीं सरकारें एक-दूसरे पर हमले कर रही हैं तो कहीं अपने ही देश में आबादी के एक वर्ग को दमन का शिकार बनाया जा रहा है। ‘नार्गोनो कारबाक’ के विवादास्पद इलाके को लेकर आर्मेेनिया और अजरबैजान के बीच कुछ समय से जारी भीषण युद्ध में दोनों तरफ से हजारों लोगों की मृत्यु हो चुकी है। 

आर्मेेनिया और अजरबैजान की लड़ाई में पाकिस्तान और फ्रांस जैसे देशों के साथ-साथ तुर्की भी कूद पड़ा है और राष्ट्रपति रजब तैय्यब अर्दोगान ने कहा है कि हम अजरबैजान के साथ हैं। दोनों देशों की सेनाओं द्वारा किए जा रहे ताबड़तोड़ हैलीकाप्टर और मिसाइल हमलों से बचने के लिए लोग सुरंगों में छिप कर रह रहे हैं। अजरबैजान ने आर्मेनिया के अनेक गांवों पर कब्जा करने तथा आर्मेेनिया ने अजरबैजान के अनेक हैलीकॉप्टरों को मार गिराने का दावा किया है। अजरबैजान में मार्शल-लॉ और कई शहरों में कफ्र्यू लगा दिया गया है। अजरबैजान ने चेतावनी दी है कि यदि आर्मेनिया ने उसके नागरिक ठिकानों पर हमले बंद नहीं किए तो वह आर्मेनिया में मौजूद सैनिक ठिकानों पर हमले करके उन्हें बर्बाद कर देगा। दोनों देशों के बीच लड़ाई अब शहरों तक पहुंच गई है। 

चीन की दबंगई और दमनकारी नीतियों के चलते लगभग समस्त विश्व में रोष व्याप्त है। हांगकांग, शिजिंयांग, तिब्बत, वियतनाम, मंगोलिया तथा ताईवान के लोगों पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध हाल ही में चीन के राष्ट्रीय दिवस पर लंदन और टोक्यो में चीनी दूतावासों के बाहर प्रदर्शन किए गए। शिजिंयांग के उइगर मुसलमानों के बाद अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के निशाने पर हेनान प्रांत के उतसुल मुसलमान भी आ गए हैं। उनकी आबादी सीमित करने के लिए उन्हें जबरदस्ती परिवार नियोजन अपनाने और मुसलमान महिलाओं को जबरदस्ती गर्भपात के लिए विवश किया जा रहा है। इसके साथ ही धार्मिक कट्टरता समाप्त करने के नाम पर चीन सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने तथा स्कूलों व सरकारी कार्यालयों में मुसलमान पुरुषों के अरबी वेशभूषा पहन कर आने पर भी रोक लगा दी है। 

इसराईल की राजधानी यरूशलम में प्रदर्शनकारी 3 महीने से भी अधिक  समय से प्रति सप्ताह प्रधानमंत्री बैंजामिन नेतन्याहू के विरुद्ध उनके सरकारी आवास के बाहर एकत्रित होकर उनसे त्यागपत्र की मांग करते आ रहे हैं। सऊदी अरब और तुर्की में भी तनातनी चल रही है और सऊदी अरब ने तुर्की की प्रत्येक वस्तु का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। अमरीकी बलों के विरुद्ध बढ़ते रॉकेट हमलों के परिणामस्वरूप वाशिंगटन और बगदाद के बीच तनाव बढ़ गया है तथा हाल ही में ईराक के बगदाद हवाई अड्डे के निकट एक रॉकेट हमले में 5 लोग मारे गए। ईराक में एर्बिल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर 6 मिसाइलें दागी गईं। 

उत्तर कोरिया, अमरीका और दक्षिण कोरिया तथा रूस में तनातनी जारी है। स्पष्ट है कि इस समय विश्व के अनेक देशों अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, चीन, क्यूबा, एरिट्रिया, ईरान, तजाकिस्तान, कुवैत, लाओस, उत्तर कोरिया, ओमान, कतर, सऊदी अरब, स्वाजीलैंड, सीरिया, तुर्कमेनिस्तान, यू.ए.ई., वियतनाम, रूस और उज्बेकिस्तान आदि में निरकुंश शासन है। इनके विपरीत भारत, अमरीका, फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील, आस्ट्रेलिया समेत केवल 56 देशों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।

यही नहीं, इनके अलावा विश्व में कम से कम 10 ऐसे देश हैं जो शांति की एक मिसाल पेश कर रहे हैं इनमें आइसलैंड, डेनमार्क, आस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, चैक रिपब्लिक, स्विट्जरलैंड,  कनाडा, जापान, स्लोवेनिया शामिल हैं। ये शांतिप्रिय होने के साथ ही विश्व के सबसे कम भ्रष्ट देश माने जाते हैं। यदि विश्व के अन्य देश भी इन जैसे हो जाएं तो धरती को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाया जा सकता है परंतु इसके लिए वैश्विक नेताओं को अपनी तानाशाही प्रवृत्ति का त्याग करना होगा।-विजय कुमार 

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