‘बेमौसमी बाढ़, तूफान और हिमपात’  ‘साढ़ेसाती का संकेत’ नहीं तो क्या है!

punjabkesari.in Saturday, May 27, 2023 - 04:30 AM (IST)

पूरे संसार में प्रकृति का प्रकोप जारी है। कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब दुनिया के किसी न किसी कोने में भूकंप न आ रहे हों। इस वर्ष गर्मियां भी देर से आई हैं और मौसम रह-रह कर इस तरह करवट बदल रहा है कि कभी भारी गर्मी, कभी सर्दी तो कभी मानसून जैसा अभास होता है। बेमौसमी वर्षा, तूफान, हिमपात, ओलावृष्टि आदि जारी हैं। 
बिगड़े मौसम की मात्र 6 दिनों की चंद घटनाएं नीचे दी जा रही हैं :- 

* 21 मई को कर्नाटक में बेंगलुरू तथा अन्य स्थानों पर भारी वर्षा और ओलावृष्टिï से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। राज्य में 52 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 
* 23 और 24 मई को उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर गरज के साथ आंधी और वर्षा के परिणामस्वरूप 4 लोगों की जान चली गई। 

* 24 मई को हरियाणा के कई जिलों में भारी वर्षा हुई। कैथल में आंधी में एक दुकान की छत गिर जाने से उसके नीचे बैठे युवकों में से एक की मौत हो गई।
* 24 मई को ही हिमाचल के नाहन में एक बड़ा पेड़ कारों पर गिरने से 7 कारें क्षतिग्रस्त हो गईं तथा तूफान के चलते गेहूं, टमाटर आदि की फसलें भी बर्बाद हो गईं। 
* 25 मई को हिमाचल में ऊना जिले के हरोली में तूफान के कारण एक बाइक पर पेड़ गिरने से एक युवक की मौत तथा 2 अन्य घायल हो गए तथा जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ जिले के ‘केशवान’ में तूफानी वर्षा के कारण बकरवालों के तम्बू पर एक पेड़ गिरने से उसमें सो रही 3 महिलाओं सहित 4 लोगों की मृत्यु हो गई। 

* 25 मई को ही रांची सहित झारखंड के कई जिलों में जोरदार आंधी, वर्षा और बिजली गिरने की घटनाओं में 7 लोगों की जान चली गई।
* 25 मई को ही राजस्थान के टोंक में वर्षा के कारण एक मकान गिरने से 3 लोगों की मृत्यु हो गई। राज्य में अन्य स्थानों पर भी भारी वर्षा हुई। 
* 25 मई को ही उत्तराखंड के चमोली जिले के ऊंचाई वाले स्थानों पर हिमपात के कारण हेमकुंट साहिब यात्रा घांघरिया में रोक दी गई।
* 26 मई को शाम के समय हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीति की पहाडिय़ों पर हिमापत होने से ठंड बढ़ गई। 

ये तो मात्र 6 दिनों की चंद खबरें हैं, जबकि वास्तव में देश में लगातार आ रहे भूकंप, बाढ़ों, आंधी-तूफान आदि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली हानि तो कहीं अधिक है। इसे देखते हुए मन में प्रश्र उठना कुदरती ही है कि कहीं यह ‘साढ़ेसाती’ आने का संकेत तो नहीं!—विजय कुमार


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