‘कोरोना बढ़ रहा है’ ‘डाक्टर इस्तीफे दे रहे हैं’

5/20/2021 4:54:59 AM

कोरोना की दूसरी लहर ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव कई गुणा बढ़ा दिया है। अब तक जहां हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है वहीं सैंकड़ों की सं या में डाक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग भी इसकी चपेट में आकर अपने प्राणों का बलिदान दे चुके हैं। 

भारतीय चिकित्सक संघ (आई.एम.ए.) के अनुसार कोविड-19 की पहली लहर में 748 डाक्टरों की मौत हुई थी जबकि दूसरी लहर में मात्र दो महीनों में 269 डाक्टरों की मौत हो चुकी हैै। इस तरह अब तक कोरोना वायरस की चपेट में आकर 1017 डाक्टरों की मौत हो चुकी है जबकि अन्य स्टाफ इसके अलावा है। आई.एम.ए. के अध्यक्ष डा. जे.ए. जयालाल के अनुसार, ‘‘वैश्विक महामारी की दूसरी लहर सभी के लिए बेहद घातक साबित हो रही है, खासकर अग्रिम मोर्चे पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए। कोविड की मौजूदा लहर की इतनी कम अवधि में ही हमने इतने अधिक चिकित्सक खो दिए हैं।’ 

कोरोना के बढ़ते मामलों से ग्रस्त मरीजों का उपचार करने के लिए डाक्टरों और नर्सों की कमी का सामना तो करना पड़ ही रहा है, इस बीच देश के कई हिस्सों में डाक्टरों के इस्तीफे देने की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं।

* 10 अप्रैल को मध्य प्रदेश के ग्वालियर के गजराज मैडीकल कालेज के 50 डाक्टरों ने कोरोना के भय से इस्तीफा दे दिया।
* 10 अप्रैल को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित जयप्रकाश अस्पताल में एक मरीज की मौत पर गुस्साए परिजनों ने हंगामा कर दिया। इस दौरान पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा भी अस्पताल पहुंचे और डाक्टरों से तीखे सवाल किए। इस हंगामे और बदसलूकी से व्यथित होकर अस्पताल के डा. योगेंद्र श्रीवास्तव ने रोते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

* 21 अप्रैल को गुजरात के अहमदाबाद में रेमडेसिविर तथा ऑक्सीजन की किल्लत से परेशान डा. वीरेन शाह ने ‘अस्पताल और नॄसग एसोसिएशन’ के सैक्रेटरी पद से इस्तीफा दे दिया।
* 2 मई को दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पैशलिटी अस्पताल के सबसे बड़े कोरोना केयर सैंटर में तैनात सहायक प्रोफैसर डा. शालीन प्रसाद ने अपनी नौकरी छोड़ दी।
* 5 मई को मध्य प्रदेश के इंदौर में 2 वरिष्ठ डाक्टरों-इंदौर जिले की हैल्थ अफसर डा. पूर्णिमा गडारिया और मानपुर क युनिटी हैल्थ सैंटर के डा. आर.एस. तोमर ने कलैक्टर मनीष सिंह तथा एस.डी.एम. अभिलाष मिश्रा पर उनके साथ दुव्र्यवहार का आरोप लगाते हुए इस्तीफे दे दिए।

* 6 मई को बठिंडा के सरकारी अस्पताल से 4 डाक्टर एक ही दिन में नौकरी छोड़ कर चले गए जिनमें से 2 ने तो 3 महीने का एडवांस वेतन भी सरकार को जमा करवा दिया।
* 8 मई को मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के टीकाकरण अधिकारी कमलेश अहीरवार ने इस्तीफा दे दिया। 

* 13 मई को उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 16 सरकारी डाक्टरों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ग्रामीण अस्पतालों के प्रभारी इन डाक्टरों ने आरोप लगाया कि जिले में कोविड का संक्रमण बढऩे पर उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है तथा उनसे बुरा व्यवहार किया जा रहा है।  
* 13 मई को ही मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सिविल मेहताब अस्पताल नरसिंहगढ़ में डाक्टर विशाल सिसोदिया ने बी.एम.ओ. डा. गौरव त्रिपाठी पर प्रताडऩा का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया।
* 17 मई को भारत के टॉप वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण ‘साइंटिफिक एडवाइजर ग्रुप’ से इस्तीफा दे दिया। वह ‘सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम ग्रुप’ के अध्यक्ष थे और उन पर वायरस के ‘जीनोम स्ट्रक्चर’ की पहचान की जिम्मेदारी थी। कोरोना वायरस महामारी के दौरान पिछले कुछ समय से वह सरकार के रुख की आलोचना कर रहे थे। 

अधिकांश डाक्टरों ने त्यागपत्र देने के कारणों में अपने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनसे ज्यादा ड्यूटी लेने के चलते दिमागी परेशानी व थकान, परिवार से दूरी, जोखिमपूर्ण स्थितियों में काम करने के बावजूद दुव्र्यवहार सहने, दवाओं और अन्य बुनियादी जरूरत की वस्तुओं व सुविधाओं के अभाव तथा रोगियों के परिजनों द्वारा किए जाने वाले हमलों आदि का उल्लेख किया है। ऐसेे हालात में यदि ‘कोरोना योद्धा’ डाक्टरों का हौसला टूट गया तो स्थिति को स भालना किसी भी तरह स भव नहीं होगा। अत: जरूरी है कि सरकार डाक्टरों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाए और उनकी सुरक्षा का भी पूरा बंदोबस्त करे।—विजय कुमार 


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