पठानकोट पर ग्रेनेड हमले ने खोली सुरक्षा प्रबंधों में ढील

11/24/2021 3:45:27 AM

पठानकोट पंजाब का एक छोटा लेकिन रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण शहर तथा सामरिक दृष्टि से भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक है। यह पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर का मिलन-स्थल है तथा जम्मू-कश्मीर जाने का सबसे महत्वपूर्ण सड़क और रेल मार्ग है। इस जिले का बमियाल क्षेत्र पाकिस्तान के साथ लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगता है और यहां से पाकिस्तान की सीमा मात्र 10 किलोमीटर की दूरी से ही शुरू हो जाती है। यहां देश का अत्याधुनिक एयरफोर्स स्टेशन है जिसमें अपाचे हैलीकॉप्टर जैसी स्क्वाड्रन के साथ-साथ वायुसेना के कई प्रकार के विमान हैं। यहां सेना के गोला-बारूद का डिपो एवं बख्तरबंद ब्रिगेड भी तैनात हैं। 

यहां एशिया की सबसे बड़ी छावनी मामून कैंट में स्थापित हो चुकी है। इन्हीं कारणों से पाकिस्तान की नजरों में पठानकोट हमेशा खटकता रहता है और इस क्षेत्र में आतंकी वारदातें करने का प्रयास पाकिस्तान की गुप्तचर एजैंसी आई.एस.आई. अपने पाले हुए आतंकवादियों के जरिए करती रहती है। 27 जुलाई, 2015 को पठानकोट के पड़ोसी शहर दीनानगर में आतंकवादी हमला हुआ था और इसके कुछ ही महीने बाद 2 जनवरी, 2016 को पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकवादी हमला किया गया। इस हमले में एक लैफ्टीनैंट कर्नल सहित 7 सैनिक शहीद हो गए थे। यह हमला तड़के करीब 3 बजे हुआ था तथा आतंकियों का सफाया करने के लिए सुरक्षा बलों को 65 घंटों तक ऑप्रेशन चलाना पड़ा। और अब 21 नवम्बर को देर रात 11 बजे एयरफोर्स स्टेशन से मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर सैन्य क्षेत्र के बाहर स्थित ‘त्रिवेणी द्वार’ पर ग्रेनेड हमला किए जाने के बाद राज्य भर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। 

एस.एस.पी. पठानकोट सुरेन्द्र लांबा ने बताया कि ग्रेनेड फैंकने के समय चौकी पर तैनात सुरक्षा कर्मी ने बाइक सवारों को वहां से गुजरते हुए देखा था। सुरेन्द्र लांबा के अनुसार इस हमले में पाकिस्तानी कनैक्शन के विषय में जांच तथा सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। सुरेन्द्र लांबा का यह भी कहना है कि पंजाब में पिछले दिनों हुए आतंकी हमलों में इस्तेमाल किए गए ग्रेनेड और पठानकोट में मिले स्क्रैप के कई विवरण आपस में मेल खाते हैं और यह आतंकी हमला ही है। जांच में शामिल एक अन्य पुलिस अधिकारी के अनुसार ऐसा भी लग रहा है जैसे प्लास्टिक पैकिंग में बारूद और छर्रे भर कर बम तैयार किया गया हो। ग्रेनेड के कुछ हिस्सों पर चिन्ह अंकित हैं जिनके आधार पर उससे सम्बन्धित सूचना भी एकत्रित की जा रही है।  किसी भी बड़ी घटना के बाद कुछ समय तक तो सुरक्षा एजैंसियां चाक-चौबंद रहती हैं परन्तु फिर उनकी चौकसी में ढील आने लगती है जिसे स्वयं पंजाब सरकार ने स्वीकार भी किया है। 

पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखजिन्द्र सिंह रंधावा, जिनके पास गृह विभाग भी है, के अनुसार रात में पर्याप्त गश्त नहीं की जा रही थी जिसे देखते हुए उन्होंने राज्य के सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को अपने-अपने क्षेत्रों में ड्यूूटी रोस्टर तैयार करने का आदेश देते हुए कहा है कि वह औचक रूप से वीडियो कॉलिंग द्वारा संबंधित ड्यूूटी ऑफिसर की लोकेशन चैक किया करें। सौभाग्यवश कम तीव्रता का होने के कारण उक्त हमले में किसी प्रकार की हानि तो नहीं हुई परन्तु इस हमले ने एक बार फिर सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोल दी है तथा इनमें आ रही ढिलाई को लेकर प्रशासन को ङ्क्षझझोड़ दिया है कि खतरा अभी भी मौजूद है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष 15 अगस्त के बाद पंजाब में 25 से अधिक बार ड्रोनों ने घुसपैठ की है और इन्हीं के जरिए हथियार, हैरोइन तथा टिफिन बम यहां भिजवाए जा रहे हैं। 

गत 2 वर्षों में पंजाब में हथियार तथा विस्फोटक मिलने की 33 घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि बी.एस.एफ. तथा पंजाब पुलिस ने बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए हैं परंतु इसके बावजूद कई हथियार गलत हाथों में पहुंचे हो सकते हैं लिहाजा सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढील की निर्दोष लोगों की मौत और सम्पत्ति की तबाही के रूप में भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।—विजय कुमार                                               
                                                        


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