‘विश्व भर में बढ़ रही गोलीबारी’ ‘बेलगाम हिंसा, रक्तपात और असंतोष की आग’

punjabkesari.in Tuesday, Jul 12, 2022 - 03:29 AM (IST)

आज लगातार बढ़ रही गोलीबारी, बेलगाम हिंसा तथा रक्तपात का शिकार होकर अधिकांश विश्व किस कदर विनाश के निकट पहुंचता जा रहा है, इसके जुलाई माह के ही उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 1 जुलाई को अमरीका के ‘नेवार्क’ शहर में करियाना की एक दुकान के बाहर गोलीबारी में 9 लोग घायल हो गए। 
* 2 जुलाई को अफगानिस्तान के पूर्वी ‘नंगरहार’ प्रांत में  अज्ञात हमलावरों द्वारा एक धार्मिक स्कूल पर बम हमले में 8 लोग घायल हो गए।
* 3 जुलाई को ‘डेनमार्क’ की राजधानी ‘कोपेनहेगन’ के शॉपिंग माल में हुई अंधाधुध गोलीबारी में 3 लोगों की मौत तथा 3 अन्य गंभीर घायल हो गए।  

* 4 जुलाई को अमरीका के शिकागो में ‘स्वतंत्रता दिवस परेड’ के दौरान गोलीबारी में 6 लोगों की मौत तथा 24 अन्य घायल हो गए। यही नहीं इस वर्ष अभी तक अमरीका में सामूहिक गोलीबारी की 200 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं जबकि स्कूलों में ही गोलीबारी की 27 घटनाएं हुई हैं। 
* 5 जुलाई को पश्चिमोत्तर ‘बुर्किनाफासो’ के कम्यून में अज्ञात हमलावरों के हमलों में कम से कम 22 लोगों की मौत तथा अनेक घायल हो गए।
* 5 जुलाई को ही ‘उत्तर-पश्चिम होंडुरास’ की एक जेल में बंद 2 शक्तिशाली गिरोहों में से एक गिरोह ने अपने ही गिरोह के 6 सदस्यों को मार डाला। 

* 5 जुलाई वाले दिन ही अमरीका के इंडियाना तथा फिलाडेल्फिया में हुई गोलीबारी में 2 पुलिसकर्मियों सहित 5 लोगों की जान चली गई।
* 5 जुलाई को ही म्यांमार के ‘तामू’ कस्बे में अपने दोस्तों से मिलने जा रहे मणिपुर के ‘मोरेह’ कस्बे के 2 युवकों की म्यांमार की सेना द्वारा गठित मिलिशिया के सदस्यों ने हत्या कर दी। इसके विरुद्ध रोषस्वरूप उग्र लोगों की भीड़ ने मोरेह की सीमा से लगी म्यांमार की एक चौकी जला डाली। 

* 7 जुलाई को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक पुलिस चौकी पर बम हमले में एक पुलिस अधिकारी की मौत तथा 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी दिन उत्तरी वजीरिस्तान में सेना के काफिले पर आत्मघाती हमले में 8 सैनिक घायल हो गए।
* 7 जुलाई को ही पश्चिम बंगाल के ‘दक्षिण 24 परगना’ जिले में अज्ञात हमलावरों ने मोटरसाइकिल पर जा रहे तृणमूल कांग्रेस के एक नेता तथा पार्टी के 2 अन्य कार्यकत्र्ताओं की गोली मार कर हत्या कर दी।
* 8 जुलाई को मणिपुर के इम्फाल जिले के ‘आंद्रो’ थाने के ‘उकोल’ गांव में अज्ञात उग्रवादियों ने एक गैर मणिपुरी व्यापारी को मार डाला। 

* 8 जुलाई को ही जापान के नारा शहर में दिन-दिहाड़े एक युवक ने चुनावी सभा में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री ‘शिंजो आबे’ को गोली मार कर उनकी हत्या कर दी।
* 10 जुलाई को जोहान्सबर्ग के ‘सोवेटो’ इलाके में अज्ञात हमलावरों ने पार्टी कर रहे लोगों पर फायरिंग करके 15 लोगों की जान ले ली। इसी दिन ‘पीटरमारित्जबर्ग’ में 4 लोगों की हत्या कर दी गई। 
* 10 जुलाई को ही पड़ोसी श्रीलंका में  सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री का घर जला कर राष्ट्रपति के आवास पर कब्जा कर लिया जबकि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे एक दिन पहले ही वहां से खिसक गए  और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के भी पद से त्यागपत्र देने के बाद वहां विपक्षी दलों में अंतरिम सरकार बनाने पर सहमति हो गई है जिसके गठन के बाद समूचा विक्रमसिंघे मंत्रिमंडल इस्तीफा दे देगा। 

भारत में बिना सोचे-विचारे की जाने वाली बयानबाजी के चलते पैदा होने वाले साम्प्रदायिक तनाव की चपेट में देश के अनेक राज्य आए हुए हैं। हालांकि अनर्गल बयानबाजी द्वारा पहले तनाव पैदा करने वाले नेतागण बाद में माफी मांग कर अपनी जान छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अब यह तरीका भी कारगर साबित नहीं हो रहा है। 

वास्तव में कुछ तो है जिसने आज दुनिया की यह हालत कर दी है, जिसके लिए कोरोना महामारी का लोगों पर पडऩे वाला प्रभाव भी किसी हद तक जिम्मेदार हो सकता है। महामारी के दौरान लागू सुरक्षात्मक नियमों, सामाजिक दूरी, महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं ने बड़ी संख्या में लोगों में असहिष्णुता की भावना पैदा करने के अलावा उनकी सोच को प्रभावित किया है जिससे लोगों में आक्रामकता बढ़ रही है। 

विश्व भर में कट्टïरवादी विचारधारा बढऩे के कारण निराशा और अशांति को बढ़ावा मिल रहा है जिसके परिणामस्वरूप लोगों में उदारवादी विचारधारा में कमी आती जा रही है तथा असहनशीलता बढऩे से उनके आचरण और कार्यकलापों में आक्रामकता बढ़ रही है।विश्व में लगातार बढ़ रही बंदूक संस्कृति के परिणामस्वरूप भी लोगों में ङ्क्षहसक प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है जिसका परिणाम सारी दुनिया में तबाही के रूप में निकल रहा है।—विजय कुमार 


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