जुलूसों और लाऊडस्पीकरों का विवाद देश के ओर-छोर में उपद्रव जारी

punjabkesari.in Wednesday, May 04, 2022 - 03:29 AM (IST)

पिछले कुछ समय से देश के अनेक राज्य सांप्रदायिक उपद्रवों की चपेट में आए हुए हैं। राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शोभायात्रा पर पथराव तथा हमले से भड़के दंगों का सिलसिला 10 अप्रैल को निकाली गई श्री रामनवमी शोभा यात्राओं तक भी नहीं थमा। इन दिनों जहां कुछ राज्यों में विभिन्न धर्मस्थलों पर लगे लाऊडस्पीकरों की आवाज को लेकर विवाद छिड़ा होने के कारण वातावरण तनावपूर्ण बना हुआ है, वहीं राजस्थान के जोधपुर, उत्तर प्रदेश के संभल, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग और मध्यप्रदेश के खरगौन आदि में उपद्रव जारी हैं। 

* जोधपुर में जारी तीन दिवसीय परशुराम जयंती महोत्सव के दौरान 2 मई को दंगा हो गया। शहर के जालौरी गेट चौराहे पर लगी स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा की प्रतिमा पर फहराए गए भगवा ध्वजों को प्रशासन के अनुरोध पर एक वर्ग के सदस्यों द्वारा उतार देने के बाद दूसरे समुदाय के सदस्यों ने वहां अपना झंडा लगा कर स्वतंत्रता सेनानी का चेहरा टेप से ढांप दिया जिससे दंगा शुरू हो गया। 

इसी दौरान उपद्रवियों ने जोधपुर के जालौर पुलिस थाने में भी तोडफ़ोड़ की तथा उनके हमले में अनेक पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोडऩे के अलावा लाठीचार्ज भी किया तथा अफवाहें फैलने से रोकने के लिए इंटरनैट सेवाएं बंद करके किसी तरह स्थिति को शांत करने की कोशिश की। 

अगले दिन 3 मई को ईद की नमाज के बाद जोधपुर में उस समय फिर तनाव बढ़ गया जब उपद्रवियोंं द्वारा पुलिस पर पथराव शुरू कर देने के बाद उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को दोबारा लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े जिससे कई पुलिसकर्मी व पत्रकार घायल हो गए। इसके बाद शहर के 10 थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू लगा दिया गया।  जोधपुर में 3 मई को उपद्रवियों ने पूरी तरह सुनियोजित तरीके से 20 से अधिक वाहनों और कई इमारतों में तोड़-फोड़ और आगजनी की। तलवारें लहराईं, लोगों के घरों पर तेजाब की बोतलें फैंकीं तथा दीपक परिहार नामक एक युवक की पीठ पर चाकू से वार करके उसे घायल कर दिया। हिंसा के विरोध में लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया। 

* 3 मई को ही जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में एक धर्मस्थल के बाहर पत्थरबाजी हुई और प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर पत्थर फैंके।
* 3 मई वाले दिन ही उत्तर प्रदेश के संभल के ‘सदीरनपुर’ गांव में भी एक धर्मस्थल से लौट रहे युवकों पर फायरिंग के बाद दोनों ओर से जमकर बवाल हुआ और जिसके दौरान 2 बच्चों समेत 4 लोग घायल हो गए। 

* इस बीच मध्य प्रदेश के ‘खरगौन’ में दंगों के 22 दिन बाद भी कफ्र्यू के बीच ही त्यौहार मनाया गया। कफ्र्यू में ढील नहीं दी गई और न ही कोई जुलूस निकाला गया। स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए शहर में भारी फोर्स तैनात की गई है और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। 

* दूसरी ओर मनसे नेता राज ठाकरे द्वारा लाऊडस्पीकर लगाकर अजान के विरुद्ध 4 मई से मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा के बाद 3 मई को उनके विरुद्ध महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एफ.आई.आर. दर्ज करने के बाद उनके घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है। राजनीतिज्ञों की परम्परा के अनुसार संबंधित राज्यों के प्रशासन ने इन सभी घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है और प्रशासन को हर कीमत पर शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं इस पर राजनीति व आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू है। 

यहां उल्लेखनीय है कि इस तरह की समस्या उन राज्यों में पैदा हो रही है जहां अगले वर्ष चुनाव होने वाले हैं, अत: यह चिंता का विषय है कि आने वाले समय में हालात कहीं अधिक गंभीर रूप न धारण कर लें। प्रभावित स्थानों पर हिंसा के कारणों की जांच और अपराधियों की धरपकड़ की कवायद शुरू करने के दावे सरकारों द्वारा किए जाने लगते हैं और इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।

ये घटनाएं देश में लगातार बढ़ रही असहनशीलता और उसके खतरनाक परिणामों की चेतावनी दे रही हैं जिससे देश का सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक ताना-बाना टूटने का खतरा पैदा हो रहा है और इसका परिणाम अंतत: देश के कमजोर होने में ही निकलेगा लिहाजा इन्हें मजबूत हाथों से दबाने की जरूरत है।—विजय कुमार  


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