''क्रिप्टोकरंसी'' ने उड़ाई सरकारों और केंद्रीय बैंकों की नींद

2021-06-14T05:03:47.927

यदि आपने ‘क्रिप्टो करंसी’ के बारे में सुना है तो स भावना है कि आप यह भी जानते होंगे कि बिटकॉइन, एथेरियम, लाइटकॉइन, कार्डानो, स्टेलर इत्यादि क्या हैं। अधिक स भावना है कि आप युवा हैं, क प्यूटर विज्ञान के जानकार, निवेशक / व्यापारी हैं या सरकार में आर्थिक अपराध विभाग में काम करते हैं परंतु क्या आप यह भी जानते हैं कि वर्तमान में मूल्य ट्रैकिंग वैबसाइट ‘कॉइन मार्कीट कैप’ पर लगभग 4000 क्रिप्टो मुद्राएं सूचीबद्ध हैं। 

करंसी यानी मुद्रा का रूप और कार्य पिछले 3,000 वर्षों में बदलता रहा है। आमतौर पर चार श्रेणियों में अब तक मुद्रा की प्रणाली बदलती रही है। पहली कमोडिटी मुद्रा-अधिकतर कृषि समाजों में गेहूं अथवा मवेशियों को अक्सर मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इसका मूल्य शायद ही कभी उस संस्कृति की सीमाओं से परे होता था जो इसका उपयोग करती थी। 

फिर आए सोने अथवा चांदी के सिक्के, इसके पश्चात कागज के पैसे यानी कागज का एक टुकड़ा जो वास्तव में उस सरकार के बैंक का एक वायदा  है जिसने इसे जारी किया है कि वह इसके धारक को अपने भंडार से उस पर लिखित मूल्य अदा करेगा। अर्थात सरकारी मुद्रा के पीछे उस देश की सरकार का समर्थन है जबकि इस युग में आई क्रिप्टो करंसी के साथ ऐसा नहीं है। 

2006 में शुरू हुई बिटकॉइन के पास क्रिप्टो करंसी बाजार पूंजी का 2 ट्रिलियन डालर है और यह सबसे बड़ी करंसी है। पिछले वर्ष इसकी कीमत में खूब उछाल आया है और जब ‘टैस्ला’ के मालिक एलन मस्क ने यह घोषणा की कि वह अपनी इलैक्ट्रिक कारें बेचने के लिए बिटकॉइन को स्वीकार करेंगे, इसकी कीमत आसमान तक पहुंच गई। बिटकॉइन को ‘डिजिटल गोल्ड’ भी कहा जाता है। निवेशक इसमें रुचि ले रहे हैं क्योंकि सोने की ही तरह यह बेहद दुर्लभ है (केवल 18.7 मिलियन बिटकॉइन ही सर्कुलेशन में हैं और ट्रेडिंग के लिए 21 मिलियन बिटकॉइन उपलब्ध हैं) और इसे हैक भी नहीं किया जा सका है। 

इसका श्रेय इसकी सुरक्षित ‘ब्लॉकचेन’ तकनीक को जाता है, जिसमें बिटकॉइन के लेन-देन को सत्यापित करने, जिसे ‘प्रूफ ऑफ वर्क’ कहते हैं, के लिए ‘माइनर्स’ द्वारा बहुत पावरफुल क प्यूटर तकनीकों का उपयोग होता है जिसमें बहुत अधिक बिजली की अत्यधिक खपत होती है। इसी कारण कुछ दिनों पहले जब मस्क ने कहा कि वह बिजली की अत्यधिक खपत के कारण पर्यावरण को स भावित खतरे को देखते हुए बिटकॉइन को स्वीकार करने की योजना से पीछे हट रहे हैं और चीन ने भी अपने यहां क्रिप्टोकरंसी के इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाए तो बिटकॉइन के मूल्य में बहुत तेजी से गिरावट दर्ज हुई। 

हालांकि, वीरवार को ही अमरीका के सैंट्रल बैंक ने कहा कि वह क्रिप्टोकरंसी को बैन नहीं करेंगे बल्कि उसे कंट्रोल करेंगे। इस कारण क्रिप्टोकरंसी एकाएक फिर से बढऩे लगी है। वहीं एल साल्वाडोर क्रिप्टोकरंसी को कानूनी मान्यता देने वाला पहला देश बनने जा रहा है। हालांकि, क्रिप्टोकरंसी वास्तविक धन से जुदा है और इसका लेन-देन के सिवाय कोई अन्य मौद्र्रिक मूल्य नहीं है, यह सारा लेन-देन एक जटिल प्रणाली पर आधारित होता है जिसे ‘ब्लॉकचेन’ के रूप में जाना जाता है जो एक प्रकार का डिजिटल बहीखाता है। 

