कांग्रेस में कांग्रेस और भाजपा में भाजपा ''खींच रहे एक-दूसरे की टांग''

6/4/2021 4:57:45 AM

कांग्रेस में एकजुटता कायम रखने के लिए सोनिया गांधी ने 10 मई को पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव टालते हुए कहा कि कांग्रेस को अपना घर सुधारने की जरूरत है। यदि कांग्रेस एकजुट रहेगी तभी मजबूती से सरकार के विरुद्ध जनहित के मुद्दों पर आवाज उठा सकेगी। लेकिन सोनिया गांधी की इस नसीहत का पार्टी पर कोई असर होता नजर नहीं आ रहा और इसमें पंजाब से केरल तक घमासान मचा हुआ है। केरल में तो चुनाव नतीजों के बाद पार्टी की हार के चलते घमासान शुरू हुआ लेकिन पंजाब में अगले वर्ष होने वाले चुनाव से पहले ही जंग छिड़ गई है। 

नौबत यहां तक आ गई है कि कै. अमरेंद्र सिंह और अमृतसर के विधायक नवजोत सिद्धू तथा अन्य अनेक मंत्रियों और विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए कांग्रेस को 3 सदस्यों की कमेटी बनानी पड़ी और पंजाब कांग्रेस के विधायक दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। कै. अमरेंद्र सिंह विरोधी विधायकों के साथ-साथ नवजोत सिद्धू के समर्थक विधायकों ने भी अपनी बात इस कमेटी के सदस्यों के सामने रखी है और कमेटी अब कै. अमरेंद्र सिंह का पक्ष भी सुनेगी जो दिल्ली पहुंचे हुए हैं। 

उधर उत्तर प्रदेश के अगले वर्ष होने वाले चुनावों में अपनी सत्ता कायम रखने के लिए प्रयत्नशील योगी आदित्यनाथ को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें कई विधायकों ने लिखा है कि लोगों में भाजपा के विरुद्ध भारी रोष और आक्रोष व्याप्त है। इस पर विचार किया जाए। इसी सिलसिले में पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी.एल. संतोष ने 1 जून को लखनऊ में बंद कमरे में हुई बैठक में सरकार के मंत्रियों को अलग-अलग बुला कर उनसे बात की। 

बैठक में चुनावी तैयारियों में कमी बारे पूछने पर एक मंत्री ने यहां तक कहा कि ‘‘कोरोना काल में जनता और कार्यकत्र्ताओं के बीच नाराजगी बढ़ी है।’’  इसी प्रकार एक अन्य मंत्री ने कहा, ‘‘इस समय नाराजगी बहुत अधिक है और चुनाव को लेकर दिक्कतें हैं। सभी जुटेंगे तभी जीत होगी।’’ हालांकि ‘श्री संतोष’ ने उक्त बैठक के बाद कहा कि पार्टी में सब ठीक है पर पार्टी के ही चंद लोग अपने कृत्यों से इसके लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।

3 जून को चोरी और हत्या के प्रयास के आरोप में फरार चल रहे हिस्ट्री शीटर मनोज सिंह को गिर तार करने पुलिस कानपुर भाजपा के जिला महामंत्री नारायण भदौरिया के जन्मदिन समारोह में पहुंची, जहां मनोज सिंह मौजूद था परंतु जैसे ही पुलिस ने उसे और उसके दो साथियों को पकड़ा तो भाजपाइयों ने उन्हें रोका और मनोज सिंह फरार हो गया। अब पुलिस मनोज के साथ-साथ नारायण भदौरिया को भी गिर तार करने के लिए दबिश दे रही है और भाजपा आलाकमान ने नारायण भदौरिया पर कार्रवाई करते हुए उसे सभी पदों से हटा दिया है। 

बिहार में भी चंद नेता पार्टी की किरकिरी करवा रहे हैं। सिवान से भाजपा एम.एल.सी. टुन्ना पांडे ने यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया है कि 4 बार के सांसद तथा 2 बार के विधायक रहे शहाबुद्दीन की साजिशन हत्या में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नीतीश कुमार का ही हाथ है तथा नीतीश कुमार तिकड़म से मु यमंत्री बने हैं। जनता ने तो तेजस्वी यादव (राजद) को चुना था। 

टुन्ना पांडे यहीं पर नहीं रुका, उसने यहां तक कह डाला कि ‘‘नीतीश कुमार 2009 के शराब घोटालेबाज हैं। मैं बहुत जल्द उन्हें जेल भिजवाऊंगा।’’ एक अवसर पर टुन्ना पांडे ने यह भी कहा कि वह बहुत जल्द नीतीश कुमार की पोल खोलने वाला है जिससे उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाएगी। बिहार में नीतीश कुमार नीत जद (यू) सरकार में भाजपा भागीदार है और जद (यू) ने भाजपा नेतृत्व से टुन्ना पांडे के उक्त बयान पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है जिस पर पार्टी (भाजपा) ने उसे नोटिस भेजा है। 

उल्लेखनीय है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर आए नेताओं को पार्टी में शामिल करने को लेकर भी पार्टी के वरिष्ठï नेता तथागत राय सहित अनेक नेता इसका विरोध कर चुके हैं। दोनों ही दल कांग्रेस और भाजपा चाहे सत्ता में रहें या विपक्ष में, देश के विकास के लिए इन दोनों का ही मजबूत होना और इनके सदस्यों का एक-दूसरे की टांग खींचने की बजाय पार्टी में अपने मतभेद भुला कर परस्पर मेल-मिलाप से चलना आवश्यक है। 

अत: दोनों ही पाॢटयों के केंद्रीय नेताओं को इस संबंध में संज्ञान लेते हुए अपने काडर को समझा कर सही रास्ते पर लाने की जरूरत है ताकि वे एक-दूसरे के विरुद्ध उल्टी-सीधी बयानबाजी करने की बजाय आपस में मिल कर एक आदर्श व सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दे सकें।—विजय कुमार


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