‘किसानों पर दोहरा संकट’ एक तो बरसात कम और दूसरे यूरिया की कमी!
punjabkesari.in Wednesday, Jun 10, 2026 - 02:17 AM (IST)
देश में 1 से 8 जून के बीच लगभग 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। एक ओर मौसम विभाग ‘अल नीनो’ के प्रभाव के कारण सामान्य से कम मानसून की भविष्यवाणी कर रहा है तो दूसरी ओर ईरान और अमरीका में छिड़े युद्ध के कारण देश में यूरिया खाद की कमी पैदा हो गई है और इसके विरोध में अब किसान सड़कों पर उतरने लगे हैं! यूरिया और अन्य उर्वरक खरीफ की फसल के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं तथा समय पर खाद उपलब्ध न होने पर धान, मक्का, कपास और अन्य प्रमुख फसलों की बुआई तथा उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
खरीफ के मौसम की मुख्य फसल धान है और इसमें आम तौर पर 2 बार यूरिया खाद का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित अधिकांश राज्यों में किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार यूरिया खाद नहीं मिल रही। हालांकि वर्ष 2022 से ही केंद्र सरकार भारत में जल्द ही यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर हो जाने का दावा करती आई है परंतु अभी भी यूरिया की कुल खपत का लगभग एक चौथाई भाग आयात किया जाता है। ईरान और अमरीका के बीच तनाव का प्रभाव अब भारत की खेती पर भी पडऩे लगा है। ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के रास्ते गैस की सप्लाई में बाधा के कारण देश में प्राकृतिक गैस की कमी भी पैदा हो गई है। इससे इस क्षेत्र में पानीपत, नंगल और बठिंडा स्थित यूरिया खाद बनाने वाले प्लांटों को गैस की आपूर्ति में 30-35 प्रतिशत की कमी आ जाने के कारण यूरिया खाद के उत्पादन में 25-30 प्रतिशत की कमी होने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और इसका सर्वाधिक प्रभाव पंजाब पर पड़ेगा। एक खाद डीलर का कहना है कि यदि यूरिया खाद की पर्याप्त सप्लाई यकीनी न बनाई गई तो किसान ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) तथा इसकी जमाखोरी शुरू कर सकते हैं।
पंजाब में हर साल लगभग 30-32 लाख टन यूरिया की खपत होती है जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत यूरिया धान की फसल में उपयोग होता है। ऐसे में सप्लाई में कमी से किसानों की उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय पर खाद न मिलने से धान की पैदावार में 15-20 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है। पंजाब में लगभग 30 लाख हैक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है जिसके लिए 15 लाख टन यूरिया की जरूरत होती है। इसे देखते हुए अधिक यूरिया के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से सम्पर्क किया है।
इस तरह के हालात के बीच 8 जून को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार आदि राज्यों के किसानों ने यूरिया खाद न मिलने के विरुद्ध रोष स्वरूप प्रदर्शन किए तथा केंद्र सरकार के पुतले जलाए गए। पंजाब के 22 जिलों में 74 स्थानों पर किसानों ने प्रदर्शन करके इस समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाया है।
किसानों का कहना है कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यों पर यूरिया नहीं मिल रहा। अनेक स्थानों पर प्राइवेट डीलर यूरिया खाद को ब्लैक में ऊंची दरों पर बेच रहे हैं तथा इसके साथ अन्य अनावश्यक वस्तुएं लेने के लिए भी किसानों को विवश कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि ‘को-आप्रेटिव सोसाइटियां’ भी किसानों को यूरिया के साथ ‘नैनो यूरिया’ तथा अन्य अनावश्यक चीजें लेने के लिए मजबूर कर रही हैं तथा पंजाब का कृषि विभाग इस समस्या का हल निकालने में विफल रहा है। अत: सरकार को इस ओर तुरंत ध्यान देकर देश में यूरिया की कमी दूर करने का प्रयास करना चाहिए ताकि खरीफ की फसल खराब न हो और किसान इस संकट से बच सकें।—विजय कुमार
