श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व कश्मीर घाटी में श्रद्धापूर्वक मनाया गया

2021-09-01T03:24:43.447

कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण जहां सदियों से वहां रह रहे बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को 1990 के दशक में घाटी छोड़नी पड़ी, वहीं हिंदुओं के त्यौहारों का मनाना भी न के बराबर हो गया था। परन्तु इस वर्ष 30 अगस्त को कश्मीर घाटी के श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर शोभायात्रा निकाली जो जैंदर मोहल्ला, हब्बा कदल इलाके के मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद शुरू होकर ‘हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की’ तथा ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ के जयकारे लगाती हुई श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक स्थित घंटाघर तक पहुंची। 

किसी समय कट्टरवादियों के गढ़ माने जाने वाले लाल चौक इलाके में हिंदू श्रद्धालुओं के साथ मुस्लिम भाईचारे के सदस्य भी उत्साह से नाचते-गाते और जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत करते व बधाई देते दिखाई दिए। भक्तों ने रथ के आगे नृत्य किया और मिठाइयां बांटीं। एक लम्बे अर्से के बाद यह पहला मौका था जब किसी समय आतंकवाद के लिए बदनाम हंदवाड़ा से लेकर मट्टïन तक का पूरा इलाका ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ जैसे नारों से गूंज उठा। अनंतनाग और कुलगाम में भी श्री कृष्ण जन्माष्टïमी धूमधाम से मनाई गई। 

यह संकेत है इस अशांत राज्य के शांति की ओर बढऩे का। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नैशनल कांफ्रैंस के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने तीन दिन पहले ही कहा था कि :‘‘आतंकवाद शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा, भरोसा रखिए। हमें अपने देश को बचाए रखना है। मैं एक नया भारत देखना चाहता हूं। ऐसा भारत जो सभी के लिए है। भगवान और अल्लाह हम सब में हैं।’’—विजय कुमार


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Content Writer

Pardeep

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