भारत में पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विश्व सम्मेलन

punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 03:27 AM (IST)

आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस (ए.आई.) अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत तथा विश्व के अन्य देशों में विकास, गवर्नैंस में सुधार और पब्लिक सॢवस डिलीवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा आज की तारीख में भारत को विश्व में ए.आई. के उभरते हब के रूप में देखा जा रहा है। इसी सिलसिले में भारत में पहली बार ‘ए.आई. इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में 19-20 फरवरी को किया जा रहा है। यह समिट ‘ग्लोबल साऊथ’ में आयोजित किया जाने वाला पहला ए.आई. फोरम है। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नेता, नीति निर्माता, इंडस्ट्री और एक्सपर्ट शामिल होंगे जिसमें ए.आई. की बदलाव लाने वाली क्षमता और नई धारणाओं पर चर्चा की जाएगी। 

भारत के लिए यह गर्व की बात है कि इसमें सारी दुनिया से तकनीक जगत के विशेषज्ञ तथा नीति निर्माता शामिल होंगे। संयुक्त राष्टï्र की सांझेदारी में आयोजित किए जाने वाले इस सम्मेलन में परस्पर विश्वास और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।  इसमें 20 देशों के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और उपराष्ट्रपतियों सहित  30 से अधिक देशों के 300 से अधिक एग्जीबिटर हिस्सा लेंगे। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, गुआना के उपराष्ट्रपति भरत जगदेव, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड तारा मोंटानो, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेट्टïेरी आरपो, स्पेन के राष्ट्रपति सांचेज पेरेज, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गी पारमेलिन, नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री डिक स्कोफ, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबरे, यू.ए.ई. के शेख खालिद बिन मोहम्मद, अबूधाबी के क्राऊन प्रिंस आदि शामिल हैं। 

इस सम्मेलन में चीन और अमरीका द्वारा भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों का शिष्टमंडल भेजने की आशा है। यह विकासशील देशों में आयोजित होने वाला अपनी किस्म का पहला आयोजन है। भारत ने हाल के वर्षों में स्वयं को एक ए.आई. पावर हाऊस के रूप में स्थापित किया है। भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ए.आई. वर्कफोर्स और विशाल डाटा संसाधन है और इस आयोजन से भारत दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि ए.आई. केवल विकसित देशों के लिए नहीं बल्कि विकासशील देशों की समस्याओं, कृषि, स्वास्थ्य आदि को हल करने का जरिया है। 

एशिया सोसायटी पालिसी इंस्टीच्यूट (ए.एस.पी.आई.) की मैनेजिंग डायरैक्टर रारी डेनियल्स का कहना है कि भारत की उभरती ए.आई. गाइडलाइंस और पालिसी अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मॉडल बन सकती है। यह सम्मेलन भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के अनुसार बहुभाषी और बहुमाडल ए.आई. सिस्टम विकसित करने में सहायक होगा। इतनी बड़ी संख्या में भारत में विश्व भर के नेताओं का इकट्ठा होना भारत के लिए न सिर्फ गर्व और प्रतिष्ठा की बात है बल्कि इससे भारत को आॢथक और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढऩे के अनेक अनमोल अवसर प्राप्त होंगे। 


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