‘बंगलादेश कट्टरपंथी ताकतों के पंजे में’ हिंदुओं पर बढ़ रहे हमले!
punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 05:45 AM (IST)
बंगलादेश में जून, 2024 में शेख हसीना की सरकार के विरुद्ध आरक्षण और नौकरियों आदि में भेदभाव जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन के 3 महीनों बाद अंतत: 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना को गद्दी छोडऩी पड़ी और तब से उन्होंने भारत में ही शरण ले रखी है। ‘शेख हसीना’ के भारत आने के बाद सेना ने जब ‘मोहम्मद यूनुस’ को देश की सत्ता सौंप दी तो उम्मीद थी कि शायद वह उदारवादी रवैया अपना कर देश में व्याप्त असंतोष दूर करने और वातावरण सामान्य बनाने में सहायता करेंगे।
आशा के विपरीत ‘मो. यूनुस’ ने देश की पाठ्य पुस्तकों से बंगलादेश के मुक्ति संग्राम और बंग बंधु शेख मजीबुर्रहमान से संबंधित अध्याय निकाल देने का आदेश जारी करके देश के मुक्ति संग्राम का इतिहास मिटाने की कोशिशेंं शुरू कर दीं और सैंकड़ों आतंकवादियों को जमानत देकर या उनके विरुद्ध आरोप वापस लेकर उन्हें जेलों से बाहर कर दिया है। सेना और कट्टïरपंथियों के दबाव में आकर यूनुस प्रशासन ने देश में 12 फरवरी, 2026 को चुनाव करवाने की घोषणा की है। इसके साथ ही यूनुस ने शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाकर उसे क्रियात्मक रूप से चुनावों में भाग लेने से रोक दिया है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के अगले ही दिन कट्टïरपंथी संगठन ‘इन्कलाब मंच’ के प्रवक्ता और छात्र नेता ‘शरीफ-उस्मान-हादी’ ने ‘ढाका-8’ सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी परंतु इसके अगले ही दिन सरेआम एक मोटरसाइकिल सवार ने उसकी हत्या कर दी।
चुनावों के लिए तय तारीख की घोषणा के साथ ही बंगलादेश में हिंदुओं पर हमले बढ़ गए तथा पिछले 18 दिनों में ही वहां आधा दर्जन से अधिक ङ्क्षहदुओं की हत्या की जा चुकी है जबकि एक हिंदू महिला से बलात्कार और दरिन्दगी तथा आगजनी का विवरण निम्न में दर्ज है :
* 18 दिसम्बर, 2025 को ईश निंदा के आरोप में उपद्रवी भीड़ ने एक फैक्टरी में काम करने वाले ‘दीपू चंद्र दास’ की पीट-पीट कर हत्या करने के बाद उसके शव को पेड़ से लटका कर आग लगा दी।
* 23 दिसम्बर, 2025 को अज्ञात लोगों ने 2 सगे भाइयों ‘सुख शील’ और ‘अनिल शील’ के घरों को आग लगा दी।
* 24 दिसम्बर, 2025 को उपद्रवी भीड़ ने जबरन वसूली के आरोप में ‘अमृत मंडल’ नामक दुकानदार को मार डाला।
* 31 दिसम्बर, 2025 को भीड़ ने ‘खोकन चंद्रदास’ पर हमला करने के बाद उसे पैट्रोल डाल कर जला दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
* 1 जनवरी, 2026 को कट्टïरवादी तत्वों की हिट लिस्ट में शामिल ‘बजेंद्र बिस्वास’ नामक व्यक्ति की हत्या कर दी गई।
* 3 जनवरी, 2026 को बंगलादेश के ‘झिनाइदह’ में ङ्क्षहदू विरोधी तत्वों ने एक विधवा ङ्क्षहदू महिला से सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे पेड़ से बांध कर बुरी तरह पीटा और उसके बाल भी काट दिए।
* 5 जनवरी, 2026 को एक अखबार के संपादक ‘राणा प्रताप बैरागी’ को उसके सिर में गोली मार कर और गला रेत कर मार डाला गया।
* 5 जनवरी, 2026 को ही ‘सरत मणि चक्रवर्ती’ नामक दुकानदार की उसकी दुकान पर धारदार हथियारों से हमला करके हत्या कर दी गई।
ऐसी घटनाओं पर बंगलादेश की अंतरिम सरकार की चुप्पी उसकी नीयत में खोट का संकेत देती है जिस पर विश्व भर में चिंता व्यक्त की जा रही है। बंगलादेश में ‘जमात-ए-इस्लामी’ जैसी कट्टरवादी ताकतों तथा पाकिस्तान का प्रभाव बढऩे से वहां के लोगों में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ गई हैं और सुरक्षा मामलों में सहयोग भी प्रभावित हुआ है। कुल मिलाकर इस समय राजनीतिक अस्थिरता झेल रहा बंगलादेश कट्टïरपंथियों के दबाव में आकर आज ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका दिखाई देता है जहां से न लौटने पर उसकी तबाही निश्चित है।—विजय कुमार