क्रिप्टोकरंसी की लोकप्रियता को देखें तो यह कहीं जा नहीं रही है क्योंकि यह लेन-देन में बैंक तथा सरकारों जैसे पारंपरिक ‘बिचौलियों’ को खत्म करने की कोशिश करते हुए वित्त जगत में पूरी तरह क्रांति लाने का दावा कर रही है। इसकी लोकप्रियता का एक कारण यह है कि जब आप किसी को ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करते हैं तो भी बैंकों की इसमें दखलअंदाजी होती है और सरकारों के नियमों का ध्यान रखना पड़ता है परंतु क्रिप्टोकरंसी के साथ ऐसा नहीं है। इससे आप किसी को भी तुरंत सीधा ट्रांसफर कर सकते हैं। 

बेशक इसके लेन-देन को भी ट्रैक किया जा सकता है परंतु अभी तक अधिकतर देशों की सरकारों ने इनकी तकनीक को समझने पर न तो ध्यान दिया है और न ही निवेश किया है। इन अत्याधुनिक एवं बेहद नवीन तकनीकों को समझने के लिए काफी पैसा चाहिए। क्रिप्टोकरंसी से तीन क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर हो रहा है-इंश्योरैंस, बैंक और सरकारें। सरकारों के इसके खिलाफ होने के कई कारण हैं। एक कारण तो यही है कि क्रिप्टो क्राइम हो रहे हैं। इसका उपयोग ड्रग मनी छिपाने, मनी लांङ्क्षड्रग, बच्चों के यौन उत्पीडऩ से लेकर आतंकवाद के वित्त पोषण तक में हो रहा है। इसके लिए ‘डार्क वैब’ (इंटरनैट का वह हिस्सा जिसका उपयोग साइबर क्राइम करने वाले करते हैं) में प्रयुक्त हो रहा है। 

सरकारों के क्रिप्टोकरंसी के विरुद्ध होने के अन्य कारण हैं क्योंकि उनकी तीन प्रमुख जि मेदारियां हैं-पहली देश की सुरक्षा, दूसरी अर्थव्यवस्था, तीसरी आंतरिक कानून-व्यवस्था। यदि क्रिप्टोकरंसी में ही सभी लेन-देन करने लगें तो उनके हाथों से अर्थव्यवस्था निकल जाएगी। हर देश के अपने वित्तीय कानून हैं, चाहे वह अमरीका हो या चीन जैसा सा यवादी देश, सबने अपने अलग नियम तय कर रखे हैं ताकि उनका अपनी अर्थव्यवस्था पर पूरा नियंत्रण रहे। अगर यही नहीं पता होगा कि किनके बीच में लेन-देन हो रहा है तो वे टैक्स कहां से लेंगे और ऐसे में उनकी आय कहां से होगी। क्रिप्टोकरंसी इस मामले में एक बड़ा खतरा है। 

इसी को देखते हुए अब कई देशों की सरकारें बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी के स्थान पर ‘स्टेबल कॉइन’ निकालने की योजना बना रही हैं। ये क्रिप्टोकरंसी जैसी ही होंगी परंतु इनके पीछे सरकारों और स्थानीय मुद्रा का समर्थन होगा।  बैंक ऑफ इंटरनैशनल सैटलमैंट्स के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 80 प्रतिशत देश इस समय स्टेबल कॉइन पर गौर कर रहे हैं। इन्हें ‘सैंट्रल बैंक डिजिटल करंसी’ (सी.बी.डी.टीज) भी कहा जा रहा है जिनका नेतृत्व चीन और स्विट्जरलैंड कर रहे हैं। 

बैंक भी क्रिप्टोकरंसी से मिल रही चुनौती को देखते हुए ब्लाकचेन तकनीक में निवेश कर रहे हैं। अपने शुल्क कम करने की कोशिश कर रहे हैं। वे अपनी शाखाएं और कर्मचारी भी कम कर रहे हैं ताकि अपने काम को अधिक से अधिक डिजिटल कर सकें जिससे उनके चार्ज कम हो सकें। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Pardeep

Recommended News