‘जब पुलिस ही अपराधियों से सुरक्षित नहीं’ तो अपराध कैसे रुकेंगे!

punjabkesari.in Wednesday, May 25, 2022 - 03:38 AM (IST)

कुछ समय से देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। एक ओर आम लोगों के विरुद्ध हत्या, लूटपाट, बलात्कार जैसे अपराध जोरों पर हैं तो दूसरी ओर कानून के रखवाले कहलाने वाले पुलिस कर्मचारी भी अपराधी तत्वों के हाथों सुरक्षित नहीं हैं। आए दिन न सिर्फ हमले करके उन्हें लूटा जा रहा है बल्कि महिला पुलिस कर्मियों से बलात्कार तक हो रहे हैं जो निम्र ताजा उदाहरणों से स्पष्ट है : 

* 20 जुलाई, 2021 को सीकर (राजस्थान) में एक ढाबे पर खाना खा रहे 2 पुलिस कर्मचारियों की कार छीन कर 2 बदमाश फरार हो गए।
* 14 मार्च, 2022 को बांदा (उत्तर प्रदेश) में 2 बदमाश एक विवाह समारोह में शामिल होने गई डी.जी.पी. कार्यालय लखनऊ में तैनात सिपाही की पत्नी के गले में पड़ा हार और मंगलसूत्र छीन कर ले गए। 

* 12 अप्रैल, 2022 रात को सोनीपत (हरियाणा) में एक व्यक्ति ने महिला कांस्टेबल के क्वार्टर में घुस कर उसके साथ बलात्कार कर डाला तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दे डाली। 
* 19 अप्रैल को रेवाड़ी (हरियाणा) के शाहपुर गांव में अवैध खनन रोकने गए बावल थाने के 3 पुलिस कर्मचारियों को वहां मौजूद लोगों ने हमला करके घायल कर दिया। 
* 22 अप्रैल को मुम्बई में बाइक सवार 2 स्नैचर एक आटो में परिवार सहित जा रहे अपराध शाखा के अधिकारी का 1.4 लाख रुपए मूल्य का मोबाइल फोन छीन कर भाग गए।
* 15 मई को पठानकोट-जालन्धर हाईवे पर स्थित नंगलभूर गांव में ढाबे पर खाना खा रहे पंजाब पुलिस के 3 कर्मचारियों द्वारा कुछ युवकों को गाली-गलौच करने से रोकने पर उन्होंने उन पर हमला करके गंभीर रूप से घायल कर दिया तथा एक पुलिसकर्मी के हाथ की तीन उंगलियां कट गईं। 

* 16 मई को भोपाल के हबीबगंज में एक एस.यू.वी. में सवार महिला समेत 3 लोगों ने वाहनों की चैकिंग के दौरान न सिर्फ एक महिला कांस्टेबल का हाथ दांतों से बुरी तरह काट कर लहू-लुहान कर दिया बल्कि पुलिस दल के अन्य सदस्यों के साथ दुव्र्यवहार भी किया। 
* 19 मई को यमुनानगर के कलापुर गांव में एक व्यक्ति ने अपराधी को पकड़ने गए अम्बाला के चपार पुलिस थाने के एस.आई. जगदीश चंद्र, ए.एस.आई. राम कुमार व 2 अन्य लोगों पर गोली चलाकर उन्हें घायल कर दिया। 
* 20 मई शाम को भोपाल के प्रभात चौक में 3 स्कूटर सवार छात्राओं, जिन्होंने अपने स्कूटर पर ‘पुलिस’ लिख रखा था, को जब दीपिका कुशवाहा नामक महिला कांस्टेबल ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर रोका तो उन्होंने न सिर्फ उसके साथ दुव्र्यवहार किया बल्कि शुभांगी वर्मा नामक युवती ने महिला कांस्टेबल के पेट में ताबड़-तोड़ 3 बार लातें मार दीं। 

* 21 मई को बदमाशों ने लुधियाना के थाना डिवीजन नंबर 6 के इलाके में गश्त के लिए निकले एंटी नार्कोटिक्स सैल के कांस्टेबल बलदेव सिंह की वर्दी फाड़ दी और उसे मारपीट कर घायल करने के बाद उसकी कार छीनकर फरार हो गए। 
* 21 मई को ही नई दिल्ली में द्वारका के बिंदापुर इलाके के बाजार में अवैध कब्जे हटाने पहुंची पुलिस टीम पर कब्जाधारियों ने हमला करके एक एस.एच.ओ. सहित कई पुलिस कर्मचारियों को घायल कर दिया। 
* 21 मई वाले दिन ही भोपाल के मंगलवाड़ा इलाके में गलत ढंग से पार्क आटो हटाने के लिए कहने पर आटो चालक ने ट्रैफिक कांस्टेबल जितेन्द्र को बुरी तरह पीट डाला। 

* 22 मई को लुधियाना में सैर पर निकले पंजाब पुलिस के डी.एस.पी. सुखदेव सिंह के हाथ से मोबाइल झपट कर बदमाश फरार हो गए। 
* 22 मई को ही दिल्ली के दयालपुर इलाके में शराब माफिया ने एक सिपाही पर हमला करके उसकी वर्दी फाड़ दी।
* 23 मई को रामपुर (उत्तर प्रदेश) में बदमाशों ने अवैध खनन करने वाले माफिया की गिरफ्तारी के बाद पुलिस थाने पर धावा बोल कर वहां मौजूद पुलिस कर्मियों को लाठी-डंडों से पीट कर 4 पुलिस कर्मियों को घायल कर दिया। माफिया के एक सदस्य ने पिस्तौल तान कर पुलिस वालों को ललकारा, ‘‘हम इतने बड़े नेता हैं और तुम हमारा परिचय पूछ रहे हो।’’ 

लोगों और देश की रक्षा करने वाले पुलिस कर्मियों पर हमले निश्चय ही अपराधी तत्वों के बढ़ रहे दु:साहस और कानून का डर समाप्त हो जाने का ही परिणाम है। लिहाजा ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कड़े प्रावधानों वाला कानून बनाने की आवश्यकता है ताकि ऐसा करने वालों को कठोरतम दंड मिले और दूसरों को नसीहत।—विजय कुमार 


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